खान सर की क्रिमिनल हिस्ट्री से लेकर गार्ड के अवैध हथियार तक, किन 3 खुलासों ने बढ़ाई फैजल खान की टेंशन?
Khan Sir Criminal History: पटना के चर्चित कोचिंग विवाद मामले में खान सर उर्फ फैजल खान को लेकर बुधवार को बड़ा अपडेट सामने आया। जिला अदालत में सुबह 10:30 बजे हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में 10 जुलाई को आदेश सुनाया जाएगा।
बुधवार की सुनवाई में बचाव पक्ष ने अदालत के सवालों का जवाब दिया, जबकि रौशन आनंद पक्ष पहले लगाए गए आरोपों पर कायम रहा। इससे पहले मंगलवार को कोर्ट ने खान सर की कथित क्रिमिनल हिस्ट्री से जुड़े रिकॉर्ड मांगे थे। वहीं, पुलिस की ओर से केस डायरी में जोड़ी गई नई जानकारियों पर भी चर्चा हुई। ऐसे में अब सभी की नजर 10 जुलाई को आने वाले फैसले पर है, क्योंकि इसी दिन यह साफ होगा कि खान सर को अग्रिम जमानत मिलती है या नहीं।

क्रिमिनल हिस्ट्री पर बचाव पक्ष ने दी सफाई
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि जिस पुराने मामले का जिक्र किया जा रहा है, उसमें पुलिस काफी पहले अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर चुकी थी। इसी वजह से उस केस का उल्लेख जमानत याचिका में नहीं किया गया। बचाव पक्ष का कहना था कि किसी तथ्य को जानबूझकर नहीं छिपाया गया। इससे पहले मंगलवार की सुनवाई में रौशन आनंद की ओर से पेश अधिवक्ता सत्या झा ने दावा किया था कि खान सर ने अपनी क्रिमिनल हिस्ट्री अदालत से छिपाई है। इसी दलील के बाद कोर्ट ने संबंधित रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया था। बुधवार की सुनवाई में इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों ने अपना-अपना पक्ष रखा।
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7 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान जिला जज रूपेश देव की अदालत में करीब 40 मिनट तक बहस चली थी। उसी दौरान कोर्ट ने खान सर की अग्रिम जमानत के साथ-साथ जेल में बंद उनके दोनों गार्ड प्रदीप कुमार और तालेबर सिंह की नियमित जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई की थी। अदालत ने कुछ अतिरिक्त दस्तावेज और रिकॉर्ड भी मांगे थे।

गार्डों के हथियार और लाइसेंस जांच में हुए नए खुलासे
पुलिस की जांच में सामने आया कि फायरिंग में इस्तेमाल होने का आरोप जिस हथियार पर है, वह तालेबर सिंह के नाम दर्ज है। पुलिस का कहना है कि उसके लाइसेंस का परमिट पूरे देश में मान्य नहीं था, फिर भी वह बिहार में हथियार के साथ सुरक्षा ड्यूटी कर रहा था। यह जानकारी अपडेटेड केस डायरी में शामिल की गई है। जांच एजेंसी का यह भी कहना है कि बिहार में हथियार लेकर ड्यूटी करने की सूचना स्थानीय प्रशासन, संबंधित थाने या आर्म्स मजिस्ट्रेट को नहीं दी गई। पुलिस ने यह आरोप भी जोड़ा है कि तालेबर सिंह का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया गया था।
जांच के दौरान प्रदीप कुमार के लाइसेंस की भी पड़ताल की गई। पुलिस के अनुसार उसका लाइसेंस उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से जारी हुआ था और पूरे भारत में मान्य है। हालांकि जांच एजेंसी का दावा है कि यह लाइसेंस आत्मरक्षा के उद्देश्य से जारी किया गया था, जबकि इसका इस्तेमाल निजी सुरक्षा ड्यूटी में किया गया। पुलिस ने इस पहलू को भी केस डायरी में शामिल किया है।
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