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Republic Day: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति मुर्मू का राष्ट्र के नाम संबोधन, जानिए 10 बड़ी बातें

President Murmu addresses on eve of Republic Day: भारत अपना 76वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। राष्ट्रीय पर्व के मुख्य आयोजन से पहले यानी गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के नाम अपने संबोधन में कई बड़ी बातों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे पिछले 76 वर्ष के गणतंत्रात्मक देश ने दुनिया के बड़े और विकसित देशों को पछाड़ने में कामयाबी हासिल की है। अपने संबोधन में मुर्मू ने इस बात का भी जिक्र किया कि भारत सात दशकों में रक्षा, ऊर्जा समेत कई अहम क्षेत्रों कैसे आत्मिर्भरता की ओर ओर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन की शुरुआत भारत के वीर सपूतों को याद करते हुए की जिन्होंने भारत की आजादी की लड़ाई यानी स्वतंत्रता संग्राम में अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया। राष्ट्रपति ने याद दिलाया की भारत के कई ऐसी हस्तियां हैं, जिन्हें भारत के इतिहास या तो भुला दिया गया, या फिर उन्हें याद करने में देर हुई। मुर्मू ने बिरसा मुंडा का भी जिक्र किया, जिनकी 150वीं जयंती इस वर्ष मनाई गई।

आइए जानते हैं, गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संबोधन में क्या- क्या बड़ी बातें कहीं-

President Murmu on the eve of Republic Day

1- इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर का तेजी से विकास: राष्ट्रपति मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि पिछले 7 दशकों में किसानों और मजदूरों के हाथों में अधिक पैसा आया और हमारे देश को निर्भर बनाया। श्रमिकों अथक परिश्रम के चलते भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर का तेजी से विकास हुआ। जिसके चलते आज भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व के आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित कर रही है।

2- भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय पर मजबूत
भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर नेतृत्व की स्थिति हासिल कर रहा है। संविधान में प्रस्तावित रूप रेखा के बिना व्यापक परिवर्तन संभव नहीं हो सकता था।

3- आर्थिक विकास दर में वृद्धि की निरंतरता रहेगी जारी: राष्ट्रपति मुर्मू
हाल के कुछ वर्षों में आर्थिक विकास के दौर लगातार ऊंची रही है, जिससे हमारी जुबान के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुई किसानों और मजदूरों के हाथों में अधिक पैसा आया है तथा बड़ी संख्या में लोगों को गरीबी से बाहर निकल गया है प्रगति की रफ्तार आगे भी बने रहेगी, जिससे विकास का लाभ व्यापक स्तर पर अधिक से अधिक देशवासियों तक पहुंचता रहेगा।

4- न्याय, स्वतंत्रता और बंधुता भारत की सभ्यता और संस्कृति का अंग: राष्ट्रपति
देश का सौभाग्य था कि महात्मा गांधी रवींद्रनाथ टैगोर और बाबासाहेब अंबेडकर जैसे महान विभूतियों ने हमारे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को फिर से जीवंत बनाया। न्याय, स्वतंत्रता और बंधुता केवल सैद्धांतिक अवधारणाएं नहीं है, ये जीवन मिलो तो सदा से हमारे सभ्यता और संस्कृति का अंग रहे हैं। नव स्वाधीन भारत के संविधान और गणराज्यों के संविधान को लेकर संदेह व्यक्त करते थे, उन लोगों को इन्हीं जीवन मूल्यों पर पर पूरी गलत व्यक्त किया जा सका। भारत के गणतांत्रिक मूल्यों को प्रतिबिंध हमारी संविधान सभा की संरचना में भी दिखाई देता है।

5- 'भारतीय संविधान एक जीवंत दस्तावेज'
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, "हमारा संविधान एक जीवंत दस्तावेज इसलिए बन पाया है सदियों से हमारे नैतिकता पर जीवन दृष्टि का प्रमुख तत्व है हमारा संविधान भारत भाषा के रूप में हमारी सामूहिक अस्मिता का मूल आधार है जो हमें एक परिवार की तरह एकता के सूत्र में फिट होता है।

6- 'भारत की नीयित को आकार देने में महिलाएं रहीं आगे'

राष्ट्रपति मुर्मू ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर कहा कि दुनिया में जब महिलाओं की समानत का आदर्श समझा जाता था, तो महिलाएं भारत की नीयति को आकार दे रहीं थीं। संविधान सभा में शामिल सरोजिनी नायडू, सुचेता कृपलानी, हंसा जीवराज मेहता, मालती चौधरी जैसे 15 महिलाएं इस बात का उदाहरण रही हैं।

7- संविधान ने 75 वर्षों में देश की प्रगति का मार्ग किया प्रशस्त: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। यह निरंतरता आगे भी बनी रहेगी। उन्होंने कहा की राष्ट्र का हर वर्ग देश के विकास में अब बढ़ चढकर अपना योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान की रूपरेखा में निहित अवधारणा के बल बूते पर ही यह बड़ा बदलाव संभव हो पाया है।

8- हमारा संविधान हमारी सामूहिक अस्मिता का मूल आधार: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति कहा कि संविधान ने देश और देशवासियों के नैतिक मूल्यों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम साबित हुआ है। उन्होंने कहा, "नागरिकों की निष्ठा सदियों से हमारे नैतिकता पर जीवन दृष्टि का प्रमुख तत्व है। हमारा संविधान हमारी सामूहिक अस्मिता का मूल आधार है।"

9- बड़ी संख्या में लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों को गरीबी से बाहर निकल गया है। भारत की आर्थिक सुधारों के बल पर प्रगति की यह रफ्तार बने रहेगा, जिससे विकास का लाभ व्यापक स्तर पर अधिक से अधिक देशवासियों तक पहुंच रहा है।

10- वित्तीय समावेशन को दी जा रही प्राथमिकता:राष्ट्रपति मुर्मू
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा, प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना जैसी स्कीम के जरिए आर्थिक रूप से पिछले लोगों को वित्तीय सहायता पहुंचाई जा रही है। वित्तीय समायोजन के तहतस आवास और प्रयोजन जैसे बुनियादी जरूरत को अधिकार माना गया है वंचित वर्गों के लिए विशेष रूप से अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों तथा वर्गों की सहायता के लिए सभी प्रयास किया जा रहे हैं।

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