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Sanjeev Kumar Singh CRPF: वो बहादुर बेटा जो अपने जन्‍मदिन पर बॉर्डर से तिरंगे में लिपटकर आया घर

बिहार के रहने वाले Sanjeev Kumar Singh CRPF में सहायक कमांडेंट के पद पर तैनात थे। 5 अगस्‍त 2004 को जम्‍मू कश्‍मीर में आतंकी हमले में शहीद हो गए थे।

Sanjeev Kumar Singh CRPF: अगस्‍त 2004 में मां घर पर सेहरा बुन रही थी। दोस्‍त 6 अगस्‍त को आ रहे जन्‍मदिन को यादगार बनाने की तैयारी में थे और खुद भारत मां की रक्षा में तैनात। नाम है संजीव कुमार सिंह। बिहार का वो बहादुर बेटा जो जन्‍मदिन पर घर तो लौटा, मगर तिरंगे में लिपटकर और सबसे हमेशा-हमेशा के लिए जुदा होकर।

Sanjeev Kumar Singh CRPF

आज 5 अगस्‍त 2023 को संजीव कुमार सिंह का 19वां शहादत दिवस है। इतने साल बीत गए, मगर उनकी बहादुरी के चर्चे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में अब भी होते हैं। हो भी क्‍यों नहीं? ये आतंकियों से शेर की तरह जो लड़े। दो को मार गिराया था।

CRPF में संजीव कुमार सिंह के बैचमेट रहे वर्तमान में सेकंड इन कमांड देवेंद्र सिंह कस्‍वा ने वन इंडिया हिंदी से बातचीत में संजीव कुमार सिंह के साथ ट्रेनिंग से लेकर उनकी वीरगति तक की पूरी कहानी बयां की, जो हर किसी को जोश और जब्‍जे से भर देने वाली है।

 Devendra Singh Kaswa

बीकानेर से हैं देवेंद्र सिंह कस्‍वा

राजस्‍थान के बीकानेर जिले की श्रीडूंगरगढ़ तहसील के गांव सोनियासर के रहने वाले देवेंद्र सिंह कस्‍वा कहते हैं कि वर्ष 2002 में CRPF भर्ती हुआ। ट्रेनिंग के लिए राजस्‍थान के माउंट आबू पहुंचा था। वहां साथी जवान बिहार के संजीव कुमार सिंह से मुलाकात हुई। 6 अगस्‍त 1976 को जन्‍मे संजीव कुमार बिहार के वैशाली जिले के हाजीपुर में कौरी बुजुर्ग गांव के रहने वाले थे। उन्‍होंने बीएससी की डिग्री ले रखी थी।

सीआरपीएफ की 69 बटालियन के जवान थे संजीव

कस्‍वा कहते हैं कि ट्रेनिंग के दौरान जान-पहचान बढ़ी तो दोस्‍ती हो गई। सीआरपीएफ की 69 बटालियन के जवान संजीव बहुत मिलनसार थे। स्‍वाभाव सरल व विनम्र था। वे बहादुर तो थे ही। ट्रेनिंग के बाद बटालियन को जम्‍मू कश्‍मीर में तैनात किया गया। ये वो वक्‍त था जब वादियों में आतंकी हमले बढ़ते जा रहे थे।

Sanjeev Kumar Singh of CRPF

साल 2004 में भी हुआ पुलवामा जैसा हमला

मई 2004 में तो आतंकियों ने सड़क के नीचे विस्‍फोटक सामग्री लगाकर बीएसएफ जवानों और उनके परिवार से भरी बसों को उड़ा दिया था। वो BSF पर पुलवामा जैसा हमला हुआ था। अन्‍य जगहों पर भी अक्‍सर आतंकी हमले हुआ करते थे।

सीआरपीएफ कैंप पर आतंकी हमला

बात अगस्‍त 2004 की है। सीआरपीएफ की 69 बटालियन में संजीव कुमार सिंह भी जम्‍मू कश्‍मीर के श्रीनगर में राजबाग में तैनात थे। रात को आतंकियों ने सीआरपीएफ कैंप पर हमला कर दिया। संजीव कुमार सिंह समेत सीआरपीएफ के 13 जवान शहीद हो गए थे। वीरगति को प्राप्‍त होने से पहले संजीव कुमार सिंह ने अदम्‍य साहस दिखाया। दो आतंकियों को ढेर कर दिया। उनका शरीर गोलियों से छलनी कर दिया था।

अगले दिन था संजीव कुमार का जन्‍मदिन

6 अगस्‍त को संजीव कुमार का जन्‍मदिन आता है और अपने जन्‍मदिन से एक दिन पहले 5 अगस्‍त को वे शहीद हो गए थे। जन्‍मदिन के मौके पर ही उनकी पार्थिव देह घर बिहार पहुंची। वे अविवाहित थे। उनकी सगाई की बात चल रही थी।

5 अगस्‍त को ही हटी धारा 370

यह इत्‍तेफाक ही है जिस धारा 370 की वजह से जम्‍मू कश्‍मीर में आतंकवाद की जड़े मजबूत हो रही थी वो धारा 370 साल 2019 में 5 अगस्‍त को ही हटी। देवेंद्र सिंह कस्‍वा अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखते भी हैं कि 'कल इसका जन्मदिन है और आज इसका वीरगति दिन है। भाई, 19 साल हो गए। बहुत याद आते हो। 2004 में 5 अगस्त को मेरे बैचमेट संजीव ने कश्मीर में देश की एकता और अखंडता के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। 15 साल बाद 2019 में 5 अगस्त को धारा 370 हटा दी गई । मेरे मित्र के बलिदान को यही सबसे बड़ा सम्मान है। जय हिन्द। नमन'

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