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Manipur Hinsa:मणिपुर में फ्री मूवमेंट के पहले दिन भड़की हिंसा, प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों में जोरदार झड़प

Manipur Hinsa:मणिपुर राज्य में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रहा है। करीब दो साल से चल रहे आपसी संघर्ष में 250 लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग बेघर हो चुके हैं। केद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के फ्री मूवमेंट ऐलान के पहले ही दिन हिंसा भड़क गई।

22 महीने की हिंसा के बाद सार्वजनिक यातायात फिर से शुरू किया गया लेकिन शनिवार(8 मार्च) को राज्य के कांगपोकपी जिले में फिर से अशांति की स्थिति पैदा हो गयी। इंफाल, चुराचांदपुर, कांगपोकपी, विष्णुपुर और सेनापति को जोड़ने वाली सड़कों पर शनिवार को जैसे ही बसें चलनी शुरू हुईं, कुकी समुदाय के लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया।

Manipur Hinsa

हालांकि, तनाव तब बढ़ गया जब इम्फाल से सेनापति की जा रही बसों के काफिले को कुकी बहुल इलाके में रोक दिया गया। इसपर सुरक्षा बलों ने हस्तक्षेप करते हुए हल्का बल प्रयोग किया और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने तथा नागरिकों की आवाजाही के लिए मार्ग साफ करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। अधिकारियों ने कहा कि सार्वजनिक आवागमन में बाधा डालने के किसी भी प्रयास का पुलिस द्वारा सख्त जवाब दिया जाएगा।

सरकार के फैसले के पहले दिन हिंसा भड़क उठी

करीब दो साल बाद संघर्ष प्रभावित राज्य में सार्वजनिक यातायात बहाल करने के मणिपुर सरकार के फैसले के पहले दिन हिंसा भड़क उठी। इसके पहले भी पिछले साल दिसंबर में, पूर्व सीएम एन बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली मणिपुर सरकार द्वारा इम्फाल से कांगपोकपी और चुराचांदपुर के लिए सार्वजनिक बस सेवाएं फिर से शुरू करने का प्रयास विफल हो गया था, क्योंकि इम्फाल के मोइरंगखोम में मणिपुर राज्य परिवहन (MST) स्टेशन पर कोई यात्री नहीं आया था।

गृहमंत्री अमित शाह ने फ्री मूवमेंट का ऐलान किया था

केद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने फ्री मूवमेंट का ऐलान किया था। उन्होंने 1 मार्च को मणिपुर के हालात पर गृह मंत्रालय में समीक्षा बैठक की थी। उसके बाद उन्होंने निर्देश दिया कि 8 मार्च से मणिपुर में सभी सड़कों पर आवाजाही सुनिश्चित की जाए और सड़कें ब्लॉक करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। बता दे कि मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने 9 फरवरी को इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद राज्य में 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था।

मणिपुर के स्थानिय लोगों ने कई ऐसे वीडियो शेयर किए है जिनमें प्रदर्शनकारी गाड़ियों पर पत्थर फेंकते, सड़कें खोदते, टायर जलाते और बैरिकेड लगाते नज़र आ रहे हैं। कुछ लोग सुरक्षाबलों को गालियां दे रहे थे और उन्हें वापस जाने के लिए कह रहे थे। ये झड़पे कुकी बहुल इलाके में हुई है।

मैतई और कुकी समुदायों का संघर्ष मई 2023 में शुरु हुआ उसके बाद से आपसी रंजीश इतनी बढ़ गई कि मैतेई लोग कुकी-प्रभुत्व वाली पहाड़ियों से भाग गए, जबकि कुकी ने मैतेई-बहुल क्षेत्रों को छोड़ दिया।

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