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विधानसभा चुनावों में कौन रोएगा प्याज के आंसू, कब-कब गई सरकार?

पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए जारी प्रचार अभियान के दौरान प्याज की कीमतें अचानक आसमान छूने लगी हैं। कुछ ही दिनों में प्याज के भाव दो-तीन से चार गुना तक बढ़ गए हैं। लिहाजा हर राज्य में विपक्ष ने इस चुनावी मुद्दे को लपकने में भी देरी नहीं की है।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता रागिनी नायक ने रविवार को ही प्याज का माला पहन कर प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार और केंद्र की मोदी सरकार को निशाने पर ले लिया। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी प्याज की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार को घेर रहे हैं।

onion and election

कांग्रेस ने लपक लिया प्याज का मुद्दा
रागिनी नायक बोलीं, 'प्याज के दाम 80 रुपए किलो तक पहुंच गए हैं। कुछ दिनों पहले टमाटर 200 से 250 रुपए किलो तक हो गए थे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को हमें बताना चाहिए कि प्याज की कीमतें लोगों को क्यों परेशान कर रही हैं।'

एक जमाना था जब प्याज की गिनती गरीबों की सब्जियों में होती थी। कांग्रेस को चुनावों के समय में भाजपा के खिलाफ इससे बड़ा मुद्दा नहीं हो सकता। इसलिए पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी इस मुद्दे पर मैदान में उतर चुके हैं।

उन्होंने कहा, '....हर बार महंगाई के मसले पर मोदी सरकार ने जनता का मखौल ही उड़ाया है.....' उन्होंने सरकार पर तंज कसा 'महंगाई दिखती ही नहीं...प्याज मैं खाती नहीं......बाकी देशों से तो बेहतर है...' । वे बोले, 'आखिर प्याज फिर से क्यों हुआ महंगा....बीजेपी को पांच राज्यों में हराकर लोग बताएंगे इसका राज।'

क्यों बढ़ रहे हैं प्याज के दाम?
जानकारों के मुताबिक मौसम की प्रतिकूल स्थिति के कारण खरीफ प्याज की बुआई में देरी से फसल की कवरेज में कमी रही है और उत्पाद के बाजार तक पहुंचने में देरी हो रही है। इसके चलते स्टॉक में रखे रबी मौसम वाले प्याज की कमी हो रही है, जिससे सप्लाई प्रभावित हो रही है और आखिरकार इसकी थोक और खुदरा दोनों कीमतें बढ़ रही हैं।

एचटी के मुताबिक कुछ एक्सपर्ट का कहना है कि प्याज की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की मुख्य वजह जमाखोरी है, जिसके चलते सप्लाई प्रभावित हो रही है और कीमतें बढ़ रही हैं। मसलन पंजाब में लुधियाना की नई सब्जी मंडी के अध्यक्ष रिशु अरोड़ा ने कहा है, 'इस उछाल के पीछे मुख्य कारण यह है कि लोग बाजार में प्याज की जमाखोरी कर रहे हैं..... जिससे इसकी किल्लत हो रही है और कीमतें बढ़ रही हैं.....'

प्याज पर केंद्र सरकार का ऐक्शन
वैसे केंद्र सरकार ने प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए 31 दिसंबर तक के लिए मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस (MEP) 800 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तय कर दिया है, ताकि इसकी कीमतें नियंत्रित रखी जा सकें।

चुनावी राज्यों में प्याज के भाव
हालांकि, जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं उनमें से राजस्थान में प्याज के खुदरा भाव 34 रुपए, मध्य प्रदेश में 44 रुपए, छत्तीसगढ़ में 42 रुपए, तेलंगाना में 38 रुपए और मिजोरम में 65 रुपए किलो के आसपास चल रहे हैं।

भाजपा को पहले लग चुका है झटका
अक्सर दिवाली के आसपास प्याज की कीमतें बढ़ती हैं। लेकिन, भारतीय जनता पार्टी के लिए यह ज्यादा चिंता की बात है, क्योंकि 1998 में उसे दिल्ली में इसके चलते सत्ता ऐसे हाथ से निकली थी, जो फिर कभी लौट कर नहीं आई। तब प्याज इतना बड़ा चुनावी मुद्दा बना था कि न्यूयार्क टाइम्स जैसे अखबारों ने भी इसे उठाया था।

तब चुनावों से पहले सिर्फ 40 दिनों के लिए पार्टी की दिवंगत नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज मुख्यमंत्री बनी थीं। प्याज की कीमतों को कम करने के लिए उन्होंने तमाम उपाय किए थे, लेकिन भाजपा सत्ता में नहीं लौट पाई। तब प्याज दिल्ली में 40 से 50 रुपए किलो बिक रहे थे। तब अकेले दिल्ली में ही नहीं राजस्थान में भी भैरों सिंह शेखावत की सरकार इसी मुद्दे पर चुनाव हारी थी। तब शेखावत कहते थे- 'प्याजा हमारे पीछे पड़ा था।'

प्याज के मुद्दे पर 1980 में इंदिरा की हुई थी वापसी
अगर हम देश के चुनावी इतिहास को देखें तो प्याज 1980 से ही चुनावी मुद्दा बनता रहा है। प्याज के दाम पर लड़ा गया यह पहला चुनाव था, जिसकी वजह से देश में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार सत्ता से बेदखल हो गई थी और इंदिरा गांधी ने इसी मुद्दे पर सत्ता में वापसी कर ली थी।

2013 में कांग्रेस को हुआ था नुकसान
लेकिन, 2013 में प्याज ही ऐसा मुद्दा बना जो कांग्रेस को झटका दे गया। केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार थी और देश के कुछ हिस्सों में प्याज के दाम बढ़ने लगे थे और कहीं-कहीं 100 रुपए किलो तक पहुंच गए थे।

सरकार को मिस्र और चीन से प्याज आयात के लिए टेंडर जारी करना पड़ गया था। लेकिन, फिर भी दिल्ली और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार सत्ता में वापस नहीं लौट सकी।

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