Rahul Gandhi On China: उस किताब में क्या लिखा है? राहुल गांधी ने की चर्चा तो भड़क गए राजनाथ सिंह-अमित शाह
Rahul Gandhi Gen MM Naravane Book Controversy: लोकसभा के बजट सत्र में 2 फरवरी 2026 को उस वक्त जबरदस्त हंगामा हो गया, जब राहुल गांधी ने डोकलाम और चीन विवाद पर पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब का जिक्र किया। राहुल गांधी जैसे ही किताब के हवाले से सरकार को घेरने लगे, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने मोर्चा संभाल लिया।
सत्ता पक्ष का कहना था कि जिस किताब को अभी तक प्रकाशन की मंजूरी ही नहीं मिली, उसके आधार पर सदन को गुमराह नहीं किया जा सकता। रक्षा मंत्री के तीखे विरोध और राहुल के दावों के बीच संसद में जबरदस्त बहस छिड़ गई।

Rahul Gandhi vs Rajnath Singh: जनरल नरवणे की किताब और राहुल का दावा
राहुल गांधी सदन में पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की उन यादों का जिक्र करना चाहते थे, जिनमें डोकलाम और 2020 की चीनी झड़पों के अनसुने किस्से दर्ज हैं। राहुल ने आरोप लगाया कि किताब में सेना के फैसलों और चीन की घुसपैठ को लेकर ऐसी बातें हैं जो सरकार की छवि बिगाड़ सकती हैं। हालांकि, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तुरंत टोकते हुए कहा कि राहुल जिस किताब का संदर्भ दे रहे हैं, वह अभी छपी ही नहीं है और बिना प्रकाशित तथ्यों के सदन में चर्चा करना नियमों के खिलाफ है।
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Lok Sabha Budget Session 2026: राजनाथ और अमित शाह की तीखी आपत्ति
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह राहुल गांधी के बयान पर गुस्से में नजर आए। उन्होंने साफ कहा कि सदन में गैर-जरूरी और असत्य बातें न की जाएं। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल को चुनौती देते हुए पूछा कि क्या वे साबित कर सकते हैं कि यह किताब मार्केट में आ चुकी है? शाह का तर्क था कि एक ऐसी पांडुलिपि (Manuscript) जो अभी सरकारी समीक्षा के दायरे में है, उसे आधिकारिक दस्तावेज मानकर सरकार पर हमला करना पूरी तरह से गलत और संसदीय मर्यादा के विरुद्ध है।
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Gen MM Naravane Book: आखिर किताब में ऐसा क्या है?
चीन की घुसपैठ और राजनाथ की कॉल: किताब (लीक अंशों के अनुसार) में जिक्र है कि 31 अगस्त 2020 की रात जब चीनी टैंक और सैनिक रेचिन ला की ओर बढ़ रहे थे, तब माहौल बेहद तनावपूर्ण था। राजनाथ सिंह ने फोन पर नरवणे से कहा था कि "जो आपको सही लगे, वो करें" (परमाणु और युद्ध जैसी स्थिति के बीच)। राहुल इसी का हवाला देकर चीन के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे थे।
अग्निवीर पर 'झटका': नरवणे ने लिखा है कि उन्होंने केवल सेना के लिए 'टूर ऑफ ड्यूटी' का सुझाव दिया था, लेकिन सरकार ने इसे तीनों सेनाओं के लिए 'अग्निवीर' बनाकर अचानक लागू कर दिया। उन्होंने इसे सेना के लिए "आसमान से गिरी बिजली" (Bolt from the blue) बताया है।
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सेना के नियमों और प्रकाशन का पेंच
सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के लिए अपनी यादें लिखना आसान नहीं होता। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, भले ही सेना पर सिविल सेवा के पेंशन नियम सीधे लागू न हों, लेकिन देश की सुरक्षा और खुफिया जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना हर अधिकारी की जिम्मेदारी होती है। जनरल नरवणे की किताब को पेंगुइन रैंडम हाउस प्रकाशित करने वाला है, लेकिन संवेदनशील जानकारी होने के कारण सरकार इसकी गहन समीक्षा कर रही है। जब तक हरी झंडी नहीं मिलती, यह किताब कानूनी तौर पर 'अप्रकाशित' ही रहेगी।












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