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Red Fort Kalash Theft: लाल किला से चोरी हुए 1 करोड़ के कलश बरामद, यूपी के इस शहर में छुपा कर रखा था

Red Fort Kalash Theft: दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला परिसर से चोरी हुए करीब 1 करोड़ रुपये मूल्य के कलश मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मुख्य आरोपी को उत्तर प्रदेश के हापुड़ से गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि केवल एक नहीं बल्कि तीन कलश चोरी हुए थे, जिनमें से एक को बरामद कर लिया गया है। बाकी दो कलश की तलाश और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। इस गिरफ्तारी के बाद मामले की परतें तेजी से खुल रही हैं।

Red Fort Kalash Theft

कब और कैसे हुआ था चोरी?

दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला परिसर के 15 अगस्त पार्क में कुछ दिनों पहले जैन समाज का धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए थे और प्रतिदिन की तरह पूजा-पाठ का सिलसिला जारी था। अनुष्ठान के बीच ही धोती पहने एक शख्स ने बड़ी चालाकी से चोरी को अंजाम दिया।

सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, आरोपी बड़ी सफाई से भीड़ में घुल-मिलकर पूजा स्थल तक पहुंचा। उसने पहले आसपास का मुआयना किया और जैसे ही मौका मिला, मंच पर रखे सोने और हीरे-रत्नों से जड़े कलश को अपने झोले में डाल लिया। चूंकि मंच पर केवल परंपरागत परिधान पहने अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति थी, इसलिए आरोपी को शक की नज़र से किसी ने नहीं देखा।

इस पूरी वारदात के बाद जब आयोजन समिति ने पूजा-पाठ समाप्त किया और कलश गायब पाया, तो हड़कंप मच गया। तुरंत पुलिस को इसकी जानकारी दी गई और जांच शुरू हुई। सीसीटीवी फुटेज से आरोपी की पहचान संभव हो पाई, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने दबिश देकर उसे हापुड़ से गिरफ्तार किया।

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कलश की धार्मिक और ऐतिहासिक अहमियत

यह कलश सिर्फ सोने और रत्नों का आभूषण नहीं था, बल्कि जैन समाज के धार्मिक अनुष्ठानों का अहम हिस्सा माना जाता था। इसमें लगभग 760 ग्राम सोना और करीब 150 ग्राम बहुमूल्य रत्न जैसे हीरा, पन्ना और माणिक्य जड़े हुए थे। आयोजन समिति के सदस्य पुनीत जैन ने बताया कि यह कलश लंबे समय से पूजा और धार्मिक आयोजनों में प्रतिदिन उपयोग किया जाता था।

हर दिन पूजा-पाठ के दौरान कलश विशेष मंच पर स्थापित किया जाता था और केवल परंपरागत परिधान पहने अधिकृत व्यक्तियों को ही मंच पर प्रवेश की अनुमति होती थी। इस वजह से कलश का चोरी होना न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी एक गंभीर घटना थी।

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