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MP News: भोपाल में LPG संकट से होटल-रेस्टोरेंट परेशान, कई जगह इंडक्शन पर बन रहा खाना

MP News Bhopal: देश के दिल यानी मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कमर्शियल LPG सिलेंडरों की कथित कमी अब सीधे होटल-रेस्टोरेंट कारोबार पर भारी पड़ रही है। ईरान-अमेरिका-इसराइल जंग के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित होने से कमर्शियल 19 किलो सिलेंडर की आपूर्ति पिछले कई दिनों से ठप है।

नतीजा? कई रेस्टोरेंट और छोटे होटल मजबूरी में इंडक्शन कुकिंग पर शिफ्ट हो रहे हैं, जबकि कुछ दुकानों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ गया है। घरेलू सिलेंडर के लिए भी शहर की गैस एजेंसियों पर लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं, जहां लोग घंटों इंतजार कर रहे हैं।

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कमर्शियल संकट: होटल-रेस्टोरेंट की हालत खराब

भोपाल में कमर्शियल LPG की सप्लाई 9 मार्च से लगभग जीरो हो गई है। ऑयल कंपनियां (BPCL, IOCL, HPCL) ने स्पष्ट किया है कि उपलब्ध स्टॉक सिर्फ अस्पताल, सेना-पुलिस कैंटीन, रेलवे/एयरपोर्ट और इमरजेंसी सेवाओं के लिए है। होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन, रेहड़ी-पटरी वाले और सराफा कारीगरों को कोई सप्लाई नहीं मिल रही।

भोपाल होटल एसोसिएशन के अनुसार, शहर में 1500-2000 से ज्यादा होटल-रेस्टोरेंट हैं, जहां रोजाना 2000-2500 कमर्शियल सिलेंडर लगते हैं। कई संचालकों के पास सिर्फ 48 घंटे का स्टॉक बचा है। उसके बाद बंदी तय। कुछ जगहों पर लकड़ी-कोयला चूल्हा या डीजल भट्टी का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन यह महंगा और असुविधाजनक है। रमजान और शादी-विवाह सीजन में कैटरिंग और इवेंट्स पर बड़ा असर-कई बुकिंग कैंसिल होने की आशंका।

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बड़ी फूड चेन ने शुरू किया इंडक्शन पर खाना बनाना

संकट के बीच भोपाल की एक प्रमुख फास्ट-फूड चेन ने अपने किचन को इंडक्शन आधारित सिस्टम में बदलना शुरू कर दिया है। यह चेन मध्य प्रदेश में करीब 27 आउटलेट चलाती है, जिनमें से ज्यादातर भोपाल में हैं। चेन के मालिक डोलराज गैरे (Sagar Gaire Fast Food) ने बताया: "हम इंडक्शन कुकिंग से काम चला रहे हैं। पहले से ही 60% काम इंडक्शन पर शिफ्ट हो चुका है, बाकी 10-20% कुछ दिनों में पूरा हो जाएगा। नए इंडक्शन स्टोव और बर्तन लगाने में समय लग रहा है, लेकिन विकल्प नहीं है।" यह सुविधा राज्य के सभी 27 आउटलेट में लागू की जा रही है। हालांकि, इंडक्शन से खाना बनाने में समय ज्यादा लगता है और कुछ डिशेज (जैसे तड़का, फ्राइंग) में चुनौती आ रही है। अन्य रेस्टोरेंट भी इसी राह पर हैं-कुछ ने मेन्यू सीमित कर दिया है, लाइव काउंटर बंद कर दिए हैं, या सिर्फ सिंपल फूड (सैंडविच, सलाद, कोल्ड ड्रिंक्स) पर फोकस किया है।

घरेलू सिलेंडर: दावों के उलट हकीकत में लंबी वेटिंग

अधिकारी दावा करते हैं कि घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर की सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं, लेकिन ग्राउंड पर तस्वीर अलग है। वेटिंग 5-7 दिन की हो गई है।

  • भोपाल के 5 नंबर, टीटी नगर, कोहेफिजा, शिवाजी नगर जैसी जगहों पर एजेंसियों के बाहर भीड़।
  • ऑनलाइन बुकिंग सर्वर क्रैश हो रहे हैं, लोग डायरेक्ट एजेंसी पहुंच रहे।
  • कई लोग पैनिक में स्टॉक जमा कर रहे, जिससे स्थिति और बिगड़ रही।
  • नया नियम: अब बुकिंग 25 दिन बाद ही संभव (पहले 21 दिन)।

आम आदमी और कारोबार पर क्या असर?

घरों में खाना पकाने की मुश्किल-महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित। छोटे ढाबे, चाय वाले, समोसे-कचौड़ी वाले परेशान; कई बंद होने की कगार पर। महंगाई बढ़ रही-ब्लैक मार्केट में कमर्शियल सिलेंडर ₹5000 तक बिक रहा। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स (Zomato, Swiggy) पर ऑर्डर प्रभावित होने की आशंका।

सरकार ने घरेलू को प्राथमिकता दी है और रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन कमर्शियल सेक्टर की राहत दूर दिख रही। होटल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की है, लेकिन अभी कोई ठोस राहत नहीं।
यह संकट सिर्फ गैस का नहीं, बल्कि लाखों लोगों की रोजी-रोटी और रसोई का है। अगर होर्मुज की बंदी लंबी चली तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

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