Land for Job Scam: एप्लीकेशन के 3 दिन बाद जॉइनिंग,करोड़ों की जमीन कौड़ियों के भाव, लालू परिवार का 7 डील वाला खेल
Land for Job Scam: बिहार की राजनीति में भूचाल लाने वाला 'नौकरी के बदले जमीन' (Land for Job Scam) मामला अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती और अन्य 41 आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने अपनी सख्त टिप्पणी में इस पूरे प्रकरण को एक सुनियोजित 'सिंडिकेट' की तरह संचालित बताया है।
सीबीआई (CBI) की जांच में दावा किया गया है कि लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे के विभिन्न जोन में बिना किसी विज्ञापन या पारदर्शी प्रक्रिया के लोगों को ग्रुप-डी की नौकरियां दी गईं। इसके बदले में अभ्यर्थियों और उनके परिवारों से कौड़ियों के भाव बेशकीमती जमीनें लिखवाई गईं। यह मामला न केवल एक परिवार की कानूनी लड़ाई है, बल्कि भारतीय राजनीति और सत्ता के दुरुपयोग की गहरी पड़ताल भी है।

'निजी जागीर' की तरह इस्तेमाल हुआ मंत्रालय
9 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई में विशेष न्यायाधीश ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि रेल मंत्रालय को उस दौरान एक 'निजी जागीर' की तरह चलाया गया। कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और हेमा यादव समेत कुल 41 लोगों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत केस चलाने की मंजूरी दे दी है। हालांकि, सबूतों के अभाव में 52 अन्य लोगों को राहत भी दी गई है।
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कैसे शुरू हुई जांच? 3.75 लाख की जमीन और 3 नौकरियां
इस घोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब पटना के किशुन देव राय का मामला सामने आया। 6 फरवरी 2008 को किशुन देव ने अपनी 3,375 वर्ग फीट जमीन बाजार भाव से कहीं कम, महज 3.75 लाख रुपए में राबड़ी देवी के नाम कर दी। सौदे के तुरंत बाद किशुन देव के परिवार के तीन सदस्यों को मुंबई स्थित मध्य रेलवे में नौकरी मिल गई। यहीं से जांच एजेंसियों को भ्रष्टाचार के ठोस संकेत मिले।
4.39 करोड़ की जमीन सिर्फ 26 लाख में
CBI के अनुसार, 2004 से 2009 के बीच लालू परिवार ने भ्रष्टाचार के जरिए बिहार में एक लाख वर्ग फीट से ज्यादा जमीन हासिल की।
- कीमत का अंतर: जिस जमीन की बाजार कीमत उस समय लगभग 4.39 करोड़ रुपए थी, उसे सिर्फ 26 लाख रुपए में हथिया लिया गया।
- बिना विज्ञापन भर्ती: मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर जैसे रेलवे जोन में नियुक्तियों के लिए कोई आधिकारिक विज्ञापन नहीं निकाला गया।
- तीन दिन में जॉइनिंग: कुछ मामलों में तो आवेदन देने के मात्र 3 दिन के भीतर ही नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए।
सात जमीन सौदों में छिपा 'भ्रष्टाचार का मॉडल'
जांच एजेंसी ने कोर्ट के सामने सात ऐसे प्रमुख सौदों का जिक्र किया है, जो इस घोटाले की कार्यप्रणाली को स्पष्ट करते हैं:
- किशुन देव राय: जमीन के बदले परिवार के 3 सदस्यों को नौकरी मिली।
- संजय राय: 3.75 लाख में जमीन दी, बदले में परिवार के 2 लोगों को रेलवे में काम मिला।
- किरण देवी: मीसा भारती को जमीन बेची, अगले साल बेटे का चयन रेलवे में हो गया।
- निजी कंपनी का खेल: हजारी राय की जमीन पहले 'एके इन्फोसिस्टम्स' जैसी कंपनी को दी गई, जिसका नियंत्रण बाद में लालू परिवार के पास आ गया।
- लाल बाबू राय: बेटे को 2006 में नौकरी मिली और 2015 में जमीन राबड़ी देवी के नाम की गई।
- गिफ्ट डीड: एक कर्मचारी ने नौकरी मिलने के बाद 62 लाख की जमीन लालू परिवार को 'गिफ्ट' कर दी।
- हेमा यादव: रेलवे में नौकरी मिलने के कुछ समय बाद जमीन लालू यादव की बेटी हेमा यादव के नाम ट्रांसफर की गई।
ED की कार्रवाई और 600 करोड़ की संपत्ति
इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक लगभग 600 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति को चिह्नित या जब्त किया है। इसमें दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित पॉश बंगला भी शामिल है। CBI का दावा है कि कई जमीनों को महज 5,700 रुपए जैसी मामूली रकम पर तेजस्वी और तेज प्रताप यादव के नाम किया गया था, जबकि उस समय वे नाबालिग थे। आरोप तय होने के बाद अब 29 जनवरी 2026 से इस मामले का औपचारिक ट्रायल शुरू होगा।
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