Republic Day 2025 President Murmu Speech: 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर क्या बोलीं राष्ट्रपति मुर्मू?
Republic Day 2025 : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 76वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर आज शाम 7 बजे राष्ट्र को संबोधित किया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कई अहम मुद्दों पर बात की। उन्होंने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' योजना सहित प्रमुख सुधारों के पीछे की साहसिक दृष्टि की सराहना की।
उन्होने कहा कि शासन की निरंतरता को बढ़ाने, नीतिगत पक्षाघात को रोकने के दिशा में हर किसी को काम करना चाहिए। इसी के साथ ही उन्होंने देश में चल रही कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि "प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति उत्थान योजना रोजगार और आय के अवसर पैदा करके अनुसूचित जाति के लोगों की गरीबी को तेजी से कम कर रही है।"
राष्ट्रपति मुर्मु का ये तीसरा गणतंत्र दिवस संबोधन(Republic Day 2025)
आपको बता दें कि यह उनका तीसरा गणतंत्र दिवस संबोधन है। राष्ट्रपति का संबोधन आकाशवाणी के सभी राष्ट्रीय नेटवर्क और दूरदर्शन के चैनलों पर हिंदी में प्रसारित हुआ। बता दें कि हर वर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति देशवासियों को संबोधित करते हैं और गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए देश की एकता, अखंडता और विकास पर जोर देते हैं।
आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली पहली महिला राष्ट्रपति (Republic Day 2025)
आपको बता दें कि द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के रूप में 2022 का राष्ट्रपति चुनाव जीता था, वह आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली पहली और प्रतिभा पाटिल के बाद यह पद संभालने वाली दूसरी महिला है, यही नहीं वो स्वतंत्र भारत में जन्मी पहली राष्ट्रपति भी हैं।
क्या है 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' योजना?
- 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' का मतलब है कि पूरे देश में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएं।
- इससे बार-बार होने वाले चुनावों के कारण आने वाली चुनौतियों और समस्याओं से बचा जा सकता है।
- भाजपा इसके पक्ष में लेकिन विरोधी पार्टियां इससे सहमत नहीं हैं।
'एक राष्ट्र, एक चुनाव' योजना क्यों जरूरी? भाजपा के तर्क निम्नलिखित
- भारत में हर साल किसी न किसी राज्य में चुनाव होते रहते हैं, जिससे धन की भारी बर्बादी होती है।
- एक साथ चुनाव कराए जाने से इन खर्चों में कमी लाई जा सकती है।
- बार-बार चुनाव होने से आचार संहिता लागू हो जाती है, जिससे सरकारी योजनाओं पर रोक लग जाती है।
- हर चुनाव में बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों और प्रशासनिक कर्मियों की जरूरत पड़ती है यदि एक साथ चुनाव हों, तो इनका बेहतर उपयोग हो सकता है।
- जब चुनाव एक साथ होंगे, तो मतदाताओं को बार-बार मतदान के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
चुनौतियां और आलोचनाएं
- 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' को लागू करने के लिए संवैधानिक संशोधन जरूरी होगा।
- इतने बड़े स्तर पर चुनाव कराने के लिए भारी संख्या में ईवीएम, वीवीपैट और मानव संसाधनों की आवश्यकता ।












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