NRI Couple Digital Arrest:16 दिन का डिजिटल अरेस्ट! कैसे NRI दंपति से उड़ाए ₹14 करोड़, हैरान कर देने वाला मामला
NRI Couple Digital Arrest: दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके में रहने वाले एक बुज़ुर्ग NRI दंपती के साथ डिजिटल अरेस्ट स्कैम का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ठगों ने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर दंपती को घर में कैद रहने और किसी से संपर्क न करने के लिए मजबूर किया और 16 दिनों के भीतर करीब ₹14 करोड़ की ठगी को अंजाम दे दिया।
पीड़ित दंपती को आख़िर तक यह अहसास ही नहीं हुआ कि वे किसी कानूनी जांच का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं।

एक फोन कॉल से शुरू हुआ खेल
इस डरावनी कहानी की शुरुआत 24 दिसंबर (क्रिसमस ईव) को हुई, जब इंदिरा तनेजा को एक फोन कॉल आया। कॉल करने वालों ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी का अधिकारी बताया और कहा कि उनके मोबाइल नंबर से अश्लील मैसेज भेजे जा रहे हैं, और यह नंबर कई गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद ठगों ने धमकी दी कि यदि सहयोग नहीं किया गया तो उनके और उनके पति के खिलाफ गिरफ्तारी की जाएगी।
इतना ही नहीं पीड़ित दंपति को एक व्यक्ति ने कॉल किया, जिसने खुद को 'विक्रांत सिंह राजपूत' नाम का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि इंदिरा के नाम मुंबई की एक कैनरा बैंक शाखा में अकाउंट है, जिसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। जब इंदिरा ने इस बात से इनकार किया तो ठगों ने कहा कि उनका मामला जेट एयरवेज के पूर्व चेयरमैन नरेश गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा हुआ है।
'राष्ट्रीय सुरक्षा' का हवाला देकर बनाई डिजिटल कैद
ठगों ने लगातार यह कहते हुए दबाव बनाया कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। इसके बाद दंपती को 16 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया। इस दौरानसउनके फोन कॉल और मैसेज की निगरानी की गई,उन्हें किसी भी रिश्तेदार, दोस्त या वकील से बात करने की इजाज़त नहीं दी गई,यहां तक कि अमेरिका में रहने वाले बच्चों से बात भी बहुत सीमित और निगरानी में कराई गई।
इंदिरा तनेजा ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में बताया,क्रिसमस से लेकर न्यू ईयर तक मेरे दोस्त, वकील और रिश्तेदार लगातार फोन करते रहे, लेकिन हमें किसी से बात करने की अनुमति नहीं थी। डर और दबाव का आलम यह था कि ठगों ने इंदिरा से सुप्रीम कोर्ट और अन्य एजेंसियों के नाम पत्र भी लिखवाए। एक बार जब उनके ड्राइवर एक्स-रे रिपोर्ट लेकर घर आया तो ठगों ने गुस्से में कहा कि घर में किसी का आना सख्त मना है, वरना गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
कैसे उड़ गए ₹14 करोड़?
पुलिस के मुताबिक, इस पूरे डिजिटल अरेस्ट के दौरान 7 अलग-अलग खातों में 8 ट्रांजैक्शन के जरिए करीब ₹14 करोड़ ट्रांसफर करवा लिए गए। फिलहाल आरोपी फरार हैं और मामले की जांच स्पेशल सेल कर रही है।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है?
डिजिटल अरेस्ट स्कैम एक नया और बेहद खतरनाक ऑनलाइन फ्रॉड है, जिसमें ठग खुद को CBI, ED, पुलिस, TRAI, कस्टम्स या कोर्ट का अधिकारी बताकर किसी व्यक्ति को यह यक़ीन दिला देते हैं कि वह किसी गंभीर अपराध में फंस चुका है। इसके बाद डर, दबाव और भ्रम के ज़रिये पीड़ित को मानसिक रूप से "कैद" कर लिया जाता है-इसे ही डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है। अक्सर डिजिटल अरेस्ट स्कैम के शिकार बुज़ुर्ग लोग, NRI, पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स और अकेले रहने वाले लोग होते हैं। डर और सम्मान के कारण लोग अक्सर परिवार से बात नहीं करते, जिसका फायदा ठग उठाते हैं।
इससे कैसे बचें?
विशेषज्ञों और पुलिस ने इस तरह के स्कैम से बचने के लिए कुछ अहम सलाह दी है कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती। CBI, ED, पुलिस या TRAI कभी भी फोन पर बैंक डिटेल या पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती। अगर कोई 'राष्ट्रीय सुरक्षा' या मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाए, तो तुरंत परिवार से बात करें। नज़दीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल से संपर्क करें। अनजान वीडियो कॉल, फर्जी आईडी और डिजिटल अरेस्ट जैसे शब्दों से सतर्क रहें।
यह मामला एक बार फिर चेतावनी है कि डिजिटल ठग अब मानसिक दबाव और डर का इस्तेमाल कर करोड़ों की ठगी कर रहे हैं, और सतर्कता ही इससे बचने का सबसे बड़ा हथियार है।












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