Delhi में बाढ़ रोकने के लिए मिले थे ₹150 करोड़, एक पैसा नहीं किया खर्च, रिपोर्ट में खुली पोल
Delhi: दिल्ली के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण (I&FC) विभाग ने 31 अगस्त तक नालों के नवीनीकरण के लिए आवंटित 150 करोड़ रुपये के बजट में से एक भी पैसा खर्च नहीं किया है। यह राशि राजधानी में बाढ़ को काबू करने के लिए दी गई थी। यह जानकारी 13 सरकारी विभागों और अन्य छोटे विभागों की रिपोर्ट में सामने आया है।
ऑडिट में खुली पोल
किन परियोजनाओं में कितने पैसे खर्च किए गए इसकी जांच के लिए यह रिपोर्ट समय-समय पर तैयार की जाती है। इस सप्ताह की शुरुआत में, मुख्य सचिव ने सभी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें उन्होंने बजट खर्च की जांच की और उन्हें परियोजनाओं में तेजी लाने का निर्देश दिए।

मंत्री परवेश वर्मा ने नहीं दिया जवाब
इंडियन एक्सप्रेसन ने I&FC मंत्री परवेश साहिब सिंह ने इस मामले पर प्रतिक्रिया जानने के लिए कॉल और मैसेज किए, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया। इस साल फरवरी में दिल्ली में सरकार बनाने के बाद, भाजपा ने मार्च में 1 लाख करोड़ रुपये के बजट की घोषणा की थी। रिपोर्ट के मुताबिक I&FC विभाग, जो नजफगढ़, ट्रांस-यमुना बेसिन और वज़ीराबाद जैसे तीन बड़े नालों की जिम्मेदारी संभालता है, उसने 2025-26 के लिए आवंटित कुल 313 करोड़ रुपये के बजट का केवल 14% ही खर्च किया है।
दिल्ली में भर गए हैं नाले
पिछले कुछ दिनों में, यमुना नदी का जलस्तर 207 मीटर के निशान को पार कर गया है, जिससे घरों में पानी भर गया है, ट्रैफिक की समस्या बढ़ गई है। नदी के पास रहने वाले लोग बुरी तरह परेशान हैं। I&FC विभाग बड़े पैमाने पर पानी भरने के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।
कहां-कितना खर्च किया?
सरकार के खर्चों की क्वार्टरली रिपोर्ट में सामने आया कि 13 प्रमुख विभागों और अन्य छोटे विभागों ने कुल 28,115 करोड़ रुपये के आवंटित बजट में से केवल 5,902 करोड़ रुपये, यानी लगभग 21% ही खर्च किए हैं। जो बताता है कि सरकार में काम की रफ्तार कितनी है। इन 13 प्रमुख विभागों में PWD, शहरी विकास, परिवहन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और I&FC शामिल हैं। शहरी विकास (UD) विभाग, जो पूंजीगत परियोजनाओं और योजनाओं के बनने और चलाए जाने के लिए के लिए MCD और DJB (दिल्ली जल बोर्ड) को खर्च देता है, उसने साल 2025-26 के लिए आवंटित 5,039 करोड़ रुपये का 55% खर्च किया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय में भी ढिलाई
आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि स्वास्थ्य क्षेत्र, जो भाजपा सरकार के सबसे बड़े फोकस एरिया में से एक है, उसने 2025 के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग को आवंटित 753 करोड़ रुपये के बजट का केवल 2% ही खर्च किया है।
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