Prashant Kishore: 'तमिलनाडु में धोनी से ज्यादा लोकप्रिय हो जाऊंगा', प्रशांत किशोर ने ऐसा क्यों कहा?
Prashant Kishore: बिहार में सियासी जमीन तलाशने में जुटे चुनावी रणनीतिकार और जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर तमिलनाडु में एक्टर से राजनेता बने विजय के साथ मंच पर नजर आए हैं। दोनों एक दूसरे के कंधे पर हाथ रख कर मंच पर दिखाई दिए।
इस खबर के बाद एक बार फिर से चर्चा तेज हो गई है क्या प्रशांत किशोर एक बार फिर से अपने पुराने काम पर लौट गए हैं। वहीं प्रशांत किशोर ने वहां पर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी को लेकर एक ऐसी बात कह दी जिसकी चर्चा जोरो पर हो रही है।

एक्टर विजय के साथ रैली में हुए शामिल
दरअसल, एक्टर से नेता बने तमिलगा वेत्री कझगम(TVF) के चीफ विजय की पार्टी के एक साल पूरे हो गए हैं।इसी को लेकर महाबलीपुरम में एक भव्य जनसभा का आयोजन किया गया।
बता दें कि 2026 में तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होना है। चुनाव को देखते हुए विजय ने आज शक्तिप्रदर्शन किया था। जिसमें जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर भी नजर आए।
इस वजह से फिर से रणनीतिकार बने प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर ने लोगों को संबोधित करते हुए बताया कि उन्होंने 2021 में तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में काम करने के बाद राजनीतिक रणनीतिकार से संन्यास लेने की घोषणा की थी। लेकिन चार साल के ब्रेक के बाद मैंने विजय की मदद के लिए अपना प्रण तोड़ दिया है।
'क्योंकि, विजय मेरे लिए एक राजनीतिक नेता नहीं हैं। वह तमिलनाडु के लिए नई उम्मीद हैं। TVK सिर्फ एक राजनीतिक पार्टी नहीं है। यह बदलाव का एक आंदोलन है।'
अपनी तुलना MS DHONI से की
वहीं प्रशांत किशोर ने मजाकिया अंदाज में अपनी तुलना भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एमएस धोनी से की। उन्होंने कहा कि, 'आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) से खेलने की वजह से धोनी तमिलनाडु में अत्यधिक लोकप्रिय हैं।'
'धोनी तमिलनाडु में मुझसे ज्यादा लोकप्रिय हैं।लेकिन अगर मैं TVK को अगले साल जीत दिलाने में मदद करता हूं, तो मैं धोनी से अधिक लोकप्रिय हो जाऊंगा।'
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तमिलनाडु के विकास मॉडल 'गुजरात मॉडल' से बेहतर
PK ने तमिलनाडु के विकास मॉडल की प्रशंसा की और इसे 'गुजरात मॉडल' से बेहतर बताया। उन्होंने तर्क दिया कि, 'विकास के मापदंडों में तमिलनाडु की प्रगति उल्लेखनीय रही है।'
'लेकिन भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता और वंशवादी राजनीति को यहां से हटाने की जरूरत है। वंशवाद पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि, कल्पना करें कि अगर कपिल देव और सुनील गावस्कर जैसे दिग्गज क्रिकेटरों के बेटे ही क्रिकेट खेलते। क्या हम सचिन तेंदुलकर, एमएस धोनी या विराट कोहली को देख पाते?'












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