जानिए कितनी खतरनाक है भारत की सबसोनिक मिसाइल निर्भय
बेंगलुरु (डा. अनंत कृष्णन एम)। भारत की पहली देसी सबसोनिक मिसाइल निर्भय लॉन्च हो चुकी है। इस मिसाइल को ओडिशा के चांदीपुर के पास बालासोर से दागा गया। निर्भय का निर्माण बेंगलुरु में किया गया है और इसकी क्षमता 800 से 1000 किलोमीटर तक है। इस मिसाइल का निर्माण भरतीय अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट इस्टैबलिशमेंट एडीई के बेंगलुरु लैबोरेटरी में किया है। प्रस्तुत है वनइंडिया की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट, जिसमें हम आपको बताने जा रहे हैं कि यह मिसाइल दुश्मन के लिये कितनी खतरनाक साबित हो सकती है।

सबसे पहले बात करते हैं लॉन्चिंग की, जिसके लिये फ्लाइट ऑथराइजेशन बोर्ड के तमाम अधिकारियों की बैठकों का अंतिम दौर अब खत्म हो चुका है। मिसाइल ओडिशा के चांदीपुर बालासोर में किया जायेगा। बैठक में तय हो चुका है कि कल सुबह 10 बजे लॉन्च की जाने वाली मिसाइल को अंतिम क्षणों में कैसे ट्रीट करना है। मौसम समेत कई सारी चीजें हैं जिन्हें अंतिम समय में चेक किया जायेगा और उसी के आधार पर मिसाइल को सेट किया जायेगा।
मिसाइल निर्भय से जुड़ी रोचक बातें इस प्रकार हैं
- भारत की सभी मिसाइलों का निर्माण हैदराबाद में डीआरडीओ मिसाइल कॉम्प्लेक्स में होता है, लेकिन निर्भय का निर्माण बैंगलोर में हुआ है।
- यही पर एरियल कंट्रोल हैं लक्ष्य, निशांत और रुस्तम का निर्माण किया गया और ये सभी मानवरहित हैं।
- लॉन्चिंग के पहले जितने भी टेस्ट हुए उनमें 500 से 600 मिली सेकेंड्स का फर्क दर्ज हुआ।
- कल की लॉन्चिंग के पूरी तरह सफल होने की पूरी संभावना व्यक्त की गई है। इसमें इनर्शियल नेवीगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है।
- निर्भय अपनी रेंज में आने वाले दुश्मन जहाजों और अन्य चीजों को पूरी तरह नष्ट करने में सक्षम होगी।
- वर्तमान तैयारी के अनुसार मिसाइल 300 किलोमीटर तक जायेगी और फिर 100 से 150 की रेंज में ल्वाइटर में लौट आयेगी।
- यह मिसाइल अपने साथ परमाणु सामग्री ले जा सकती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- नाम: निर्भय
- अर्थ: निडर
- टाइप: टू-स्टेज सबसोनिक क्रूज़ मिसाइल
- रेंज: 800-1000 किलोमीटर
- लंबाई: 6 मीटर
- व्यास: 0.52 मीटर
- विंग स्पैन: 2.7 मीटर
- वजन: करीब 1,500 किलोग्राम
- फीचर: परमाणु क्षमता से युक्त
- गति: 0.7 Mach
- कीमत: करीब 10 करोड़ प्रति मिसाइल
- विकसित किया: एडीई बेंगलुरु ने
क्या बोले एयरोनॉटिकल सिस्टम के डीजी
डीआरडीओ के एयरोनॉटिकल सिस्टम के डीजी डा. के तमिलमणि ने कहा कि निर्भय की सफलता के बाद हमारे वैज्ञानिकों का मनोबल और बढ़ेगा और इसके बड़े वर्जन बनाने के लिये प्रेरणा भी। निर्भय आगे चलकर एक स्मार्ट हथियार साबित होगी।
(लेखक वरिष्ठ एयरोस्पेस एवं डिफेंस जर्नलिस्ट हैं, जो मिलिट्री ब्लॉग तरमक007 पर लिखते हैं। लेखक वनइंडिया के कंसल्टिंग एडिटर हैं।)












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