Defence Budget 2026: दूसरे देशों की तुलना में कितना कम है भारत का रक्षा बजट? बढ़ाने की जरूरत क्यों?
Defence Budget 2026: साल 2026 का बजट आने से पहले भारत के डिफेंस बजट को लेकर एक बार फिर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। चीन की लगातार बढ़ती सैन्य ताकत और पूर्वी एशिया में तेजी से बदलते हालात देशों की रणनीतियों को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर रहे हैं। ऐसे में भारत का डिफेंस बजट सिर्फ एक सरकारी आंकड़ा नहीं रह जाता, बल्कि इसका असर पूरे एशियाई क्षेत्र में सैन्य संतुलन और रणनीतिक शक्ति पर भी पड़ता है।
चार साल में कितना बढ़ा भारत का सैन्य खर्च?
अगर आंकड़ों की बात करें तो भारत का सैन्य खर्च 2020 में करीब 77.4 अरब डॉलर (₹6.42 लाख करोड़) था, जो 2024 तक बढ़कर 83.6 अरब डॉलर (₹6.94 लाख करोड़) हो गया है। यह करीब 8 प्रतिशत की वास्तविक बढ़ोतरी है। हालांकि, यह बढ़ोतरी 2016 से 2020 के बीच हुई 19 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले काफी धीमी मानी जा रही है। यानी भारत डिफेंस पर ज्यादा खर्च तो कर रहा है, लेकिन पहले जैसी तेज रफ्तार अब नहीं दिख रही।

GDP के मुकाबले डिफेंस बजट लगातार घटा
पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से भारत में जीडीपी के मुकाबले डिफेंस बजट का हिस्सा लगातार कम होता जा रहा है। साल 2009-10 में भारत अपनी जीडीपी का करीब 2.8 प्रतिशत रक्षा पर खर्च करता था। लेकिन 2024-25 तक यह घटकर सिर्फ 1.9 प्रतिशत रह गया है। यह पिछले 16 सालों का सबसे निचला स्तर है। इसका मतलब यह है कि भले ही कुल डिफेंस बजट बढ़ा हो, लेकिन तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के सामने यह हिस्सा छोटा होता जा रहा है।
चीन पानी की तरह बहाता है बजट पर पैसा
एशिया में डिफेंस बजट को लेकर साफ असमानता देखने को मिलती है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ देश अपने रक्षा बजट में तेज़ी से इजाफा कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण चीन है, जो एशिया का सबसे बड़ा सैन्य बजट रखने वाला देश है। चीन का डिफेंस बजट 2020 से 2024 के बीच 22 प्रतिशत बढ़ा और 260 अरब डॉलर से बढ़कर 318 अरब डॉलर (₹26.39 लाख करोड़) तक पहुंच गया।
भारत और चीन के बीच बड़ा खर्च का अंतर
चीन की तुलना में भारत के डिफेंस बजट में ऐसी तेज़ी देखने को नहीं मिलती। मौजूदा समय में चीन भारत से करीब चार गुना ज्यादा रक्षा व्यय करता है। इतना ही नहीं, भारत के आसपास के कई पड़ोसी देशों में भी डिफेंस बजट को लेकर वैसी आक्रामक बढ़ोतरी नहीं दिखती, जैसी चीन में नजर आ रही है।
पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका में घटा रक्षा बजट
भारत के पड़ोसी देशों की बात करें तो पाकिस्तान का डिफेंस बजट 2020 तक तो बढ़ा, लेकिन इसके बाद आर्थिक दबावों की वजह से 2020 से 2024 के बीच इसमें करीब 19 प्रतिशत की गिरावट आ गई। वहीं बांग्लादेश और श्रीलंका ने भी हाल के सालों में अपना डिफेंस बजट कम किया है। खासतौर पर श्रीलंका, जहां लंबे वित्तीय संकट के कारण रक्षा बजट लगभग एक चौथाई तक घट गया। ये आंकड़े दक्षिण एशिया में हथियारों की होड़ की तस्वीर को थोड़ा मुश्किल बना देते हैं।
पूर्वी एशिया में दिख रही है तेज़ सैन्य तैयारी
पूर्वी एशिया में हालात बिल्कुल अलग नजर आते हैं। यहां कई देश तेजी से अपने सैन्य खर्च में बढ़ोतरी कर रहे हैं। जापान ने 2020 से 2024 के बीच अपने रक्षा बजट में 40 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी की है, जिससे उसका सैन्य खर्च अब करीब 58 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसी तरह ताइवान ने भी इस दौरान अपने डिफेंस बजट में 37 प्रतिशत का इजाफा किया है।
चीन के दबाव के जवाब में बढ़ रहा डिफेंस बजट
जापान और ताइवान द्वारा रक्षा बजट बढ़ाने की मुख्य वजह चीन का बढ़ता सैन्य दबाव माना जा रहा है। दोनों देश इसे अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम के तौर पर देख रहे हैं। इससे साफ है कि पूर्वी एशिया में सैन्य संतुलन तेजी से बदल रहा है और इसका असर पूरे क्षेत्र की रणनीतिक राजनीति पर पड़ रहा है।
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