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Land For Job Case: लालू परिवार पर शिकंजा, राबड़ी, तेजस्वी, तेजप्रताप समेत 41 पर आरोप तय, अब जाना होगा जेल!

Land For Job Case Update: पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को 'लैंड फॉर जॉब स्कैम' मामले में अदालत से बड़ा झटका लगा है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार (09 जनवरी) को मामले में पुख्ता सबूतों का हवाला देते हुए लालू यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और हेमा यादव के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इस केस में 41 आरोपियों पर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 13(2), 13(1)(d) के तहत मुकदमा चलेगा, जबकि कोर्ट ने 52 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है।

कोर्ट ने साफ कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत यह संकेत देते हैं कि सरकारी नौकरियां देने के बदले जमीन लेने की एक सुनियोजित योजना बनाई गई थी। अब कोर्ट जल्द ही इनके खिलाफ सजा सुना सकती है और इन्हें इस मामले में जेल की सजा हो सकती है। हालांकि चार्ज फ्रेम करने की प्रक्रिया 29 जनवरी 2026 को पूरी की जाएगी।

Land For Job Case Update

राउज एवेन्यू कोर्ट के मुताबिक, चार्जशीट में यह बात सामने आई है कि लालू यादव के करीबी सहयोगियों ने इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभाई। नौकरी दिलाने के बदले जमीन अपने नाम या परिजनों के नाम करवाने में सह-साजिशकर्ता के तौर पर काम किया गया। कोर्ट ने माना कि यह सिर्फ अलग-अलग फैसलों का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित तरीके से चलाया गया पूरा सिस्टम था।

चार्ज फ्रेम करने की प्रक्रिया 29 जनवरी को: एडवोकेट अजाज अहमद

एडवोकेट अजाज अहमद ने बताया कि सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू प्रसाद यादव, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और हेमा यादव के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 120बी और 13 के तहत आरोप तय कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि मामले में औपचारिक रूप से चार्ज फ्रेम करने की प्रक्रिया 29 जनवरी को पूरी की जाएगी।

41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय, 52 को सबूतों के अभाव में बरी करने का आदेश

लालू परिवार की ओर से दाखिल डिस्चार्ज याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस केस में पद का दुरुपयोग और गहरी साजिश के साफ संकेत मिलते हैं। अदालत का मानना है कि सरकारी पदों का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए किया गया और इसके बदले जमीनें हासिल की गईं।

इस मामले में कुल 41 आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) और 13(1)(d) के तहत आरोप तय किए जाएंगे। वहीं, 52 अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में कोर्ट ने बरी करने का आदेश दिया है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़े शब्दों में कहा कि लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ व्यापक साजिश के संकेत नजर आते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मानना गलत होगा कि परिवार को इस मामले में राहत दी जानी चाहिए, क्योंकि उपलब्ध सबूत एक सोची-समझी भ्रष्टाचार की कहानी बयान करते हैं।

लालू परिवार का अब आगे क्या होगा?

अदालत के इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि लालू परिवार की कानूनी लड़ाई अब जल्दी खत्म होने वाली नहीं है। जहां एक ओर कोर्ट ने 52 आरोपियों को डिस्चार्ज कर राहत दी है, वहीं मुख्य आरोपियों समेत 41 लोगों के खिलाफ अब ट्रायल चलेगा।

कोर्ट ने शुरुआती सबूतों को देखते हुए यह मान लिया है कि लालू प्रसाद यादव के खिलाफ लगाए गए आरोपों में दम है। इसी आधार पर अब इस मामले में नियमित ट्रायल शुरू होगा। ट्रायल के दौरान दोनों पक्ष अपनी दलीलें और सबूत पेश करेंगे, जिसके बाद अदालत अंतिम फैसला सुनाएगी।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) की गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय होने से यह मामला अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। आने वाले दिनों में अदालत में सबूतों और गवाहों के आधार पर तय होगा कि आरोप कितने मजबूत साबित होते हैं और आगे की कार्रवाई किस दिशा में जाती है।

लालू यादव के पास क्या विकल्प हैं?

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव निचली अदालत के इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं। इसके लिए उनके पास ऊपरी अदालत में अपील करने का कानूनी विकल्प मौजूद है, जहां वह चार्ज फ्रेम होने के आदेश के खिलाफ राहत की मांग कर सकते हैं।

क्या है लैंड फॉर जॉब स्कैम केस? (What Is Land For Job Scam)

  • CBI के मुताबिक, यह कथित घोटाला वर्ष 2004 से 2009 के बीच हुआ, जब लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे।
  • आरोप है कि इस अवधि में रेलवे के अलग-अलग जोनों - मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर - में बिहार के लोगों को ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियां दी गईं।
  • जांच एजेंसी का दावा है कि ये नौकरियां मेरिट के बजाय निजी फायदे के बदले दी गईं।
  • आरोप के अनुसार, नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों या उनके परिजनों ने बदले में अपनी जमीन लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों को सौंपी।
  • कुछ जमीनें एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के नाम ट्रांसफर की गईं, जिस पर बाद में लालू परिवार के सदस्यों का नियंत्रण बताया गया।
  • CBI का कहना है कि ज्यादातर मामलों में नौकरी मिलने से पहले ही जमीन का ट्रांसफर कर दिया गया था।
  • कई सौदों में जमीन की गिफ्ट डीड पहले ही तैयार कर ली गई थी।
  • आरोप पत्र में यह भी कहा गया है कि उस समय लालू यादव के करीबी भोला यादव गांव-गांव जाकर लोगों से कहते थे कि नौकरी के बदले जमीन लालू परिवार के नाम लिखनी होगी।
  • जमीन ट्रांसफर करने वाले लोगों का दावा है कि उन्हें इसके बदले लालू परिवार की ओर से नकद भुगतान किया गया था।
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