Mock Drill: क्यों जरूरी हुई मॉक ड्रिल? क्या आम लोग भी होंगे शामिल? जानिए सबकुछ
Mock Drill: देश युद्ध जैसी तैयारी में है। गृह मंत्रालय ने 7 मई को देशभर के 259 सिविल डिंफेंस जिलों में एक साथ मॉक ड्रिल आयोजित करने का आदेश दिया है। यह फैसला अचानक नहीं है।
इसके पीछे हालिया आतंकी घटनाएं, पड़ोसी देश की सैन्य हरकतें और बदलते भू-राजनीतिक समीकरण हैं। जिससे देश को नई और जटिल सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

कौन-कौन भाग लेगा?
इस अभ्यास में जिला नियंत्रक, स्थानीय प्रशासन, सिविल डिफेंस वार्डन, स्वयंसेवक, होम गार्ड्स (सक्रिय और रिज़र्व दोनों), एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र संगठन (NYKS), और स्कूल-कॉलेज के छात्र भाग लेंगे।
ये भी पढ़ेंं Pahalgam Terror Attack: पाक की डिजिटल घुसपैठ! एक-दो नहीं, कई भारतीय संस्थानों पर साइबर अटैक
गृह मंत्रालय के आदेश में क्या कहा गया है?
गृह मंत्रालय के अंतर्गत निदेशालय जनरल फायर सर्विस, सिविल डिफेंस और होम गार्ड्स द्वारा जारी पत्र में कहा गया, 'मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य में नई और जटिल चुनौतियां उत्पन्न हुई हैं, इसलिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सिविल डिफेंस की अधिकतम तैयारियां हर समय सुनिश्चित की जानी चाहिए।'
क्या हुआ ऐसा जो ये ज़रूरी हो गया? (Why is mock drill necessary)
- पिछले कुछ दिनों में जो घटनाएं हुई हैं, उनसे सरकार सतर्क हो गई है।
- जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हमला हुआ, जिसमें कई लोगों की जान गई।
- पाकिस्तान ने मिसाइल टेस्ट किया और सेना को हाई अलर्ट पर रखा।
- देश के कई इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों ने खुफिया चेतावनियां दी हैं।
इन हालातों में सरकार ने तय किया कि देश की सिविल डिफेंस (यानि आम जनता की सुरक्षा के लिए बनाई गई व्यवस्था) की हकीकत क्या है, ये जमीन पर जांची जाए।
मॉक ड्रिल में क्या-क्या होगा?
सरल शब्दों में, ये एक तरह की 'वार्म-अप एक्सरसाइज' है मानो कोई हमला हुआ हो और हमें तुरंत रिएक्ट करना हो।
- एयर रेड सायरन बजेंगे ताकि देखा जा सके कि लोग कैसे रिएक्ट करते हैं।
- भारतीय वायुसेना के साथ रेडियो-हॉटलाइन से संपर्क का अभ्यास होगा।
- कंट्रोल रूम और बैकअप (शैडो कंट्रोल रूम) की तैयारी देखी जाएगी।
- छात्रों और आम लोगों को बताया जाएगा कि अगर हमला हो जाए तो क्या करना चाहिए।
- रात को ब्लैकआउट यानि कोई लाइट नहीं आने के बाद कैसे रहना है उसकी प्रैक्टिस करवाई जाएगी।
- जरूरी इमारतों को छुपाने के तरीके आजमाए जाएंगे।
- फायर ब्रिगेड, रेस्क्यू टीम, वार्डन - सबको एक्टिव करके उनकी रफ्तार देखी जाएगी।
- लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने (Evacuation) की योजना चलाई जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी भी होगी जांच
किसी भी हमले या आपदा के समय अस्पतालों की भूमिका सबसे अहम होती है। इसीलिए मॉक ड्रिल में हेल्थ सिस्टम की भी परीक्षा की जाएगी
- नज़दीकी अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखा जाएगा
- यह देखा जाएगा कि एम्बुलेंस कितनी तेजी से मौके पर पहुंचती हैं
- डॉक्टर और नर्सों की उपलब्धता, आपातकालीन स्टाफ की तैनाती
- ICU, ऑपरेशन थिएटर, और दवाओं की उपलब्धता की जांच
- ऑक्सीजन सप्लाई और ब्लड बैंक की स्थिति का मूल्यांकन
- यदि ज़रूरत पड़ी तो अस्थायी चिकित्सा केंद्र (Temporary Medical Camps) बनाए जाएंगे












Click it and Unblock the Notifications