94 साल के जीनियस Martin Cooper ने 50 साल पहले बनाया पहला 'मोबाइल', पहले सेलफोन की VIDEO देखिए
गोल्डन जुबली कई मायनों में खास मौका होता है। ऐसे अवसरों पर हम याद करते हैं वो रोमांचक सफर जिनसे गुजरने के बाद हमारे हाथ कामयाबी लगती है। मोबाइल या सेलफोन का आविष्कार ऐसी ही परीकथा लगती है। जानिए कैसे औऱ कब बना मोबाइल

Martin Cooper नाम उस legend inventor का है जिसकी कोशिशों का नतीजा है मोबाइल फोन। आज मोबाइल की खोज को 50 साल पूरे हो रहे हैं। mobile phones आज हर इंसान के साथ इस तरह जुड़ा है, जिससे कई चिंताएं भी सामने आ रही हैं। 50 years of mobile होने के समय ये जानना काफी रोचक है कि आखिर इसकी खोज करने वाले 94 साल के वेटरन मार्टिन कूपर मोबाइल के इस्तेमाल से बचते हैं।
दरअसल, तीन अप्रैल को मोबाइल फोन के आविष्कार को 50 साल पूरे हो रहे हैं। ये सूचना क्रांति के दौर में माइलस्टोन तो है, लेकिन सेहत के चश्मे से देखने पर मोबाइल के बेजा इस्तेमाल के कारण हमारी पेशानी पर बल भी पड़ने लगते हैं। अधिकांश सेवाओं के ऑनलाइन होने के दौर में यूजर्स मोबाइल पर कितना समय बिता रहे हैं, उन्हें खुद भी इस बात का अंदाजा नहीं रहता। हालांकि, कई रिसर्च में ये बात सामने आ चुकी है कि कोरोना महामारी के दौर में ऑनलाइन एक्टिविटी बढ़ी है, इसके कारण औसत रूप से हफ्ते में केवल छह घंटे का समय फैमिली के साथ बिताने का मौका मिल रहा है।

स्मार्टफोन और 5जी नेटवर्क के इस दौर में हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बातें भी करते हैं। हमारी सर्च हिस्ट्री और रूचि के मुताबिक मोबाइल इंटरनेट रिकमेंडेशन भी देता है, ये बेहद बुनियादी चीजें हैं जो मोबाइल के दौर में हम बिना गहरे तकनीकी ज्ञान के भी समझ सकते हैं। इन सबके बीच बेहद चिंताजनक बात ये है कि मोबाइल का बेजा इस्तेमाल हमारी दिनचर्या को प्रभावित करने के साथ-साथ सेहत को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। मोबाइल की खोज करने वाले मार्टिन कूपर खुद इस पीड़ा से गुजर रहे हैं।

एक इंटरव्यू में 94 साल के कूपर बताते हैं कि उन्हें 24 घंटे में केवल 5 फीसद समय (लगभग 72 मिनट) मोबाइल पर देना होता है। बाकी समय में वे कोई दूसरा काम करते हैं। वायरलेस फोन या मोबाइल की इन्वेंशन करने वाले कूपर मोबाइल के उपभोक्ताओं के बारे में कहते हैं कि लोग इस तरीके से बिना सोचे समझे मोबाइल फोन का इस्तेमाल शुरू कर देंगे, उन्होंने सपने में भी ऐसा नहीं सोचा था। पांच दशकों में तकनीकी मोर्चे पर काफी बदलाव हुए हैं, लेकिन बच्चों का अधिकांश समय मोबाइल स्क्रीन पर नजरें गड़ाए बीत रहा है, जो चिंताजनक है।
कुछ रोचक बिंदुओं पर एक नजर-
- 1972 में पहली बार मार्टिन कूपर को ऐसा डिवाइस बनाने का आइडिया आया जिसे रिमोट तरीके से इस्तेमाल कर सकें।
- पहला फोन मोटोरोला कंपनी के साथ मिलकर बनाया। की पैड के साथ बने इस फोन का वजन लगभग एक किलो था।
- तीन अप्रैल 1973 को पहली फोन कॉल के बारे में कूपर बताते हैं कि 50 साल पहले उन्होंने उनसे मुकाबला कर रहे शख्स को फोन मिलाया था।
- जोएल एंगल को फोन करने के बाद कूपर ने उन्हें बताया, वे सेलफोन से बातें कर रहे हैं, पोर्टेबल सेलफोन से।
- अमेरिकन इंजीनियर मार्टिन कूपर को 'फादर ऑफ सेल फोन' भी कहा जाता है।
मोबाइल का उत्पादन और भारत का बाजार
भारत के मोबाइल बाजार पर टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2021 से वित्तीय वर्ष 2022 तक उत्पादन में 126% का इजाफा हुआ। इसी के साथ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बनकर उभरा। मात्रा के मामले में दुनिया में मोबाइल हैंडसेट के दूसरे सबसे बड़े निर्माता के रूप में उभरा भारत बड़े पैमाने फोन बना रहा है। सरकार की स्कीम के तहत 16 कंपनियों को मंजूरी दी गई है। इनमें 10 मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियां, जबकि 6 इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियां हैं। मोबाइल फोन के वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी काफी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। देश ने मोबाइल खपत में 15-20% की वृद्धि हुई, लगभग 2.5 ट्रिलियन रुपये का बाजार। वित्त वर्ष 24 तक मोबाइल बाजार 3.5-4 ट्रिलियन रुपये होने का अनुमान।
कैसा दिखता था पहला सेलफोन- VIDEO
सेल फोन के आविष्कार को 50 साल पूरे होने पर समाचार एजेंसी AFP ने मार्टिन कूपर संग वीडियो ट्वीट किया। उन्होंने अलग-अलग मॉडल के सेल्युलर टेलीफोन को दिखाया, जो उन्होंने अपने जीनियस दिमाग से दुनिया को दिए। वे बताते हैं कि इस फोन से केवल बातें की और सुनी जा सकती थीं।
मोबाइल की खोज के 50 साल होने पर मार्टिन कूपर कहते हैं कि वे भले ही एप्पल के अत्याधुनिक फोन का इस्तेमाल करते हैं, एप्पल वॉच का भी इस्तेमाल करते हैं लेकिन फोन में पहले से इंस्टॉल दर्जनों ऐप उन्हें अक्सर दुविधा में डाल देते हैं। शायद 50 साल बाद भी हम अभी वैसी समझ विकसित करने के शुरुआती स्टेज में हैं कि आखिर मोबाइल फोन से क्या-क्या काम किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में शिक्षा और सेहत के क्षेत्र में मोबाइल क्रांति कर सकता है। इसकी पूरी संभावना है, क्योंकि स्मार्ट वॉच और अत्याधुनिक स्मार्टफोन आपकी हार्ट बीट जैसी चीजें अभी से ही डिटेक्ट करना शुरू कर चुकी हैं।
कूपर को उम्मीद है कि विज्ञान के बढ़ते प्रभाव की एक तस्वीर वैसी भी होगी जब मोबाइल के सेंसर से शरीर के सेंसर को जोड़ा जा सकेगा। इससे आने वाले दिनों में होने वाली बीमारी का पता लगाने में मदद मिल सकती है। इंजीनियर और वैज्ञानिक लगातार इस दिशा में शोध कर रहे हैं। भले ही कूपर अत्यधिक फोन के इस्तेमाल से चिंतित हैं, उन्हें इसकी खुशी भी है कि हर जेनरेशन पहले वाले की तुलना में अधिक स्मार्ट बनती जा रही है।
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क्या 20 साल पहले इतनी बड़ी संख्या में मोबाइल फोन यूजर्स होने की उम्मीदें थीं। इस पर कूपर कहते हैं कि तकनीक से हर समय चुनौतियां अलग तरह की मिलती हैं, लेकिन हमें इसका एहसास था कि एक दिन सभी लोगों के पास मोबाइल होगा। टीवी आने के बाद भी चौंकाने वाला सम्मोहन दिखा था, लेकिन धीरे-धीरे लोगों ने अधिक टीवी देखने के नुकसान को समझते हुए इसके पॉजिटिव साइड को अच्छी तरह पहचाना। मोबाइल के साथ भी ऐसा होने की पूरी उम्मीद है।












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