सांसदी छोड़ विधायकी चुनी, कितना फायदा कितना नुकसान? जानिए कितनी होती है MP और MLA की सैलरी
Salary of MP and MLA: मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने शानदार जीत दर्ज की। मध्यप्रदेश में 230 में से 163, राजस्थान में 199 में से 115 और छत्तीसगढ़ में 90 में से 54 सीटें जीत कर भाजपा सरकार बनाने का अपना दावा पेश कर चुकी है। लेकिन अभी तक इन राज्यों में मुख्यमंत्री पद का चेहरा तय नहीं हुआ है।
इन तीनों राज्यों में कई नेता ऐसे हैं जिन्हें सांसद रहते हुए विधनसभा चुनाव का टिकट मिला और उन्होंने जीत भी दर्ज की। भाजपा के ऐसे 10 सांसदों ने अपनी सांसदी विधानसभा चुनाव जीतने के बाद छोड़ दी है। इन सभी घटनाओं के बीच एक सवाल सब के मन में उठ रहा है कि विधायकी के लिए सांसदी छोड़ने वाले इन नेताओं की कितनी कमाई होगी ? यानी की विधायक और सांसद की तनख्वाह कितनी होती है।

आपको बता दें, संसद के सदस्यों यानी की सांसदों को मिलने वाली सैलरी और सुविधाएं संसद सदस्य अधिनियम, 1954 के तहत दी जाती है। अगर कोई सांसद इस्तीफा देकर विधायक बनता है तो सांसद के तौर पर मिलने वाले वेतन, भत्ते और सुविधाओं में कटौती की जाती है।
सांसदों को क्या सुविधाएं और कितनी सैलरी मिलती है?
सभी सांसदों को भत्ते और पेंशन (संशोधन) अधिनियम, 2010 के अनुसार हर महीने 1 लाख रुपए सैलरी दी जाती है। इसके अलावा संसद के सदस्य को कई तरह के भत्ते और लाभ भी मिलते हैं। इन सांसदों को हर महीने 70 हजार रुपए निर्वाचन क्षेत्र भत्ता (Constituency Allowance) के तौर पर और 60 हजार ऑफिस के खर्चे के लिए सांसदों दिए जाते हैं। संसद सत्र के समय हर दिन दो हजार रुपये का भत्ता अलग मिलता है।
विधायकों को क्या सुविधाएं और कितनी सैलरी मिलती है?
सांसदों की तरह ही विधायकों को भी बहुत साड़ी सुविधाएं मिलती हैं। पर ये सुविधाएं हर राज्य के हिसाब से अलग-अलग होती है। छत्तीसगढ़ उन 5 राज्यों में शामिल है, जो विधायकों को सबसे ज्यादा वेतन देता है। यहां के विधायक को 1.60 लाख रुपए प्रति महीने सैलरी दी जाती है। इसके साथ ही, 15,000 रुपए की चिकित्सीय सुविधा और चार लाख रुपए हवाई और रेल यात्रा के लिए दिए जाते हैं।
मध्य प्रदेश में विधायकों की सैलरी फिलहाल 1.10 लाख रुपए प्रति महीन है। इसमें 30 हजार रुपए बेसिक सैलरी और 80 हजार रुपए मासिक भत्तों के रुप में दिए जाते हैं।
जबकि राजस्थान में विधायक को 40 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन के तौर पर दिया जाता है। इसके अलावा 70 हजार रुपए हर महीने कॉन्स्टिट्यूएंसी अलाउंस के तौर पर भी मिलते हैं।
सांसदी छोड़ विधायक बने नेताओं को कितना फायदा?
संसद की सदस्यता छोड़ कर विधायक बने नेताओं को विधायक की सैलरी के साथ-साथ सांसद की पेंशन भी मिलेगी। जब इन नेताओं की विधायकी खत्म होगी तब इन्हें सांसदी के साथ विधायकी की पेंशन भी मिलेगी।
यह देखें: 'संसद के इतिहास का काला दिन', लोकसभा से महुआ मोइत्रा के निष्कासन पर BJP पर बरसा विपक्ष












Click it and Unblock the Notifications