Rahul Gandhi: मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर बवाल! राहुल गांधी ने संसद में की चर्चा की मांग
Rahul Gandhi: देशभर में मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोमवार को कहा कि कई राज्यों में मतदाता सूची को लेकर संदेह जताया जा रहा है, जिससे लोकतंत्र की निष्पक्षता पर खतरा मंडरा रहा है।
उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि "हर राज्य में मतदाता सूची पर सवाल उठ रहे हैं। महाराष्ट्र में 'ब्लैक एंड व्हाइट' मतदाता सूची को लेकर गंभीर चिंताएं जाहिर की गई थीं। विपक्ष सिर्फ इस पर चर्चा चाहता है ताकि सच्चाई सामने आ सके।"

राहुल गांधी ने संसद से बाहर निकलते समय जब पत्रकारों से बात की तो उनसे पूछा गया कि क्या इस मुद्दे पर चर्चा होगी? इस पर उन्होंने जवाब दिया, "मुझे नहीं लगता।"
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प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी उठाया मुद्दा
कांग्रेस नेता और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस मामले पर एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा, "हर चुनाव में मतदाता सूची में धोखाधड़ी की खबरें लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा हैं। संसद में पूरा विपक्ष इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा चाहता है। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए यह चर्चा जरूरी है। सरकार को इसे रोकने के बजाय इस पर चर्चा की अनुमति देनी चाहिए।"
TMC और AAP ने भी उठाई आवाज
TMC सांसद सौगत रॉय ने भी हरियाणा और पश्चिम बंगाल में समान मतदाता पहचान पत्र (EPIC) नंबर के मामलों को उजागर करते हुए इसे "गंभीर त्रुटि" बताया। उन्होंने कहा कि इससे पश्चिम बंगाल और असम में होने वाले आगामी चुनाव प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग (EC) से मतदाता सूची की गहन समीक्षा करने की मांग की।
आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर मतदाता सूची में धांधली करने और फर्जी मतदाता बनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग और केंद्र सरकार, जो सत्ता में है, सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर फर्जी मतदाता बना रही है। उन्होंने यह महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में किया और अब बंगाल में भी शुरू कर दिया है। अगर चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही तो केवल एक ही पार्टी सत्ता में बनी रहेगी और भ्रष्टाचार बढ़ेगा।"
TMC ने की चुनाव आयोग से मुलाकात
6 मार्च को टीएमसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने कोलकाता में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की और मतदाता सूची का भौतिक सत्यापन करने की मांग की ताकि प्रत्येक मतदाता की एक अनूठी पहचान हो।
पश्चिम बंगाल के मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा कि बाहरी लोगों को राज्य में मतदान का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। हकीम ने एएनआई से बात करते हुए कहा, "हर मतदाता का एक विशिष्ट पहचान पत्र नंबर होना चाहिए। इसका भौतिक सत्यापन होना चाहिए और बाहरी लोगों को यहां मतदान का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।"
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी राज्य में मतदाता सूची की अनियमितताओं की जांच के लिए एक समिति बनाई और बीजेपी पर फर्जी मतदाता जोड़कर चुनावी धांधली करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग के कार्यालय में बैठकर उन्होंने ऑनलाइन फर्जी मतदाता सूची बनाई है और पश्चिम बंगाल के हर जिले में फर्जी मतदाता जोड़े गए हैं। इसी चाल के जरिये उन्होंने दिल्ली और महाराष्ट्र में चुनाव जीते। विपक्ष महाराष्ट्र में इस सच्चाई को नहीं जान सका। अधिकांश फर्जी मतदाता हरियाणा और गुजरात से हैं। बीजेपी चुनाव आयोग की मदद से मतदाता सूची में हेरफेर कर रही है।"
चुनाव आयोग ने दी सफाई
इस मामले में चुनाव आयोग ने 2 मार्च को एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि समान EPIC नंबर होने का मतलब फर्जी या डुप्लिकेट मतदाता नहीं है।
चुनाव आयोग ने कहा, "EPIC नंबर चाहे जो भी हो, कोई भी मतदाता केवल अपने निर्धारित मतदान केंद्र पर ही वोट डाल सकता है, जहां वह मतदाता सूची में पंजीकृत है।"
आयोग ने यह भी बताया कि EPIC नंबरों के समान होने की स्थिति पहले की मैन्युअल प्रक्रिया के कारण उत्पन्न हुई थी। आयोग ने कहा, "पहले, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूची को अलग-अलग तरीके से प्रबंधित किया जाता था। बाद में इसे ERONET प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित किया गया, लेकिन कुछ राज्यों में समान EPIC अल्फ़ान्यूमेरिक सीरीज का उपयोग किया गया, जिससे यह समस्या उत्पन्न हुई।"
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