Karnataka Politics: डीके शिवकुमार सरकार को बड़ा झटका, शपथ के 48 घंटे बाद मंत्री रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा

Karnataka Minister Ramalinga Reddy Resigns: कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को गठन के कुछ ही दिनों भीतर पहला बड़ा सियासी झटका लगा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और नवनियुक्त कैबिनेट मंत्री रामलिंगा रेड्डी (Ramalinga Reddy) ने शुक्रवार, 5 जून को अपने पद से इस्तीफा देने का एलान कर दिया है।

मुख्यमंत्री शिवकुमार द्वारा मंत्रियों को विभागों का बंटवारा (Portfolio Allocation) किए जाने के ठीक अगले ही दिन आए इस इस्तीफे से कर्नाटक कांग्रेस के भीतर मची रार खुलकर सामने आ गई है।

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बेंगलुरु में एक नाटकीय प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रामलिंगा रेड्डी ने साफ किया कि वे इस तरह के 'अपमान' को बर्दाश्त नहीं कर सकते और अपनी अंतरात्मा के खिलाफ जाकर काम नहीं करेंगे।

Ramalinga Reddy के इस्तीफे के विवाद की असली वजह क्या है?

खबरों के मुताबिक, रामलिंगा रेड्डी कैबिनेट में मनपसंद विभाग न मिलने से बेहद नाराज थे। गुरुवार रात को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपने 13 मंत्रियों के विभागों की सूची जारी की थी, जिसके बाद से ही विवाद की पटकथा लिखी जाने लगी थी।

रामलिंगा रेड्डी बेंगलुरु के कद्दावर नेता हैं और वे कैबिनेट में 'बेंगलुरु विकास' मंत्रालय का प्रभार चाहते थे। गौरतलब है साल 2023 के आंतरिक समझौतों के दौरान पार्टी आलाकमान ने उनसे इसका वादा भी किया था। इसके उलट, उन्हें 'प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई परियोजना' मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंप दी गई, जबकि बेंगलुरु विकास मंत्रालय कृष्णा बायरे गौड़ा को दे दिया गया।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच में मनाने पहुंचे नेता, पर वक्त निकल चुका था

रामलिंगा रेड्डी के इस कदम से पूरी कांग्रेस लीडरशिप में हड़कंप मच गया है। जब रेड्डी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के सामने अपनी बात रख रहे थे, ठीक उसी बीच कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता आलाकमान और मुख्यमंत्री का संदेश लेकर उन्हें मनाने पहुंचे। नेताओं ने उनसे लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही अपना फैसला बदलने और बातचीत के जरिए मामला सुलझाने की मिन्नतें कीं।

लेकिन, रामलिंगा रेड्डी अपने फैसले पर अडिग रहे। उन्होंने मनाने आए नेताओं से दो टूक शब्दों में कहा, "अब सुझावों पर ध्यान देने का समय निकल चुका है।" उन्होंने संकेत दिया कि जब मुख्यमंत्री विभागों का फैसला कर रहे थे, तब उनके सीनियरिटी का ध्यान क्यों नहीं रखा गया।

डीके शिवकुमार सरकार के सामने पहली बड़ी परीक्षा, क्या मानेंगे रेड्डी या बढ़ेगा विवाद?

सिद्धारमैया के बाद राज्य की कमान संभालने वाले मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए यह बगावत एक बड़ी अग्निपरीक्षा की तरह है। रामलिंगा रेड्डी कांग्रेस के उन गिने-चुने कद्दावर नेताओं में से हैं जो पिछले पांच दशकों से पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं और परिवहन से लेकर गृह मंत्रालय जैसे बड़े विभागों को संभाल चुके हैं। बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ है।

अब सभी की नजरें कांग्रेस आलाकमान और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर टिकी हैं। पार्टी नेतृत्व कोशिश करेगा कि किसी तरह रामलिंगा रेड्डी को मनाकर संकट को टाला जाए। हालांकि रेड्डी के ताजा बयानों से साफ है कि वह फिलहाल अपने फैसले पर अडिग हैं। अगर उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया जाता है, तो यह डीके शिवकुमार सरकार के गठन के तुरंत बाद सामने आया पहला बड़ा राजनीतिक संकट माना जाएगा।

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