लिंगराज मंदिर प्रबंधन अध्यादेश को अब तक नहीं मिली मंजूरी, ओडिशा सरकार ने उठाए सवाल
ओडिशा के प्रचीन मंदिर लिंगराज का प्रबंधन ओडिशा हिंदू धार्मिक बंदोबस्ती अधिनियम, 1951 के तहत शासित है। लेकिन मौजूदा प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 (AMASR Act) के साथ टकराव मंदिर के प्रबंधन में बड़ी बाधा है। ऐसे में ओडिसा सरकार को केंद्र की ओर से लिंगराज मंदिर के प्रबंधन को लेकर अध्यादेश की केंद्र से मंजूरी का इंतजार है। वहीं दूसरी ओर मंदिर प्रबंधन केंद्र की ओर से उठाए गए चार सवालों के जवाब देने की तैयारी कर रहा है।
पटनायक सरकार की ओर लिंगराज मंदिर के बेहतर प्रबंधन के लिए अध्यादेश को मंजूरी दिए तीन साल बीत चुके हैं। लेकिन अब तक केंद्र ने अब तक इसको लेकर मंजूरी नहीं दी है। हालांकि प्राचीन मंदिर की बेहतर प्रबंधन के लिए ओडिशा सरकार की ओर लाया गया अध्यादेश समय की मांग है। लिंगराज मंदिर से जुड़े लोगों का मानना है कि अध्यादेश समय की मांग है, क्योंकि उड़ीसा उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद मंदिर में सेवा समूहों के बीच अक्सर झगड़े होते हैं। ऐसे में मंदिर में अनुष्ठानों में भी व्यवधान होता है।

ओडिशा में स्थित लिंगराज 11वीं सदी में स्थापित एक धार्मिक स्थल है, जो राज्यके धार्मिक बंदोबस्ती अधिनियम, 1951 द्वारा शासित है। लिंगराज मंदिर अधिनियम के मसौदा मंदिर के विकास और अनुष्ठानों में आने वाली कानूनी बाधाओं को दूर करने के लिए तैयार किया गया।
मंदिर के प्रबंधन में आने वाली वाली कानूनी बधाओं को लेकर पिछले दिनों कानून विभाग के अधिकारियों ने एक अहम बैठक की थी। जिसमें ये बात सामने आई कि ओडिशा सरकार का अध्यादेश फिलहाल समवर्ती सूची में है। ऐस में प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत टकराव की स्थिति उत्पन्न हो रही है।












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