संघ ने 'दलित' शब्द पर दी ये सलाह, कहा- गुलामी की मानसिकता का प्रतीक
विश्व हिंदू परिषद के नए कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार भी इसकी पुष्टि करते हैं
नई दिल्ली। हाल ही में दलितों के अधिकारों को लेकर आंदोलन देखने को मिला था। इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 'दलित' शब्द को लेकर एक सलाह जारी किया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने स्वयंसेवकों को 'दलित' शब्द का उपयोग करने से बचने को कहा है। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी ने अपनी पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि 'दलित' शब्द अपमानजनक है, जो औपनिवेशिक सोच को दर्शाता है। ऐसे में इस शब्द के इस्तेमाल से बचना चाहिए। संघ की तरफ से जारी सलाह में दलित की जगह 'अनुसूचित जाति' और अनुसूचित जनजाति शब्द का इस्तेमाल करने को कहा गया है।

दलित शब्द अनुसूचित जाति के लोगों के लिए अपमानजनक है
हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक आरएसएस का मानना है कि दलित शब्द अनुसूचित जाति के लोगों के लिए अपमानजनक है। साथ ही यह ग़ुलामी की मानसिकता का प्रतीक भी है। इसीलिए समाज के संबंधित वर्गों के लिए इसकी जगह अनुसूचित जाति शब्द का इस्तेमाल करना ही उचित है। ऐसे ही आदिवासियों के लिए भी अनुसूचित जनजाति शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। यही वज़ह है कि संघ के स्वयंसेवकों को इस बाबत सलाह दिया गया है।

'दलित शब्द असल में मराठी भाषा का शब्द है'
विश्व हिंदू परिषद के नए कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार भी इसकी पुष्टि करते हैं। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के दलित चिंतक डी श्याम बाबू इस बारे में बताते हैं, 'दलित शब्द असल में मराठी भाषा का शब्द है। इसका मतलब है- पीड़ित और शोषित। इसके इस्तेमाल को लोकप्रियता दिलाने में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की सबसे अहम भूमिका रही। हालांकि संविधान में इस शब्द का कहीं ज़िक्र नहीं है।'

सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय ने ये कहा
आपको बता दें कि पिछले हफ़्ते सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय ने भी सभी राज्य सरकारों और सरकारी विभागों को 'दलित' शब्द की जगह अनुसूचित जाति का इस्तेमाल करने की बात कही थी। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ओर से इस बाबत जारी निर्देश की पृष्ठभूमि में ये कहा गया कि अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों के लिए अब 'दलित' शब्द इस्तेमाल न करें।












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