अथ श्री उत्तराखंड संपूर्ण चुनाव कथा, एक नजर में अब तक की पूरी कहानी
अभी तक आए एग्जिट पोल के अधिकतर नतीजे यह दिखाते हैं कि उत्तराखंड में भाजपा को सबसे अधिक वोट मिले हैं। हालांकि, इसका फैसला 11 मार्च को होगा कि किसकी सरकार बनेगी।
नई दिल्ली। उत्तराखंड में विधानसभा की कुल 70 सीटों पर चुनाव 15 फरवरी को संपन्न हो चुका है। अब 11 मार्च को नतीजे सामने आने वाले हैं, जिसके बाद यह साफ हो जाएगा कि जनता को कमल का फूल पसंद आता है या फिर वह हाथ के साथ जाना पसंद करेंगे। मौजूदा समय में उत्तरांखड में कांग्रेस की गठबंधन वाली सरकार है और मुख्यमंत्री हरीश सिंह रावत हैं, जो 11 मई 2016 को प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे।
पिछले विधानसभा चुनाव से अधिक हुआ मतदान
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017 में कुल 68 फीसदी मतदान हुआ, जो 2012 के विधानसभा चुनाव की तुलना में 3 फीसदी अधिक है। उत्तराखंड में करीब 75 लाख मतदाता हैं। इन मतदाताओं ने विधानसभा चुनाव में कुल 628 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला किया है। 75,13,547 मतदाताओं के लिए पूरे प्रदेश में कुल 10,685 मतदान केंद्र बनाए गए थे।

क्या रहा एग्जिट पोल का नतीजा?
अभी तक आए एग्जिट पोल के अधिकतर नतीजे यह दिखाते हैं कि उत्तराखंड में भाजपा को सबसे अधिक वोट मिले हैं। हालांकि, किस पार्टी की सरकार बनेगी, इसका फैसला 11 मार्च को रिजल्ट आने के बाद ही पता चलेगा।
- समाचार चैनल न्यूज 24 और सर्वे एजेंसी चाणक्य के अनुसार उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने की संभावना है। संभावना है कि भाजपा को 53 सीटें मिलेंगी। चाणक्या के सर्वे के मुताबिक कांग्रेस को उत्तराखंड में 15 सीट मिल सकती है।
- समाचार चैनल आजतक के मुताबिक भी उत्तराखंड में भाजपा को 43 फीसदी वोट शेयर के जरिए 46 से 53 सीटें मिल सकती हैं। वहीं कांग्रेस को 34 फीसदी वोट शेयर के साथ 12-21 सीटें मिल सकती हैं।
- आजतक के सर्वे में संभावना जताई गई है कि 8 फीसदी वोट के साथ बसपा को 1-2 सीटें मिल सकती हैं। साथ ही 15 फीसदी वोट शेयर के साथ 1-4 सीटें अन्य के खाते में भी जा सकती हैं।
- समाचार चैनल इंडिया टीवी और सर्वे एजेंसी सी वोटर्स के अनुसार उत्तराखंड में भाजपा को 29-35 सीटें मिलने की संभावना है। कांग्रेस को भी 29-35 सीट मिलने की संभावना जताई गई है। साथ ही अन्य को 2 से 9 सीटें मिल सकती हैं।
- वहीं अंग्रेजी समाचार चैनल इंडिया टुडे और सर्वे एजेंसी एक्सिस के अनुसार भाजपा को 46-53, कांग्रेस को 12-21, बसपा को 1-2 और अन्य को 1-4 सीटें मिल सकती हैं।
- अंग्रेजी समाचार चैनल NewsX और सर्वे एजेंसी MRC के अनुसार उत्तराखंड में भाजपा को आसानी से 70 में से 38 सीटें मिल सकती हैं। वहीं कांग्रेस के खाते में 30 सीटें जा सकती हैं। वहीं अन्य 2 सीटें जीत सकते हैं।
- समाचार चैनल एबीपी और सर्वे एजेंसी CSDS ने संभावना जताई है कि भाजपा को 34 से 42 , कांग्रेस को 23 से 29 और अन्य के 3 से 9 सीटें मिल सकती हैं।

काफी उठा-पटक वाला रहा ये चुनावी सीजन
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017 में काफी उठा-पटक देखने को मिली। इस चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों में लगे रहने के आरोप में भाजपा ने करीब 50 नेताओं को पार्टी से 6 साल के लिए बाहर भी निकाल दिया था। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस से पार्टी के एनडी तिवारी, हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य और विजय बहुगुणा जैसे दिग्गज नेता भाजपा के खेमे में शामिल हो गए। एनडी तिवारी के साथ उनके बेटे रोहित शेखर भी भाजपा में शामिल हो गए।
इस चुनाव में उस घोड़े शक्तिमान का नाम भी खूब गूंजा, जिसे बीजेपी के विधायक गणेश जोशी ने 14 मार्च 2016 को देहरादून में भाजपा के प्रदर्श के दौरान लाठियां चलाई थीं। आपको बता दें कि शक्तिमान घोड़े का पैर टूट गया था, जिसके बाद उसे सही करने की दुनियाभर की कोशिशें हुईं और प्रोस्थेटिक पैर भी लगाया लगाया गया, लेकिन आखिरकार चोट के इंफेक्शन की वजह से घोड़े की जान चली गई।

बागी नेता ही बन गए संकट का विषय
उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में इस बार बागी नेता ही भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों के लिए संकट का विषय बने रहे। ऐसे कई इलाके हैं जहां भाजपा और कांग्रेस दोनों के ऐसे कई समर्थक थे, जिन्हें अपनी पार्टी से टिकट नहीं मिला तो वो निर्दलीय ही मैदान में उतर गए हैं। उत्तराखंड की 70 से में करीब आधी सीटों पर ऐसे ही हालात हैं।
आपको बता दें कि गंगोत्री विधानसभा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सूरत राम नौटियाल भाजपा के खिलाफ ही लड़ रहे हैं। नरेंद्र नगर में कांग्रेस से बागी और फिलहाल भाजपा उम्मीदवार सुबोध उनियाल अपने पूर्व साथी ओम गोपाल रावत का सामना कर रहे हैं। इसी तरह ज्वालापुर सीट से कांग्रेस के एसपी सिंह अपनी ही पूर्व साथी बृज रानी से सामना कर रहे हैं। वहीं भीमताल में बागी राम सिंह कैरा, कांग्रेस के दान सिंह भंडारी का मुकाबला कर रहे हैं।

किस पार्टी के पास हैं कितनी सीटें?
मौजूदा समय में उत्तराखंड में गठबंधन की सरकार है।
इंडियन नेशनल कांग्रेस (आईएनसी)- 32
भाजपा- 31
बहुजन समाज पार्टी (बसपा)- 3
उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी)- 1
निर्दलीय- 3

2014 के लोकसभा चुनाव का क्या था हाल?
2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने सभी सीटों पर जीत हासिल कर ली थी। आपको बता दें कि उत्तराखंड में लोकसभा की 5 सीटें हैं, जो सभी भाजपा ने जीत ली थीं। कांग्रेस को 2014 के लोकसभा चुनावों में एक भी सीट नहीं मिली थी।
2012 के विधानसभा चुनाव का क्या था हाल?
2012 में हुए विधानसभा चुनाव में काग्रेस की सरकार बनी थी। सरकार के पूरे कार्यकाल में अब तक दो मुख्यमंत्री बन चुके हैं। पहले विजय बहुगुणा (13 मार्च 2012 - 31 जनवरी 2014) प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और फिर हरीश रावत (11 मई 2016- अब तक) प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभाला। इस दौरान विपक्ष में भारतीय जनता पार्टी रही। इसके अलावा इस कार्यकाल में गोविंद सिंह कुंजवाल विधानसभा के स्पीकर हैं। 27 मार्च 2016 से 12 मई 2016 तक उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू था।

क्यों लगाया गया था राष्ट्रपति शासन?
27 मार्च को केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में हरीश रावत की सरकार को बर्खास्त करते हुए राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। इसके बाद काफी समय तक यह मामला नैनीताल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चला। आखिरकार 10 मई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उत्तराखंड विधानसभा में हरीश रावत ने विश्वास मत पेश किया। 11 मई की सुबह परिणाम की घोषणा की गई, जिसमें हरीश रावत के पक्ष में 33 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 28 वोट पड़े।
दरअसल, कांग्रेस के 9 विधायक बगावत करते हुए भाजपा के साथ हो गए थे। इसके बाद भाजपा ने 27 अपनी सीटें और 9 अन्य बागी विधायकों को साथ लेकर 35 सीटें होने पर बहुमत का दावा कर दिया था। इसके बाद 18 मार्च को बागी विधायकों ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। 19 मार्च को राज्यपाल ने हरीश रावत को बहुमत साबित करने के लिए 28 मार्च तक का वक्त दिया, लेकिन इससे पहले ही हरीश रावत का एक स्टिंग ऑपरेशन जारी हुआ, जिसमें वह विधायकों को करोड़ों रुपए देने का ऑफर देने नजर आए, जिसके बाद 27 मार्च को हरीश रावत द्वारा सदन में विश्वास मत हासिल करने से पहले ही उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।
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