कौन हैं कर्नाटक कृषि विभाग की अधिकारी पुष्पा? छापेमारी में घर से मिला अथाह सोने के गहने का ढेर और नकदी

Who is Agriculture Officer Pushpa: कर्नाटक में भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग को तेज करते हुए लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। लोकायुक्त की विशेष टीमों ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के संदेह में 10 वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। यह कार्रवाई राज्य के सात बड़े शहरों और जिलों में फैले कार्यालयों और आवासीय परिसरों में एक साथ शुरू की गई।

अधिकारियों के अनुसार, बेंगलुरु सिटी, बेंगलुरु साउथ, रायचूर, चित्रदुर्ग, तुमकुरु, शिवमोगा और कलबुर्गी में फैले इन अधिकारियों के ठिकानों पर सुबह-सुबह ही टीमें पहुंच गईं। इस छापेमारी में बेंगलुरू में तैनात महिला कृषि अधिकारी के घर से बेहिसाब सोने के गहने, चांदी के बर्तन और भारी मात्रा में नगदी बरामद हुई, जिसे देखकर लोकायुक्‍त की टीम भी हैरान हो गई। आइए समझते हैं क्‍या है पूरा मामला और कौन हैं ये अधिकारी जो इस छापेमारी के बाद सुर्खियों में आ चुकी है?

Lokayukta Raids

बता दें लोकायुक्त की इस छापेमारी के दौरान अधिकारियों को कई ठिकानों से बेहिसाब सोने के गहने, बेनामी संपत्ति के दस्तावेज, महंगी गाड़ियां और भारी मात्रा में नकदी मिली है। सभी संबंधित सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

कौन हैं ये कृषि अधिकारी पुष्‍पा? घर में मिला सोने-चांदी का ढेर

पुष्पा डी.आर. वर्तमान समय में कृषि विपणन विभाग में उप निदेशक के पद पर तैनात हैं। इस छापेमारी के बाद ये ज्यादा चर्चा में है। कृषि विभाग के सहायक कृषि अधिकारी के रूप में भी पहचानी जाने वाली पुष्पा के आवास पर जब लोकायुक्त की टीम ने धावा बोला, तो वहां जमा संपत्ति देखकर अधिकारी भी दंग रह गए।

घर पर मिले चमचमाते सोने के गहने, चांदी के बर्तन और नगदी

पुष्पा के घर से भारी मात्रा में चमचमाते हुए सोने के आभूषण, कीमती गहने और नकदी बरामद की गई है। बरामद किए गए सोने और नकदी का वास्तविक मूल्य इतना अधिक था कि इसका सही मूल्यांकन करने के लिए अधिकारियों को विशेष रूप से सरकारी सुनार को बुलाना पड़ा। घर में मौजूद कीमती सामान और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया अभी भी पूरी गहराई से जारी है।

लोकायुक्‍त के निशाने पर आए 10 अधिकारी कौन?

लोकायुक्त ने इस बार उन विभागों और अधिकारियों पर शिकंजा कसा है, जहां सीधे तौर पर सार्वजनिक धन और विकास कार्यों का बड़ा बजट शामिल होता है। इनमें लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, बिजली वितरण कंपनी और सिंचाई विभाग के प्रमुख चेहरे शामिल हैं। इन सभी अधिकारियों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने के बाद ही इस समन्वित कार्रवाई की योजना बनाई गई थी।

जांच को और अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए लोकायुक्त ने प्रत्येक अधिकारी के कार्यालयों और पैतृक निवासों पर भी टीमें भेजी थीं। नीचे दी गई तालिका में उन सभी 10 अधिकारियों के नाम, उनके वर्तमान पद और संबंधित विभागों का विवरण दिया गया है, जो इस बड़ी कार्रवाई के दायरे में आए हैं।

अधिकारी का नाम पदनाम विभाग और संबंधित स्थान

  • नरेंद्र कुमार कार्यकारी अभियंता लोक निर्माण विभाग (PWD), बेंगलुरु
  • प्रवीण बी. श्री हरि अधीक्षण अभियंता केआरआईडीएल, बेंगलुरु रेंज ऑफिस
  • पुष्पा डी. आर. उप निदेशक (प्रशासन) कृषि विभाग / एपीएमसी, बेंगलुरु
  • बसनगौड़ पाटिल कार्यकारी अभियंता कृष्णा भाग्य जल निगम लिमिटेड, रायचूर
  • डॉ. शंकर एम. असिस्टेंट प्रोफेसर कृषि अभियांत्रिकी यूनिवर्सिटी, चित्रदुर्ग
  • दुग्गप्पा बी. एच. रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (RFO) जलागम विकास विभाग, चित्रदुर्ग
  • मधुसूदन एन. सहायक अभियंता लघु सिंचाई विभाग, तुमकुरु
  • किरण अंगड़ी सहायक वन संरक्षक (ACF) वन अनुसंधान प्रभाग, शिवमोगा
  • अमृत राव सहायक कार्यकारी अभियंता जेसकॉम (GESCOM), कलबुर्गी
  • थिम्मे गौड़ा पंचायत विकास अधिकारी (PDO) कुंबलगोडु पंचायत, बेंगलुरु साउथ

लोकायुक्त की जांच का क्या होगा अगला कदम?

आय से अधिक संपत्ति के मामलों में लोकायुक्त की यह कार्रवाई सिर्फ जब्ती तक सीमित नहीं रहती। अधिकारियों के अनुसार, इस छापेमारी के बाद कानूनी प्रक्रिया का एक बहुत ही जटिल दौर शुरू होता है। सबसे पहले सभी बरामद संपत्तियों, जिनमें जमीन के दस्तावेज, बैंक खाते, फिक्स डिपॉजिट और आभूषण शामिल हैं, का उनके खरीद मूल्य और बाजार मूल्य के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है।

इसके बाद, आरोपी अधिकारियों को अपनी वैध आय के स्रोतों को साबित करने का अवसर दिया जाता है। उन्हें यह स्पष्ट करना होता है कि जो संपत्ति उनके पास मिली है, क्या वह उनकी वेतन और कानूनी रूप से अर्जित बचत के दायरे में आती है। यदि अधिकारी इन स्रोतों को साबित करने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय निलंबन और अदालत में आरोप पत्र दायर करने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। लोकायुक्त की टीमों द्वारा जब्त किए गए बैंक लॉकरों और संदिग्ध खातों को तुरंत प्रभाव से सील कर दिया गया है।

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