Deep Sea Gas Pipeline: ओमान से गुजरात तक बिछेगी गैस पाइपलाइन, किस जुगाड़ में लगा भारत, मुंह ताकेगा पाक
Deep Sea Gas Pipeline: इजरायल-अमेरिका बनाम ईरान की लड़ाई में एशिया के लगभग सभी देश ऐसे पिसे हैं कि गैस और तेल की किल्लत सभी को हुई, बस फर्क इतना रहा कि किसी को ज्यादा और किसी को कम रही। भारत में भी इसका असर देखने को मिला। लेकिन भारत ने इससे सबक सीखते हुए एक कदम ऐसा उठाने जा रहा है जिससे भविष्य बेहतर और स्थिर हो सकेगा।
भारत अब खाड़ी देशों से बिना रुकावट गैस सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए एक सीधी डीप-सी पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है। यह पाइपलाइन ओमान से सीधे भारत तक गैस लाएगी, ताकि भविष्य में किसी युद्ध, समुद्री संकट या सप्लाई रुकने जैसी स्थिति में भारत को भारी नुकसान न उठाना पड़े। साथ ही साथ ये गैस पाइपलाइन पड़ोसी पाकिस्तान के लिए भी बड़ा झटका होगी।

कितना खर्चा आएगा अंडर-सी पाइपलाइन प्रोजेक्ट में?
पेट्रोलियम मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, ओमान से भारत तक प्रस्तावित इस पाइपलाइन प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब ₹40,000 करोड़ यानी लगभग 4.7 से 4.8 बिलियन डॉलर हो सकती है। अगर परियोजना को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो इसके निर्माण में लगभग पांच से सात साल लग सकते हैं। सरकार ने इस प्रोजेक्ट की डिटेल्ड प्रैक्टिकल रिपोर्ट यानी DPR तैयार करने के लिए GAIL, Engineers India और Indian Oil Corporation जैसी सरकारी कंपनियों को निर्देश दे दिए हैं।
कितनी लंबी होगी पाइपलाइन?
प्रस्तावित Middle East-India Deepwater Pipeline यानी MEIDP अरब सागर में लगभग 2,000 किलोमीटर तक फैलेगी। यह पाइपलाइन ओमान को सीधे गुजरात तट से जोड़ेगी और प्रतिदिन करीब 31 mmscmd प्राकृतिक गैस भारत तक पहुंचाएगी। इसका रूट इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह जियो-पॉलिटकल रूप से संवेदनशील इलाकों से बच सके। पाइपलाइन अरब सागर से होकर ओमान और UAE के रास्ते भारत तक पहुंचेगी।
क्या होगा फायदा?
यह पूरा प्रोजेक्ट इस बात को दिखाता है कि भारत अब सिर्फ LNG यानी Liquefied Natural Gas के स्पॉट मार्केट पर निर्भर नहीं रहना चाहता। इंटरनेशनल गैस मार्केट में कीमतों का तेजी से बदलना और सप्लाई रुकने का खतरा भारत के लिए बड़ी समस्या बन चुका है, इसीलिए भारत को अब LNG स्पॉट मार्केट की निर्भरता से आगे बढ़ना होगा। ऐसे में पश्चिम एशिया से आने वाली समर्पित पाइपलाइन भारत को बिना किसी ट्रांजिट देश या समुद्री रुकावट के लगातार और सस्ती गैस उपलब्ध करा सकती है।
कहां अटकी है गरारी?
सरकार फिलहाल South Asia Gas Enterprise यानी SAGE द्वारा तैयार शुरुआती एनालिसिस पर काम कर रही है। अगर ये रिपोर्ट पॉजिटिव रहती है, तो भारत और ओमान के बीच गैस सप्लाई, फंडिंग और प्रोजेक्ट निर्माण को लेकर औपचारिक सरकारी बातचीत शुरू हो सकती है।
भारत में तेजी से बढ़ रही है गैस की मांग
भारत में ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों के कारण नैचुरल गैस की मांग लगातार बढ़ रही है। इस समय देश की गैस खपत करीब 190-195 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन यानी MMSCMD है। अनुमान है कि 2030 तक यह बढ़कर 290-300 MMSCMD तक पहुंच सकती है। एक्सपर्ट का अनुमान है कि इस दशक के अंत तक भारत का LNG आयात अकेले 180-200 MMSCMD तक पहुंच सकता है।
कई देशों की गैस तक मिल सकती है पहुंच
इस पाइपलाइन के जरिए भारत को सिर्फ ओमान ही नहीं, बल्कि United Arab Emirates, Saudi Arabia, Iran, Turkmenistan और Qatar जैसे बड़े गैस उत्पादक देशों तक भी पहुंच मिल सकती है।बताया जा रहा है कि पाइपलाइन करीब 3,450 मीटर की गहराई तक बिछाई जा सकती है, जिससे यह दुनिया की सबसे गहरी समुद्री पाइपलाइनों में शामिल हो सकती है।
प्रोटोटाइप रहा सफल
हाल के टेक्निकल एनालिसिस में इस प्रोजेक्ट को संभव बताया गया है। गहरे समुद्र में पाइप बिछाने और उसकी मरम्मत से जुड़ी टेक्नोलॉजी में हुई प्रोग्रेस के कारण अब यह परियोजना पहले की तुलना में ज्यादा व्यावहारिक मानी जा रही है। SAGE की रिपोर्ट के मुताबिक, समुद्र तल की स्थिति समझने के लिए लगभग ₹25 करोड़ की लागत से 3,000 मीटर लंबी परीक्षण पाइपलाइन भी पहले ही बिछाई जा चुकी है, जिसे प्रोटोटाइप कह सकते हैं। जिसने उम्मीद भी जगाई है।
चीन पहले ही बना चुका है मजबूत नेटवर्क
यह पूरा मामला भारत और चीन के बीच ऊर्जा सुरक्षा की तैयारी में अंतर भी दिखाता है। China पिछले दो दशकों से पाइपलाइन और गैस स्टोरेज नेटवर्क बनाने पर काम कर रहा है। चीन की Power of Siberia पाइपलाइन 2019 में शुरू हुई थी, जो हर साल 38 BCM गैस सप्लाई करती है।
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