ओडिशा में छात्रों की ड्रॉपआउट दर 50 फीसदी, जानिए बड़े दावे की वजह
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सदन में राज्यों में शिक्षा के स्तर को लेकर डेटा पर बोलते हुए कहा कि ओडिशा के स्कूलों में छात्रों के ड्रॉपआउट दर अधिक है। केंद्र की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा में दसवीं कक्षा के छात्रों के बीच स्कूल छोड़ने की दर लगभग 50 प्रतिशत है, जो कि ओडिशा सरकार की ओर राज्य में शिक्षा के स्तर के सुधरने के दावे से पूरी तरह अलग है।
संसद के सदन में देश के स्कूलों में ड्रॉपआउट दर के बारे में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि 2021-22 शैक्षणिक वर्ष में, ओडिशा में 49.90 प्रतिशत छात्रों ने कक्षा छोड़ दी- एक्स स्तर. रिपोर्ट के मुताबिक, दसवीं कक्षा के स्तर पर ड्रॉपआउट दर हर साल बढ़ रही है। 2018-19 में, ड्रॉपआउट दर 12.8 प्रतिशत थी, जबकि 2019-20 में यह बढ़कर 38.35 प्रतिशत हो गई और 2020-21 में बढ़कर 39.4 प्रतिशत हो गई।

केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक दसवीं कक्षा के छात्रों के बीच स्कूल छोड़ने की दर के मामले में ओडिशा कथित तौर पर देश में शीर्ष पर है। रिपोर्ट ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है, वहीं इस मुद्दे पर राजनीति भी छिड़ गई है। जबकि राज्य सरकार ने दावा है कि 5T पहल के तहत शिक्षा के बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर बदलाव किया गया है।
स्कूलों में ड्रॉपआउट दर को लेकर केंद्र की ओर से दिए गए डेटा को लेकर बीजेपी ने बीजद सरकार को निशाने पर लिया। पार्टी को ओर से की गई एक टिप्पणी में कहा गया कि राज्य में ये हालात पीएम श्री योजना को ना लागू करने की वजह से हुई है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा ने कहा,"ओडिशा में 49.9% छात्रों के दसवीं कक्षा में स्कूल छोड़ने दर देश में सबसे अधिक है। ये चिंता का विषय है।"












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