मेरठ: एक ही IMEI नंबर से 13,000 मोबाइल फोन ऐक्टिव, चीन की साजिश तो नहीं ?
नई दिल्ली- दुनिया भर में कोरोना वायरस के फैलने के लिए चीन को जिम्मेदार माना जा रहा है। दक्षिण चीन सागर में भी वह माहौल बिगाड़ने की लगातार कोशिश कर रहा है। लद्दाख में तो वह भारत के साथ किसी भी वक्त भिड़ने की ताक में नजर आ रहा है। इन हालातों के बीच पता चला है कि चाइनीज मोबाइल कंपनी Vivo के एक ही आईईएमआई नंबर वाले 13,000 से ज्यादा फोन भारत में ऐक्टिव हैं। यह खुलासा उत्तर प्रदेश की मेरठ पुलिस ने किया है, जिसकी साइबर सेल की जांच में यह तथ्य सामने आया है। मेरठ पुलिस की साइबर सेल इस मामले की आगे जांच में जुट गई है, लेकिन चीन जिस तरह की हरकतों में लगा हुआ है, उससे बहुत बड़ी भारत विरोधी साजिश की आशंकाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।

एक ही IMEI नंबर के 13,000 मोबाइल फोन
उत्तर प्रदेश के मेरठ में चाइनीज मोबाइल कंपनी Vivo के 13,000 से ज्यादा मोबाइल फोन एक ही आईईएमआई नंबर (International Mobile Equipment Identity number) से ऐक्टिव होने के खुलासे से हड़कंप मचा हुआ है। सबसे बड़ी बात ये है कि एक पुलिसकर्मी के मोबाइल की स्क्रीन टूटने की वजह से यह खुलासा हो पाया है कि भारत की सुरक्षा के साथ एक चाइनीज कंपनी ने इतना बड़ा खिलवाड़ किया है। मेरठ के एसपी सिटी एएन सिंह ने कहा है, "मेडिकल थाना क्षेत्र में विवो कंपनी का एक मोबाइल एक पुलिसकर्मी के द्वारा लिया गया था, जिसमें कुछ खराबी आने पर बनने के लिए गया। जब बनकर आया तो उसमें लगातार एरर आता रहा। एरर आने के बाद उस कर्मचारी ने मोबाइल को साइबर सेल मेरठ को दिया, जिसमें जांच में पाया गया कि जिस आईएमईआई नंबर का वह मोबाइल शो कर रहा है, उसी आईईएमआई नंबर के 13,000 से अधिक मोबाइल प्रचलन में हैं। यह एक बड़ा संगीन मामला है। ये सुरक्षा से जुड़ा मामला है।"

लापरवाही या बहुत बड़ी साजिश ?
जानकारी ये मिल रही है कि जिस पुलिसकर्मी के मोबाइल का आईईएमआई नंबर उन 13 हजार से ज्यादा आईईएमआई नंबरों में शामिल है, वो उत्तर प्रदेश के एडीजी दफ्तर में दरोगा के पद पर तैनात हैं। एडीजी राजीव सब्बरवाल ने कहा है कि यदि वास्तव में यह टेक्निकल फॉल्ट का मामसा है तो इसे सुधारने का प्रयास किया जाएगा। लेकिन, यदि कंपनी का कोई फर्जीवाड़ा सामने आया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उधर, एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह ने भी बताया कि "प्रथम दृष्या लग रहा है कि यह कंपनी की लापरवाही है, इसका अपराधियों के द्वारा लाभ लिया जा सकता है। इसमें सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर मेडिकल कॉलेज में विवेचक और साइबर सेल के एक्सपर्ट लोगों की टीम बना दी गई है, जिससे विवेचनाओं में गुणवत्ता रहे, साक्ष्य संकलन सही प्रकार से रहे। "

तीन साल तक की सजा का प्रावधान
यहां ये बता देना जरूरी है कि टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नियमों के तहत एक ही आईईएमआई नंबर के एक से ज्यादा मोबाइल फोन नहीं बेचे जा सकते। इस तरह से Vivo के मोबाइल के साथ आया यह मामला पूरी तरह से उस नियम का उल्लंघन है। कानून के तहत आईईएमआई नंबर से किसी भी तरह की छेड़छाड़ पर तीन साल की सजा का प्रावधान है। अगर किसी का फोन चोरी हो जाता है या गुम हो जाता है तो उसका पता लगाने के लिए यही नंबर एक बड़ा कारगर तरीका है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह Vivo कंपनी की सिर्फ लापरवाही का मामला है या इसके पीछे को राष्ट्र विरोधी ताकतों का हाथ है। खासकर अभी चीन की जो चालबाजियां नजर आ रही हैं, उसे देखकर उसपर किसी तरह यकीन करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में जब लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुएल कंट्रोल (एलएसी ) पर तनाव की स्थिति है तो मेरठ में एक पुलिस वाले के फोन की वजह से हुए खुलासे से देश की सुरक्षा एंजेंसियों के कान भी खड़े हो चुके हैं।

पहले भी आ चुका है ऐसा मामला
गौरतलब है कि इस तरह का यह पहला मामला नहीं है। 2019 के नवंबर में भी एक ऐसा ही फर्जीवाड़ा सामने आया था, जिसमें तकरीबन एक लाख मोबाइल फोन एक ही आईईएमआई नंबर के पाए गए थे। वो सारे फोन देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐक्टिव थे। बड़ी बात ये है कि उनमें भी ज्यादातर फोन Vivo मोबाइल कंपनी के ही मिले थे। अगर यह लापरवाही है तो यह भारत की सुरक्षा से खिलवाड़ करने जैसा है, क्योंकि इन गलतियों का आतंकवादी और अपराधी लोग गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।(अंतिम तस्वीर प्रतीकात्मक)












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