टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में हुआ नौकरियों के नाम पर 100 करोड़ का घोटाला!, चार अधिकारी सस्पेंड
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में नौकरियों के बदले रिश्वत घोटाले को लेकर चार अधिकारी सस्पेंड कर दिए गए हैं।
टेक्नोलॉजी प्रमुख कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज कथित तौर पर 'नौकरियों के बदले रिश्वत' घोटाले की चपेट में आ गई है। इस कंपनी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर हजारों कर्मियों की नियुक्ति में कथित तौर पर स्टाफिंग फर्मों से रिश्वत लेने का आरोप है।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और मुख्य परिचालन अधिकारी को लिए पत्र में आरोप लगाया गया कि टीसीएस के संसाधन प्रबंधन समूह के वैश्विक प्रमुख ईएस चक्रवर्ती ने वर्षों तक स्टाफिंग फर्मों से कमीशन लिया था।

एक रिपोर्ट के अनुसार, शिकायत पर कार्रवाई करते हुए टीसीएस ने आरोपों की जांच के लिए मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी अजीत मेनन सहित तीन अधिकारियों का एक पैनल गठित किया।
एक हफ्ते की जांच के बाद टीसीएस ने चक्रवर्ती को छुट्टी पर भेज दिया। भर्ती समूह के चार अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया और तीन स्टाफिंग फर्मों को ब्लैकलिस्ट कर दिया। कंपनी ने अभी तक अनियमितताओं के पैमाने का खुलासा नहीं किया है। लेकिन, एक अधिकारी ने बताया कि घोटाले में शामिल लोगों ने कथित तौर पर कमीशन के माध्यम से कम से कम 100 करोड़ रुपये कमाए।
संसाधन प्रबंधन समूह, जिसे आरएमजी के रूप से भी जाना जाता है। 3000 कर्मचारियों वाला इस समूह में नई भर्तियों सहित लगभग 1400 इंजीनियरों को परियोजनाओं पर नियुक्त करता है। पिछले साल टीसीएस ने 27.93 अरब डॉलर का राजस्व कमाया था और इसके कर्मचारियों की संख्या 6,14,795 है।
वहीं, एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने पिछले तीन वर्षों में तीन लाख से अधिक लोगों को काम पर रखा है। यहां तक कि अगर दस प्रतिशत भर्ती भी चयनित स्टाफिंग फर्मों के माध्यम से की गई थी। जो प्रत्येक भर्ती व्यक्ति पर कमीशन देती थी तो घोटाले का पैमाना कम से कम ₹ 100 करोड़ होगा।












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