Parliament Cost: संसद अगर न चले तो नुकसान किसका? हर दिन का खर्च जानकर चौंक जाएंगे!
Parliament Cost per day India: संसद का मानसून सत्र लगातार हंगामेदार बना हुआ है लेकिन बात केवल हंगामे और नारेबाजी की नहीं है-संसद में हर मिनट की गूंज देश के खजाने पर भारी पड़ती है। मानसून सत्र भले ही विवादों से भरा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी एक चौंकाने वाली सच्चाई ये है कि भारतीय संसद का हर एक मिनट देश को करीब ₹2.5 लाख का खर्च देता है। जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के एक-एक मिनट के खर्च को 1.25 लाख रुपये है। इस आंकड़े को सबसे पहले 2012 में तत्कालीन संसदीय कार्य मंत्री पवन बंसल ने सार्वजनिक किया था। हालांकि उसके बाद पूर्व लोकसभा महासचिव पी.डी.टी. आचार्य ने भी इसकी पुष्टि की थी।
लोकसभा और राज्यसभा में एक-एक मिनट की कार्यवाही का औसत खर्च ₹1.25 लाख है-जो आज की महंगाई और संसाधनों को देखते हुए और भी ज्यादा हो सकता है। लेकिन फिलहाल इसी अनुमान के आधार पर गणना की जाती है। संसद का संचालन में इमारतों का रखरखाव, बिजली-पानी, सुरक्षा, सांसदों का वेतन-भत्ता, भोजन, स्टाफ आदि सभी खर्च शामिल होते हैं। तो आइए जानें अब तक कितना नुकसान?

संसद को प्रतिदिन चलना चाहिए 6 घंटे, जानिए अब तक कितना हुआ नुकसान
हर सत्र में दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) को दिन में कुल 6 घंटे (लंच ब्रेक को छोड़कर) कार्य करना चाहिए। मानसून सत्र इस बार 21 जुलाई को शुरू हुआ था। अब तक मानसून सत्र के 8 दिन बीत चुके हैं लेकिन संसद 6 दिन ही चली है क्योंकि बीच में शनिवार (26 जुलाई) और रविवार (27 जुलाई) (खबर लिखे जाने तक) था। जिसका मतलब है कि हर सदन को अब तक 36 घंटे कार्य करना चाहिए था। लेकिन क्योंकि हमारे पास डेटा अभी तक सिर्फ 5 दिनों यानी 25 जुलाई तक का है। 5 दिन के हिसाब से हर सदन 30 घंटे चलना चाहिए।...इसलिए नीचे दिया कैलकुलेशन उसी के मुताबिक है।
🔹 राज्यसभा अब तक सिर्फ 6.8 घंटे (408 मिनट) ही चली है। यानी 1,392 मिनट बर्बाद हुए। (25 जुलाई तक का डेटा)
🔹 लोकसभा सिर्फ 1.8 घंटे (108 मिनट) चली है। यानी 1,692 मिनट बर्बाद हुए। (25 जुलाई तक का डेटा)
🔹 राज्यसभा में नुकसान: ₹1.25 लाख × 1,392 मिनट = 17 करोड़ 40 लाख रुपये
🔹 लोकसभा में नुकसान: ₹1.25 लाख × 1,692 मिनट = 21 करोड़ 15 लाख रुपये
▶️ कुल नुकसान: ₹38 करोड़ 55 लाख रुपये (5 दिन में यानी 25 जुलाई)
लगभग 38 करोड़ रुपये (अनुमानित) का नुकसान सिर्फ हंगामे और असहमति की भेंट चढ़ गया है। संसद के हर मिनट की कीमत होती है, लेकिन अगर राजनीतिक दल आम सहमति से मुद्दों पर चर्चा न करें, तो इसका खामियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ता है। 2021 में संसद की कार्यवाही बाधित होने से देश को अनुमानत ₹133 करोड़ का नुकसान हुआ था।
विशेषज्ञों की चेतावनी
राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संसद की कार्यक्षमता को लेकर चिंता जताई थी। PRS के संसदीय विशेषज्ञ चक्षु रॉय के मुताबिक, संसद की गिरती उत्पादकता सिर्फ पैसों की बर्बादी नहीं है, यह लोकतंत्र के लिए भी एक गंभीर खतरा है।
उनका कहना है कि जब संसद नहीं चलती, तो मंत्री जवाबदेह नहीं बनते, नीतियों पर बहस नहीं होती और जरूरी विधेयक बिना चर्चा के पास हो जाते हैं या अटक जाते हैं। इससे आम जनता के मुद्दे संसद में नहीं पहुंच पाते और सरकार की जांच-पड़ताल नहीं हो पाती।
उन्होंने कहा, "संसद में गतिरोध से लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का विश्वास भी डगमगाने लगता है, जो कि लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा नुकसान है।"












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