Bihar:नीतीश ने छोड़ा JDU अध्यक्ष का पद, करीबी आरसीपी सिंह को कमान देने के ये हो सकते हैं कारण

नई दिल्ली: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (bihar cm nitish kumar) ने रविवार को एक चौंकाने वाले फैसले में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष (JDU President)पद से हटने का फैसला कर लिया। लेकिन, नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने लगे हाथ अपने करीबी पार्टी नेता आरसीपी सिंह (RCP Singh) को पार्टी प्रमुख बनाने का प्रस्ताव भी रख दिया, जिसे पार्टी ने सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया। नीतीश कुमार ने अचानक ऐसा फैसला क्यों लिया है, इसको लेकर कयासों का दौर चल रहा है। बहरहाल, पार्टी में हुए इस बदलाव की जानकारी पार्टी के बड़े नेता केसी त्यागी (KC Tyagi) ने पटना में दी है।

नीतीश ने आरसीपी सिंह को बनाया पार्टी अध्यक्ष

नीतीश ने आरसीपी सिंह को बनाया पार्टी अध्यक्ष

जदयू नेता केसी त्यागी ने रविवार को पटना(Patna) में कहा है कि 'नीतीश कुमार जी ने पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने का फैसला किया है और इस पद के लिए आरसीपी सिंह (RCP Singh)के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसके बाद आरसीपी सिंह को अगले तीन साल के लिए नया पार्टी अध्यक्ष चुन लिया गया है।' पार्टी को ओर से दी गई जानकारी में कहा गया है कि नीतीश ने आरसीपी सिंह को नया पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव रखा जिस सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया और इस फैसले पर पार्टी के राष्ट्रीय परिषद ने मुहर भी लगा दी है।

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    आरसीपी सिंह को पार्टी अध्यक्ष बनाने की वजह

    आरसीपी सिंह को पार्टी अध्यक्ष बनाने की वजह

    नीतीश कुमार (Nitish Kumar)ने ऐसा फैसला क्यों लिया है, इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। एक तो इतना तय लग रहा है कि भले ही नीतीश कुमार पार्टी के अध्यक्ष पद से हट चुके हैं, लेकिन पार्टी की सत्ता अभी भी उन्हीं के हाथों में रहेगी। इसका कारण अपने करीबी आरसीपी सिंह जैसे नेता पर भरोसा दिखाने के उनके फैसले से स्पष्ट हो रहा है। आरसीपी सिंह (RCP Singh)ना केवल नीतीश कुमार के सजातीय या कुर्मी (Kurmi) बिरादरी के हैं, बल्कि उनके गृह जिले नालंदा से ही आते हैं। इस तरह से आरसीपी सिंह के रूप में नीतीश ने ऐसा नेता चुना है, जो उनके कोर वोट बैंक (कोयरी-कुर्मी) को भी सूट करता है और कुर्मियों के गढ़ माने जाने वाले नालंदा (Nalanda) जिला का पार्टी पर दबदबा भी बरकरार रह गया है।

    नीतीश ने क्यों लिया ऐसा फैसला?

    नीतीश ने क्यों लिया ऐसा फैसला?

    यही नहीं इस फैसले से नीतीश कुमार को अब बड़ा भाई बन चुकी बीजेपी (BJP) के साथ डील करने में भी ज्यादा आसानी हो सकती है। क्योंकि, जेडीयू अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh)प्रकरण से अभी भी उबर नहीं पाई है और केसी त्यागी ने रविवार को भी पार्टी के 6 विधायकों को भाजपा में मिलने पर कहा है कि 'गठबंधन की राजनीति के लिए यह अच्छा संकेत नहीं है।' यानि सरकार के मुखिया होने के नाते नीतीश भाजपा पर सीधे हमले से बचे रह सकते हैं और वह अपना काम आरसीपी सिंह या रामचंद्र प्रसाद सिंह के जरिए आसानी से करवा सकते हैं। पिछले शासन में नीतीश की पार्टी बड़े भाई की भूमिका में थी, लेकिन इस बार कहानी उलट है और भाजपा लगातार दबाव बनाने की कोशिश में है। मसलन, चर्चा है कि वह नीतीश कुमार से गृह विभाग की मांग कर रही है। ऐसे में पार्टी की ओर से नीतीश अलग तरह से दबाव का जवाब दबाव से देने की कोशिश कर सकते हैं।

    नीतीश का नया मास्टरस्ट्रोक!

    नीतीश का नया मास्टरस्ट्रोक!

    आरसीपी सिंह (RCP Singh)के बारे में कहा जाता है कि लाइम-लाइट में रहकर काम करने की उनकी आदत नहीं रही है और वह पर्दे के पीछे रहकर भी पार्टी और अफसरों को आसानी से साधते रहे हैं। वह पार्टी में पहले भी अघोषित नंबर दो की पोजिशन संभालते रहे हैं और जदयू के चाणक्य भी समझे जाते रहे हैं और उनकी बातों पर सुप्रीमो नीतीश को गहरो भरोसा रहता है। ऐसे में जब नीतीश ने उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी देकर अपनी राजनीति नया मास्टरस्ट्रोक दिखाया है तो आने वाले दिनों में बिहार में सत्ताधारी गठबंधन के समीकरण में बेहद रोमांचक क्षण देखने को भी मिल सकते हैं। इंतजार कीजिए।

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