'बेगूसराय के बेटे' के प्रचार में बाहरियों की भरमार से उठे स्थानीय सवाल

बेगुसराय। मोहम्मद मोहसीन ने चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में बेगूसराय के कई गांवों में डोर टू डोर कैंपेन किया। वो केरल की पट्टाम्बी विधानसभा सीट से विधायक हैं ओर बिहार दूसरी बार आए थे। बेगूसराय में मुस्लिम बहुल गांवों में कन्हैया कुमार के प्रचार की जिम्मेदारी उन्होंने ली थी। बुधवार को साहेबुपर कमाल विधानसभा के परवल टोला गांव में प्रचार करते हुए उन्हें उस वक्त असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब एक ग्रामीण ने उनसे पूछा कि आप लोग तो बाहरी हैं, हमे कोई परेशानी हुई तो हम किसे बताएंगे। मोहसीन के साथ चल रहे स्थानीय युवकों ने उस ग्रामीण को समझाया। कन्हैया की टीम में जो उस गांव के आसपास के लड़के थे,उनका परिचय कराया। चुनाव प्रचार करते हुए संभवत: मोहसीन के सामने ये सवाल पहली बार आया था, हालांकि बेगूसराय में ये चर्चा आम थी कि कन्हैया कुमार और गिरिराज सिंह का प्रचार कर रहे ज्यादातर लोग बाहरी हैं।

बेगूसराय में चुनाव प्रचार का हाल

बेगूसराय में चुनाव प्रचार का हाल

गिरिराज के प्रचार के लिए कोलकाता से आए त्रिभुवन मिश्रा गुरुवार को गिरिराज सिंह के जनसंपर्क अभियान में शामिल थे। उन्होंने बताया कि वो कोलकाता से आए हैं और उस जाति से ताल्लुक रखते हैं, जिससे गिरिराज सिंह हैं। वो कोलकाता में भूमिहारों के लिए बने एक संगठन से भी जुड़े हैं। गुरुवार को गिरिराज सिंह के जनसंपर्क अभियान का काफिला बेगुसराय नगर निगम क्षेत्र में घूम रहा था। उस काफिले में शामिल त्रिभुवन मिश्रा ने बताया कि वो कई सालों से चुनाव प्रचार कर रहे हैं और चेहरा देखकर बता सकते हैं कि कौन उन्हें वोट देगा। त्रिभुवन के साथ ही राकेश राय भी गिरिराज सिंह के काफिले में शामिल थे, जो उत्तर प्रदेश के घोसी के रहने वाले थे, हालांकि लंबे समय से दिल्ली में रह रहे थे। कन्हैया की टीम जेएनयू और लेफ्ट के कई बाहरी लोग कन्हैया के प्रचार के लिए जेएनयू के स्टूडेंट्स साथ ही वाम संगठनों से जुड़े हुए भी काफी लोग बेगूसराय आए थे।

कन्हैया के प्रचार के लिए तीन टीमें कर रही थीं काम

कन्हैया के प्रचार के लिए तीन टीमें कर रही थीं काम

आईसा से जुड़े और कन्हैया का प्रचार देख रहे जीशान अली ने बताया कि प्रचार के लिए तीन टीमें काम कर रही थीं। वाम मोर्चे की टीम अलग काम कर रही थी, कन्हैया की खुद की टीम लगी हुई थी और बाहर से आए ऐसे कई लोग थे, जिन्होंने स्वेच्छा से चुनाव प्रचार किया। दिल्ली से आए कन्हैया के एक सहयोगी ने बताया कि वो 10 दिनों से कन्हैया के प्रचार मे लगे हुए है और देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग खुद प्रचार के लिए आ रहे हैं।

चुनाव प्रचार को लेकर स्थानीय लोगों ने क्या कहा

चुनाव प्रचार को लेकर स्थानीय लोगों ने क्या कहा

बाहरी लोगों को देख असहज दिखे स्थानीय गुरुवार को कन्हैया के मोबाइल टॉर्च मार्च को देख रहे एक युवक ने बताया कि बेगूसराय में प्रचार के लिए बहुत से बाहरी लोग आए हैं, मार्च में बाहरी लोग शामिल हैं। ये लोग 29 अप्रैल के बाद नहीं दिखेंगे। कन्हैया जीत गए तो फिर हम जरूरत पड़ने पर किससे कहने जाएंगे, इसमें से कोई आदमी ऐसा नहीं है, जो हमें दोबारा बेगूसराय में मिलेगा। मोबाइल टॉर्च मार्च में शामिल रफी अहमद से जब मैंने पूछा कि मार्च में जो गाड़ियों पर चल रहे हैं, उन्हें वो पहचानते हैं। उनका जवाब था कि वो सभी को नहीं पहचानते। कई तो कुछ दिनों पहले से ही यहां दिख रहे है लेकिन मार्च में यहीं के लोग हैं। रफी ने कहा कि बाहरी लोग आकर प्रचार करें, हमें दिक्कत नहीं लेकिन जीतने के बाद वो दिखें ये ज्यादा जरूरी है।

पढ़ें, बेगूसराय लोकसभा सीट का पूरा प्रोफाइल

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