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Manipur: मणिपुर में 'प्रदर्शनकारियों' के पीछे कौन है, Free movement से किसे परेशानी है?

Manipur: मणिपुर में कूकी-जो (Kuki-Zo) समुदाय के लोगों की ओर से प्रदर्शन का दौर जारी है। यह केंद्र सरकार के 'फ्री मूवमेंट' (Free Movement) के निर्देशों की भावना के पूरी तरह से खिलाफ है। इन प्रदर्शनों ने राज्य में फिर से तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है, जिसमें जान-माल का नुकसान भी हुआ है। सवाल है कि जब मणिपुर में शांति बहाली की एक अच्छी पहल हो रही है हुई तो फिर इस तरह से जबरन 'फ्री मूवमेंट'में रुकावट डालने वालों से किसे फायदा मिलने वाला है?

राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद एक उम्मीद पैदा हुई थी कि अब दोनों समुदायों में कड़वाहट दूर होने की संभावनाएं पैदा होंगी। जिस तरह से प्रदेश के राज्यपाल एके भल्ला के आह्वान पर कुछ ही दिनों में बड़ी मात्रा में हथियार सरेंडर किए गए तो लगा की चीजें सही दिशा में बढ़नी शुरू हो गई हैं। लेकिन दो दिनों में जो कुछ हुआ है, उससे उस भरोसे पर पानी फिरता नजर आया है।

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Manipur News: प्रदर्शन के पीछे कौन लोग हैं और उनका इरादा क्या है?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 1 मार्च को निर्देश दिया था कि 8 मार्च से मणिपुर में सभी मार्गों पर लोगों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित की जाए। यह निर्णय राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए लिया गया था, क्योंकि मई 2023 से चली आ रही जातीय हिंसा के कारण लोगों का स्वतंत्र रूप से आना-जाना बाधित रहा है।

हालांकि, इस निर्देश का कूकी-जो समुदाय विरोध कर रहा है और इसे अपने समुदाय के लिए खतरा बता रहे हैं। उनका मानना है कि 'फ्री मूवमेंट" नीति से मेइतेई (Meitei) समुदाय को उनके इलाके में घुसने का मौका मिलेगा।

Manipur Free movement: लोगों को राहत देने की कोशिश में रुकावटें पैदा करने का मकसद क्या हो सकता है?

शनिवार को जब सरकार ने मणिपुर राज्य परिवहन निगम (MSTC) की बस सेवा को बहाल करने का प्रयास किया, तो कूकी बहुल कांगपोकपी जिले के गमगिफाई क्षेत्र में इन बसों पर पथराव किया गया। इस वजह से पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का प्रयोग करना पड़ा, लेकिन हालात और बिगड़ गए।

प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर टायर जलाए और रास्तों को रोक दिया। इस हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 40 से अधिक लोग घायल हो गए, जिनमें सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।

रविवार को भी कूकी बहुल इलाकों-चुराचांदपुर और टेंगनोउपाल में विरोध प्रदर्शन जारी रहा। वहां भी सड़कों पर टायर जलाने और रास्तों में रुकावटें पैदा करने जैसी घटनाएं सामने आईं हैं। हालांकि, रविवार को कोई ताजा हिंसा नहीं हुई, लेकिन माहौल बना तनावपूर्ण बना रहा।

Manipur Free Movement से किसे है परेशानी?

कूकी-जो समुदाय का कहना है कि यह निर्णय उनके लिए हानिकारक साबित हो सकता है, क्योंकि यह मेइतेई समुदाय को उनके क्षेत्रों में प्रवेश की अनुमति देगा। कूकी-जो काउंसिल (KZC) ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही के पक्ष में हैं, लेकिन लोगों की स्वतंत्र आवाजाही को लेकर उसे आपत्ति है।

उनका तर्क है कि जब तक दोनों समुदायों के बीच शांति स्थापित नहीं होती, तब तक 'फ्री मूवमेंट' संभव नहीं है। कूकी-जो समुदाय ने इस मुद्दे को अलगाव की ओर मोड़ते हुए अपने लिए एक अलग केंद्र शासित प्रदेश की मांग भी रखी है।

दूसरी ओर, सरकार इस नीति को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रही है। मणिपुर के मुख्य सचिव प्रशांत कुमार सिंह ने घोषणा की कि बस सेवाएं फिर से शुरू की जाएंगी और रुकावटें डालने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू की है, ताकि यातायात को सुचारू रूप से चलाया जा सके।

Manipur: केंद्र सरकार के सामने पैदा हुई बड़ी चुनौती

सवाल है कि कानूनों को ताक पर रखकर देश की जनता की स्वतंत्रता छीनने का अधिकार किसी भी संगठन को कैसे दिया जा सकता है? ऐसे में राज्य में अगर आने वाले दिनों में इन प्रदर्शनकारियों ने अपनी जिद नहीं छोड़ी तो देखने वाली बात होगी कि सरकार किस तरह से कानून का अमल करवा पाती है? (इनपुट-पीटीआई)

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