केंद्र के फैसले के खिलाफ एकजुट हुए ट्रेड यूनियन, जानिए आखिर आज 'भारत बंद' क्यों है?

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की अपील के बावजूद ट्रेड यूनियन ने शुक्रवार को भारत बंद का ऐलान किया। इसका सीधा असर बैंकिंग सेवाओं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर भी देखा जा रहा है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर भारत बंद क्यों है?

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दरअसल, केंद्र सरकार की ओर से लेबर कानून और न्यूनतम मजदूरी में किए गए बदलाव के विरोध में ट्रेड यूनियन देशव्यापी हड़ताल पर हैं। कुछ दिन पहले ही सरकार ने अप्रशिक्षित कामगारों की न्यूनतम मजदूरी 246 रुपये से बढ़ाकर 350 रुपये करने की घोषणा की थी।

सरकार के दावे को किया खारिज
सरकार ने दावा किया कि न्यूनतम मजदूरी एडवाइजरी बोर्ड की सिफारिशों और ट्रेड यूनियनों से मीटिंग के बाद यह घोषणा की गई। लेकिन ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि सरकार ने प्रस्ताव को लेकर मीटिंग में किसी तरह की चर्चा नहीं की। बोर्ड के सदस्य कश्मीर सिंह ठाकुर ने बताया कि ट्रेड यूनियनों की मांग है कि कामगारों को रोजाना न्यूनतम 692 रुपये (18000 रुपये महीना) मजदूरी मिले। यही हड़ताल की मुख्य वजह है।

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित

सरकार ने न्यूनतम मजदूरी को लेकर जो घोषणा की उसे लेकर किसी तरह की विस्तृत जानकारी नहीं उपलब्ध कराई कि आखिर किस आधार पर रोजाना की न्यूनतम मजदूरी 350 रुपये तय कर दी गई। जबकि ट्रेड यूनियन कह रहे हैं कि उनका प्रस्ताव इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस के द्वारा स्वीकार किया गया स्टैंडर्ड मेथड है। यह सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित है।

ये है मांग का आधार
सातवें वेतन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में अप्रशिक्षित कर्मचारियों को न्यूनतम 18000 रुपये मासिक वेतन देने की सिफारिश की है। ट्रेड यूनियन भी अप्रशिक्षित कामगारों के लिए यही मांग कर रहे हैं। क्योंकि सरकार की ओर से तय की गई न्यूनतम मजदूरी इसकी आधी है। यही महाहड़ताल की सबसे बड़ी वजह है।

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