One Nation One Election कमेटी के चेयरमैन पीपी चौधरी ने बता दिया कब लागू होगा एक देश एक चुनाव

One Nation One Election: एक देश एक चुनाव (One Nation One Election) पर ज्वाइंट कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। संसदीय समिति के चेयरमैन और बीजेपी सांसद पीपी चौधरी ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में इस मुद्दे पर अहम टिप्पणी की है। चौधरी ने बताया कि एक देश एक चुनाव पर आम सहमति बनाने के लिए अलग-अलग स्टेक होल्डर (हितधारकों), संगठनों से बातचीत और चर्चा चल रही है। अगर देश में इस प्रक्रिया को लागू भी किया जाता है, तो मौजूदा बिल के मुताबिक साल 2034 से पहले एक साथ लोकसभा और राज्यों की विधानसभा चुनाव कराना संभव नहीं होगा।

One Nation One Election की प्रक्रिया कब शुरू हो सकती है?

एक देश एक चुनाव के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क दिया जा रहा है कि इससे अलग-अलग चुनाव कराने में होने वाले खर्च को काफी हद तक सीमित किया जा सकता है। साथ ही, चुनाव के लिए इस्तेमाल होने वाली सरकारी मशीनरी का भी बड़ा वक्त अलग-अलग चुनाव कराने में खर्च होता है। हालांकि, देश में एक साथ चुनाव कराने की संभावना पर सांसद और ज्वाइंट कमेटी के चेयरपर्सन पीपी चौधरी ने कहा कि इस पर अंतिम फैसला संसद ही लेगी। मौजूदा बिल को देखते हुए कहा जा सकता है कि 2034 में ही यह संभव होगा।

One Nation One Election Joint Committee chairman P P Chaudhary

यह भी पढ़ें: 'वन नेशन वन हसबैंड', ऑपरेशन सिंदूर को लेकर ये बोलते ही घिरे सीएम भगवंत मान, भाजपा ने की इस्‍तीफे की मांग

One Nation One Election के लिए समिति को मिली हैं कुछ सिफारिश

बता दें कि पिछले साल दिसंबर में वन नेशन वन इलेक्शन बिल को चौधरी के नेतृत्व वाली समिति को सौंप दिया गया था। इस समिति ने अलग-अलग हितधारकों (stakeholders) से राय लेने के लिए चर्चा शुरू कर दी है। चौधरी का मानना है कि समिति अभी सभी पहलुओं पर विचार कर रही है। इसे देखते हुए कुछ अतिरिक्त सुझाव भी दे सकती है। जर्मनी में प्रचलित सार्थक अविश्वास प्रस्ताव (Constructive vote of no-confidence) का भी सुझाव देने पर विचार कर रही है। यह ऐसी व्यवस्था होती है जिसमें अगर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है, तो वैकल्पिक सरकार के पास जरूरी संख्या बल भी होना चाहिए।

वन नेशन वन इलेक्शन के विरोध और पक्ष में तर्क

- वन नेशन वन इलेक्शन के पक्ष में तर्क दिया जाता है कि एक साथ चुनाव होने से अलग-अलग चुनाव कराए जाने पर होने वाले खर्च को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सरकारी मशीनरी का काफी वक्त चुनाव संपन्न कराने में जाता है, इससे भी बचा जा सकता है।

- एक देश एक चुनाव प्रक्रिया के विरोध में तर्क दिया जाता है कि यह भारतीय लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। एक साथ लोकसभा और राज्यसभा चुनाव कराए जाने पर स्थानीय मुद्दे गौण हो जाएंगे। इससे विधानसभा चुनावों के लिए भी राष्ट्रीय मुद्दे हावी रहेंगे। साथ ही, ऐसी संभावना भी है कि लोकसभा चुनाव में जिस पार्टी की सरकार हो उसे विधानसभा चुनाव में फायदा मिल सकता है।

यह भी पढ़ें: Operation Sindoor Van Kutch: गुजरात के कच्छ में बनेगा 'सिंदूर वन' स्मारक पार्क, पाकिस्तान को देगा ये मैसेज

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+