Kolkata Doctor Case: कपिल सिब्बल पर कोलकाता कांड में क्या लग रहे हैं आरोप?
Kolkata Doctor Case: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ट्रेनी महिला डॉक्टर के साथ बर्बरता के साथ रेप और जघन्य हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन में ही विवाद छिड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल पर इसके पूर्व अध्यक्ष ने अपने पद का इस्तेमाल करके जांच प्रभावित करने तक के आरोप लगा दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के पूर्व अध्यक्ष आदिश चंद्र अग्रवाल ने कपिल सिब्बल पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इस घटना की जघन्नता कमतर करने की कोशिश की है और अपने पद का इस्तेमाल करते हुए इस घटना की जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया है।

एससीबीए के पूर्व प्रेसिडेंट ने कपिल सिब्बल को घेरा
सिब्बल को लिखी चिट्ठी में अग्रवाल ने कहा है कि उनकी तरफ से इस घटना को लेकर बार एसोसिएशन का जो प्रस्ताव पारित किया गया है, वह बिना इसकी एग्जिक्यूटिव कमेटी की सहमति के पारित किया गया है और वह अनधिकृत है। अग्रवाल का कहना है कि वह प्रस्ताव एससीबीए का सामूहिक फैसला न होकर सिब्बल का निजी नजरिया प्रतीत होता है।
बिना एग्जिक्यूटिव कमेटी की सहमति के प्रस्ताव पारित करने का आरोप
एग्जिक्यूटिव कमेटी के कई अन्य सदस्यों की ओर से इसके प्रति हैरानी जताने का दावा करते हुए अग्रवाल ने सिब्बल से कहा है, 'हम संबंधित मामले पर एग्जिक्यूटिव कमेटी के किसी विचार-विमर्श से अवगत नहीं हैं, जिसके परिणामस्वरूप ऐसा कोई प्रस्ताव पारित हुआ हो।'
सिब्बल पर लगाया कंफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट का आरोप
अग्रवाल ने इस बात का भी जिक्र किया है कि इस केस में सिब्बल पश्चिम बंगाल सरकार के वकील भी हैं और इस आधार पर उन्होंने राज्यसभा सांसद पर कंफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट (एक ऐसी स्थिति जिसमें पदधारी शख्स का फैसला उसकी व्यक्तिगत रूचि से प्रभावित हो) का भी आरोप लगाया है।
सिब्बल पर जांच को प्रभावित करने की कोशिश का भी आरोप लगाया है
उनका दावा है कि ऐसा करके सिब्बल ने एससीबीए की अखंडता से समझौता किया है और यह संभावित तौर पर सुप्रीम कोर्ट और सीबीआई की जांच को प्रभावित कर सकता है। उनका तर्क है कि इससे चिकित्सा और कानूनी समुदाय को बहुत बड़ा धक्का लगा है और एससीबीए की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है।
'हम भयानक घटना की निंदा करते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं'
उनके मुताबिक, 'हम अधोहस्ताक्षरी (खत के नीचे हस्ताक्षर करने वाले लोग) यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि हम इस भयानक घटना की कड़ी निंदा करते हैं... और हम पीड़ितों, परिवार और डॉक्टरों के साथ एकजुटता से खड़े हैं, जो न्याय की मांग कर रहे हैं।'
सिब्बल से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग
इतना ही नहीं एक्स पर अपने पोस्ट पर उन्होंने सिब्बल को यह भी चेतावनी दी है कि वह अपना 'गैर-कानूनी और अनधिकृत' प्रस्ताव वापस ले लें और सार्वजनिक रूप से माफी मांगे, नहीं तो उन्हें अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ेगा।
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दरअसल, कपिल सिब्बल एक तरफ तो बंगाल सरकार की ओर से सर्वोच्च अदालत में केस की पैरवी भी कर रहे हैं और दूसरी ओर देश को दहला देने वाली इस घटना के बारे में बार एसोसिएशन की ओर से यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि यह 'Systematic Malice' (व्यवस्थित द्वेष) या भारत में घट रही ऐसी अन्य सामान्य घटनाओं की तरह का मामला है। (इनपुट-एएनआई)












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