Lawrence Bishnoi Net Worth: जेल में हर साल 30-35 लाख करता है खर्च, कुल कितने करोड़ का मालिक है लॉरेंस बिश्नोई?
Lawrence Bishnoi Net Worth: अमेरिका से हाल ही में एक बड़ी खबर आई है। वहां के जस्टिस डिपार्टमेंट (DOJ) और एफबीआई ने मिलकर 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' नाम से एक बड़ा एक्शन लिया है। इस मामले में दाखिल चार्जशीट के मुताबिक, जग्गू भगवानपुरिया, गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई की तिकड़ी का इंटरनेशनल क्राइम सिंडिकेट अमेरिकी एजेंसियों के रडार पर आ चुका है। भारत की जेलों और विदेशों में बैठे इन गैंगस्टर्स पर अमेरिकी धरती से शिकंजा कसा जा रहा है। सवाल यह उठता है कि एक पुलिस कांस्टेबल का बेटा, जो सालों से गुजरात की साबरमती जेल में बंद है, वह आखिर इस ग्लोबल नेटवर्क का सरगना कैसे बन गया? साथ ही जानेंगे कि उसने अब तक क्राइम से कितना कमाया है।
मौजूदा वक्त में किस जेल में है लॉरेंस?
साबरमती सेंट्रल जेल की सुरक्षा को अभेद्य माना जाता है। वहां सीसीटीवी, जैमर्स और सुरक्षाकर्मियों का कड़ा पहरा है। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां हैरान हैं कि बिश्नोई गैंग की एक्टिविटी कम नहीं हुई है। आमतौर पर अपराध के पीछे गरीबी या मजबूरी को वजह माना जाता है, लेकिन यहां मामला बिल्कुल उलटा है। जेल के भीतर से चल रहे इस खेल और उसके खर्चों ने जांच एजेंसियों को उलझा दिया है।

बालकरन बराड़ कैसे बना लॉरेंस बिश्नोई?
लॉरेंस का पारिवारिक बैकग्राउंड किसी आम अपराधी जैसा नहीं है। वह पंजाब के एक बड़े जमींदार परिवार का हिस्सा है। उसके चचेरे भाई रमेश बिश्नोई ने कुछ समय पहले बताया था कि पंजाब के फिरोजपुर जिले के अबोहर क्षेत्र में उनके परिवार के पास लगभग 110 एकड़ कृषि भूमि है। बाजार भाव के हिसाब से इस पुश्तैनी जमीन की कीमत करोड़ों में है।
पिता हरियाणा पुलिस में सिपाही
पिता के हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल होने के कारण परिवार को कभी वित्तीय संकट का सामना नहीं करना पड़ा। पंजाब यूनिवर्सिटी से एलएलबी की पढ़ाई के दौरान ही उसे महंगे इंटरनेशनल ब्रांड्स के कपड़ों और जूतों का शौक लगा गया था। छात्र राजनीति के दौर में ही उसने अपना स्कूल का नाम 'बालकरन बराड़' छोड़कर 'लॉरेंस' रख लिया था। चूंकि पिता लविंदर अपने नाम के साथ बिश्नोई लिखते थे, इसलिए उसने सरनेम हटाकर अपने समाज का नाम लगाना भी शुरू कर दिया।
जेल में कितना पैसा खर्च करता है लॉरेंस?
बिश्नोई साल 2015 से अलग-अलग जेलों में बद है। मगर उसके केस और लाइफस्टाइल पर परिवार लगातार पैसा खर्च कर रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया से की बातचीत में रमेश बिश्नोई ने बताया था कि, परिवार हर साल उसके लिए करीब 35 से 40 लाख रुपये भेजता है। अगर इसका औसत देखें तो यह करीब 3 लाख रुपये महीना बैठता है। यह फंड जेल के कानूनी खर्चों, वकीलों की भारी-भरकम फीस और उसकी व्यक्तिगत जरूरतों के लिए इस्तेमाल होता है। कोर्ट में पेशी के दौरान उसे अल्पाइनस्टार्स जैसी महंगी टी-शर्ट्स में देखा गया है, जो इस बात की तस्दीक करता है कि अंदर रहते हुए भी वह किसी न किसी तरह अपनी पुरानी आदतें बनाए हुए है।
कहां से पैसे कमाता है लॉरेंस?
जांच एजेंसियों की रिपोर्ट बताती है कि इस नेटवर्क की असली वित्तीय ताकत जबरन वसूली का धंधा है। भारत में जेल के नियमों के कारण पाबंलियां हैं, इसलिए कनाडा में बैठा गोल्डी बराड़ इस पूरे सिंडिकेट को जमीन पर संभालता है। यह नेटवर्क मुख्य रूप से बड़े बिल्डर्स, शराब कारोबारियों और फिल्म जगत के लोगों को निशाना बनाता है।
कितना पैसा है लॉरेंस के पास?
अक्टूबर 2024 में एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या और अभिनेता सलमान खान को दी गई धमकियों में इसी मॉड्यूल का नाम सामने आया। चूंकि यह पूरा पैसा हवाला और अवैध चैनलों के जरिए देश-विदेश में घूमता है, इसलिए इसकी कोई सटीक नेटवर्थ बताना नामुमकिन है।
हालांकि, एजेंसियों का मानना है कि इस सिंडिकेट का सालाना टर्नओवर करोड़ों रुपये का है, जिसकी संभावना 200 करोड़ या उससे भी ज्यादा हो सकती है। वहीं क्राइम बीट से जुड़े पत्रकार जो लॉरेंस से जुड़ी घटनाओं पर खबर लिखते रहे हैं उनके मुताबिक लॉरेंस की चल और अचल संपत्ति मिलाकर उसकी कुल कमाई 500 करोड़ के आस-पास बैठेगी।
जेल से इंटरव्यू और गैंग चलाना पड़ा महंगा
बिश्नोई की जेल से नेटवर्क ऑपरेट करने की क्षमता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाया था। उसके खिलाफ एक विशेष सुरक्षा आदेश लागू किया गया है, जिसके तहत उसे साबरमती जेल से बाहर निकालने या किसी अन्य राज्य की जेल में शिफ्ट करने पर पूरी तरह रोक है। इस पाबंली की अवधि को लगातार बढ़ाया जा रहा है ताकि उसे बाकी दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग किया जा सके और इस इंटरनेशनल शूटर नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों को समाप्त किया जा सके। इसके अलावा मार्च 2023 में ABP न्यूज के पत्रकार जगविंदर पटियाल को जेल के भीतर से मोबाइल द्वारा दिए लाइव इंटरव्यू के बाद लॉरेंस की और मुश्किलें बढ़ गईं थी।
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