वरूणा+अस्सी पर जमकर हुई राजनीति, किसकी होगी काशी?
पिछले कुछ समय से जिस तरह से वाराणसी की रूप-रेखा पेश की गयी है उस हिसाब से केवल शिक्षा और मंदिरों के लिए मशहूर यह शहर आज इंटरनेशनल लेवल पर हाईटेक हो गया है। हर समाचार चैनल पर इस शहर के पान से लेकर कचौड़ी तक, घाटों से लेकर बनारसी साड़ी तक ऐसी व्याख्या की गयी है जिसे देखकर खुद बनारसी भी हैरान हैं।
पिछले कुछ समय से मंदिरों के इस शहर में गुजरात, दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों से आए लोगों की भरमार है, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी, आम आदमी पार्टी (आप) उम्मीदवार अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस के उम्मीदवार अजय राय के बीच के मुकाबले को देखने आए हैं।
भाजपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी का दावा है कि वाराणसी में भाजपा भारी मतों से जीतेगी। शहर पहले ही मोदी को जिताने का फैसला कर चुका है। उनके मुताबिक, मोदी के विरोधी अपना वक्त जाया कर रहे हैं।
आप के उत्तर प्रदेश प्रवक्ता वैभव माहेश्वरी मोदी लहर को खारिज करते हैं। उन्होंने दावा किया कि परिणाम मोदी और उनके समर्थकों को हैरान करने वाले होंगे। हर जगह पार्टियों के झंडे और मोदी, राहुल और केजरीवाल के मुखौटे लगाए कार्यकर्ता देखे जा सकते हैं।
शहर में पूरे चुनाव अभियान के दौरान भाजपा के 'हर हर मोदी, घर घर मोदी' और 'अबकी बार, मोदी सरकार' के नारे और आप के 'बाहर निकलो मकानों से, जंग लड़ो बेईमानों से' के नारे गूंजते रहे हैं।
जिस तरह से इस शहर ने चुनावी माहौल में रफ्तार पकड़ी है वैसी कल्पना किसी ने भी नहीं की थी। हमेशा राजनीतिक लोगों को चुनकर केन्द्र में भेजने वाली इस आध्यात्मिक नगरी आज खुद राजनीति के केन्द्र में आ गयी हैं जहां लोगों ने इसे पूरी तरह से हाईटेक करने का दावा किया है।
अब उनके दावों और वादों का कितनी असर बनारसियों पर हुआ है उसका पता तो 16 मई को चलेगा लेकिन इसमें कोई शक नहीं हैं कि लोकतंत्र के इतिहास में इस बार जितनी राजनीति वरूणा+अस्सी यानी कि वाराणसी पर हुई है उतनी किसी और शहर पर नहीं इसलिए देखना दिलचस्प होगा कि इस बार काशी किसकी होती है?













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