Manipur: राष्ट्रपति शासन लगने के बाद कितने बदले मणिपुर के हालात? 5 संकेतों से समझिए
Manipur: हाल ही में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के बाद मणिपुर में हालात सुधरने की उम्मीदें जगी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई में हुई समीक्षा बैठक के बाद कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं,जो राज्य में शांति और स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
आइए, उन पांच प्रमुख संकेतों पर नजर डालते हैं जिनसे यह संभावना पैदा हुई है कि मणिपुर में स्थिति में सुधार होने के आसार पैदा हो रहे हैं। पूर्वोत्तर का यह राज्य 3 मई, 2023 से ही जातीय संघर्ष से पीड़ित है।

Manipur: नेशनल हाइवे खोलने का फैसला
राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहली समीक्षा बैठक में दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को खोलने का निर्णय लिया गया है। यह फैसला मणिपुर के लिए बेहद अहम है, क्योंकि इससे राज्य में यातायात सुचारू होगा और जरूरी चीजों की आपूर्ति में सुधार आएगा। इससे राज्य की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में भी सुधार की संभावना है, जो लगभग दो वर्षों से बेपटरी हो चुकी है।
Manipur: उपद्रवग्रस्त इलाकों में हथियारों का सरेंडर
मणिपुर में शांति बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कट्टरपंथी मेइतेई संगठन अराम्बाई तेंगगोल ने हाल ही में 600 से अधिक हथियार सरकार को सौंप दिए हैं। इसके अलावा, अलग-अलग जिलों में कुल 99 हथियार सुरक्षा बलों के समक्ष सरेंडर किए गए हैं। यह राज्य में मेइतेई और कुकी समुदायों के बीच शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।
Manipur: अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त अभियान
मणिपुर में अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए सुरक्षा बल बड़े पैमाने पर अभियान चला रहे हैं। हाल ही में तेंगनौपाल जिले में 15 एकड़ में फैले अफीम की अवैध खेती को नष्ट कर दिया गया है।
इसके अलावा, कांगपोकपी और इंफाल ईस्ट जिलों में पांच अवैध बंकरों को भी ध्वस्त किया गया है। यह कदम राज्य में कानून-व्यवस्था बहाल करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को लेकर एक बड़ा संकेत है।
Manipur: हालात बेहतर करने की दिशा में सरकार की सक्रियता
अराम्बाई तेंगगोल जैसे प्रभावशाली संगठन ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व की सराहना की है और कहा है कि उनका नेतृत्व संकट के इस दौर में अहम भूमिका निभा रहा है। प्रदेश के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला के प्रयासों की भी सराहना की गई है, जो यह दिखाता है कि केंद्र सरकार राज्य में शांति बहाली के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है।
Manipur: तमाम सुरक्षा एजेंसियों का समन्वित प्रयास और ठोस कदम
भारतीय सेना, असम राइफल्स, मणिपुर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत किया गया है। यह समन्वय हिंसा पर अंकुश लगाने, उग्रवादियों को नियंत्रित करने और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए बेहद जरूरी है।
इन पांच संकेतों से स्पष्ट है कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद शांति बहाली की प्रक्रिया में तेजी आई है। अगर इसी प्रकार सरकार और सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय रहीं, तो आने वाले कुछ महीनों में मणिपुर के हालात में और सुधार देखने को मिल सकता है।
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