Pahalgam Terror Attack: जब ‘कलमा' ने बचाई असहाय परिवार की जान, असम के इस प्रोफेसर की आपबीती सुन दिल दहल जाएगा

Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम में मंगलवार, 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने जिस तरह दर्दनाक तरीके से पर्यटकों को अपना निशाना बनाया उससे हर किसी का खून खौल रहा है। इस हमले में अब तक 28 से अधिक पर्यटकों के मारे जाने और 20 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है।

इसकी जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के द रेजिस्टेंस फ्रंट 'TRF' ने ली है। हमले के बाद चारो तरफ अफरातफरी मच गई और लोग इधर-उधर भागने लगे थे। इसमें आतंकियों ने महिलाओं और बच्चों को छोड़ दिया और पुरुषों को परिवार के सामने ही निर्मम तरिके से गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया। मरने वालों और घायलों में देश के कई राज्यों के लोग शामिल हैं।

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Pahalgam Terror Attack: दो घंटे पैदल चल कर बचाई जान

असम विश्वविद्यालय के बंगाली विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर देबाशीष भट्टाचार्य उन भाग्यशाली लोगों में शामिल हैं, जो जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बैसरन के पास हुए भयावह आतंकी हमले में किसी तरह बच निकले। खबर लिखे जाने तक श्रीनगर में ठहरे भट्टाचार्य ने न्यूज18 से बातचीत में उस दिल दहला देने वाली घटना की कहानी साझा की।

उन्होंने बताया, "हम परिवार के साथ एक पेड़ के नीचे सो रहे थे, मेरे बगल में भी एक व्यक्ति सो रहा था तभी मुझे अचानक से फुसफुसाहटें सुनाई दीं। ऐसा लग रहा था जैसे कोई 'कलमा' पढ़ रहा हो। मैंने भी सहज रूप से वो पढ़ना शुरू कर दिया। तभी एक आतंकवादी आया और मेरे बगल में लेटे व्यक्ति को गोली मार दी।"

भट्टाचार्य ने कहा कि आतंकी ने फिर उनकी ओर देखा और पूछा, "क्या कर रहे हो?" जवाब में उन्होंने और अधिक जोर से कलमा पढ़ा। देबाशीष कहते हैं कि "मुझे आज भी नहीं पता कि मैंने ऐसा क्यों किया, लेकिन शायद किस्मत ने साथ दिया और वह मुझे छोड़कर चला गया जिससे मैं किसी तरह से बच गया।"

इसके बाद उन्होंने मौका देखते ही अपनी पत्नी और बेटे को लेकर चुपचाप वहां से भागने का फैसला किया। प्रोफेसर भट्टाचार्य कहते हैं हम पहाड़ी पर चढ़े, एक बाड़ पार की और करीब दो घंटे तक चलते रहे। रास्ते में घोड़ों के खुरों के निशान दिख रहे थे जिसे हमने निशान बनाया और उसी के सहारे आगे बढ़ते रहे। अंततः हमें एक घुड़सवार मिला जिसकी मदद से हम होटल तक लौट पाए

Pahalgam Terror Attack: TRF ने फैलाई घाटी में दहशत

बता दें कि इस भयावह हमले में कम से कम 28 लोगों की मौत हुई, जिनमें दो विदेशी नागरिक और दो स्थानीय लोग भी शामिल हैं। मारे गए लोगों में कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के पर्यटक थे। यह हमला मंगलवार की सुबह हुआ जब एक पर्यटक समूह बैसरन घूमने गया था।

आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के छद्म समूह 'रेजिस्टेंस फ्रंट' ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, आतंकियों ने पर्यटकों को पुरुष और महिला समूहों में बांटा और फिर उनके धर्म पूछा उसके बाद उन्हें निशाना बनाया। कुछ को स्नाइपर की तरह दूर से गोली मारी गई, जबकि कई लोग समय पर मदद न मिलने के कारण दम तोड़ बैठे।

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