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8 साल बाद कितना बदला 'निर्भया' का मतलब? इस साल अक्‍टूबर तक दिल्ली में आए 1,429 मामले

नई दिल्‍ली। आज ही के दिन (16 दिसंबर) साल 2012 को 'निर्भया' गैंगरेप और मर्डर केस ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। सड़क से लेकर संसद तक जनसैलाब उतर गया था और रेप के खिलाफ सख्‍त कानून बनाए जाने की मांग हो रही थी। इस जघन्‍य वारदात को 8 साल गुजर चुके हैं। चारों दोषियों को फांसी की सजा हो चुकी है। लेकिन जो सबसे बड़ा सवाल है वो ये कि दिल दहला देने वाली इस घटना के आठ साल बाद भी, 'निर्भया' के मायने में क्‍या कोई बदलाव आया है? इन सबके जवाबों से पहले एक बार फिर जान लेते हैं कि क्‍या हुआ था 16 दिसंबर की उस काली रात को।

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    8 साल बाद कितना बदला निर्भया का मतलब? इस साल अक्‍टूबर तक दिल्ली में आए 1,429 मामले

    चलती बस में 6 लोगों ने किया था निर्भया से गैंगरेप

    16-17 दिसंबर 2012 की रात दक्षिणी दिल्ली में एक चलती बस में छह लोगों ने 23 वर्षीय फिजियोथेरेपी इंटर्न के साथ बलात्कार किया। इस घटना को इतनी क्रूरता से किया गया कि इसे देश की इतिहास की क्रूरतम रेप के मामलों में दर्ज किया है। निर्भया से बुरी तरह दरिंदगी के बाद उसे सड़क पर फेंक दिया। 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इस मामले में इसी साल छह में से चार दोषियों को मौत की सजा दे दी गई।

    दोषियों में से एक राम सिंह ने मामले की सुनवाई शुरू होने के कुछ ही दिन बाद तिहाड़ जेल में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी, जबकि एक किशोर को तीन साल सुधार गृह में गुजारने के बाद 2015 में रिहा कर दिया गया था। निर्भया के दोषियों को मार्च 2020 को फांसी दे दी गई। चार आरोपियों को फांसी दी गई। सात साल तीन महीने लम्बी लड़ाई के बाद निर्भया के दोषियों को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया।

    क्‍या कहा निर्भया की मां ने

    निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि बेटी को इंसाफ मिल गया है और चार दोषियों को फांसी हुई। 2012 के बाद मैं 8 साल लड़ी। हम आगे भी दूसरी बच्चियों के इंसाफ के लिए लड़ते रहेंगे। जो हर साल हम प्रोग्राम करते थे इस साल कोरोना की वजह से नहीं कर पाएंगे लेकिन ऑनलाइन प्रोग्राम करेंगे। इस तरह के अपराध कैसे रुकेंगे? सवाल का जवाब देते हुए निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि किसी के भी मन में कानून का खौफ नहीं है। कानून में जो भी कमियां हैं उसे सरकार और कानून दूर करे। हाथरस को ही देख लीजिएय हमारा सिस्टम और सरकार जब जिम्मेदारी से काम करेगा तभी अपराध रुकेंगे।

    दिल्ली में इस साल अक्टूबर तक 1,429 मामले

    दिल्‍ली में इस साल अक्टूबर तक दुष्कर्म के 1,429 मामले सामने आए हैं। पिछले साल इसी अवधि में दिल्ली में दुष्कर्म के 1,884 मामले सामने आए थे, जो साल खत्म होने तक बढ़कर 2,168 मामले हो गए। 2012 में कुल 706 रेप केस दर्ज किए गए थे, जिसमें 16 दिसंबर को निर्भया के साथ नृशंस गैंगरेप भी शामिल था। दिल्ली पुलिस ने इस साल अक्टूबर तक महिलाओं पर हमले के कुल 1,791 मामले दर्ज किए। इसकी तुलना में 2019 में इसी अवधि के दौरान 2520 मामले दर्ज किए गए, जो साल के अंत तक बढ़कर 2,921 हो गए। 2012 में इसी अपराध के लिए कुल 727 मामले दर्ज किए गए थे।

    2019 में इसी अवधि में 2,988 सूचित आंकड़ों के मुकाबले इस साल अक्टूबर तक कुल 2,226 महिलाओं का अपहरण किया गया था। 2019 के अंत तक दिल्ली में महिलाओं के अपहरण के 3,471 मामले सामने आए। 2012 में महिलाओं के अपहरण के कुल 2,048 मामले दर्ज किए गए थे। दिल्ली पुलिस ने इस साल अक्टूबर तक आईपीसी की धारा 498-ए/406 के तहत 1,931 मामले दर्ज किए। पिछले साल इसी अवधि के दौरान कुल 3,052 मामले दर्ज किए गए थे, जो साल खत्म होने के समय तक बढ़कर 3,792 हो गए। 2012 में दिल्ली पुलिस ने महिलाओं के पति और ससुराल वालों के खिलाफ 2,046 मामले दर्ज किए थे। दिल्ली पुलिस ने इस साल अक्टूबर तक दहेज हत्या के 94 मामले भी दर्ज किए हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में इसी प्रकृति के 103 मामले दर्ज हो रहे हैं। साल 2012 में दिल्ली पुलिस ने दहेज हत्या के कुल 134 मामले दर्ज किए थे।

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