कावेरी विवादः वो सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं
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सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 115 साल से चल रहे कावेरी विवाद को सुलझा दिया है. कोर्ट ने शुक्रवार को अपने फैसले में तमिलनाडु के पानी का हिस्सा घटा दिया है.
यह विवाद कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुद्दुचेरी के बीच पानी के हिस्से को लेकर था. आखिर ये विवाद कब शुरू हुआ था और इसके पीछे की वजह क्या थी? आइए आपको बताते हैं.
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कावेरी विवाद
- 1924 में मैसूर रियासत ने सिंचाई के लिए कृष्ण राजा सागर बांध बनाने का फैसला किया, जिसका मद्रास रियासत ने विरोध किया. दोनों के बीच समझौता हुआ कि 75 फीसदी पानी तमिलनाडु और पद्दुचेरी को, 23 फ़ीसदी कर्नाटक को और 2 फीसदी केरल को दिया जाएगा.
- बाद के दशकों में जब भी तमिलनाडु को पानी की कमी हुई, कर्नाटक और तमिलनाडु के मुख्यमंत्रियों की बीच बातचीत हुई और पानी दिया गया. जब भी विवाद नहीं सुलझता था, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पीवी नरसिम्हा राव मामले में हस्ताक्षेप करते थे और कर्नाटक को पानी मिलता था.
- लेकिन धीरे-धीरे कावेरी में पानी घटता चला गया और तमिलनाडु में एआईडीएमके सत्ता में आई. इसके बाद बातचीत के दौर असफल होने लगे. केंद्र में प्रधानमंत्री रहे पीवी नरसिम्हा राव ने साल 1990 में विवाद सुलझाने के लिए ट्रिब्यूनल की मांग की.
- फरवरी 1991 में ट्रिब्यूनल ने अपने अंतरिम आदेश में तमिलनाडु को 205 टीएमसी फीट पानी देने को कहा.
- नाखुश कर्नाटक इसके खिलाफ एक कानून लेकर आया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल का फैसला कायम रखा और कर्नाटक को पानी छोड़ने को कहा.
- कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री एस बंगारप्पा ने शुरू में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने से इंकार कर दिया, पर बाद में उन्हें पानी छोड़ना पड़ा. विवाद के चलते हुई हिंसक घटनाओं में 18 लोगों की मौत हो गई. करीब दो हजार तमिल भाषी लोग बेंगलुरु छोड़कर चले गए. बाद में वो वापस आए.
- कर्नाटक से अधिक पानी की मांग को लेकर तमिलनाडु के एमजी रामाचंद्रन और जयललिता जैसे मुख्यमंत्री भूख हड़ताल पर भी बैठे थे.
- साल 1998 में प्रधानमंत्री की अगुवाई में कावेरी नदी प्राधिकरण की स्थापना की गई. साल 2007 में प्राधिकरण ने अंतिम फैसला लिया.
- प्राधिकरण ने कावेरी बेसिन में 740 टीएमसी फीट पानी पाया और तमिलनाडु को 419, कर्नाटक को 270, केरल को 30 और पुद्दुचेरी को 7 टीएमसी फीट पानी देने का फैसला किया.
- तमिलनाडु और कर्नाटक, दोनों इस फैसले से नाराज थे. कर्नाटक सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया और न्याय की मांग की.
- तमिलनाडु भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. कर्नाटक का कहना था कि उन्हें आवश्यकता के अनुसार पानी नहीं मिलता है, जिससे कृषि कार्यों में परेशानी होती है.
- केंद्र सरकार ने कावेरी प्रबंधन बोर्ड बनाने की बात कही पर इसे लागू नहीं किया जा सका. दोनों राज्य इसके समर्थन में नहीं थे. अंततः ये विवाद सुप्रीम कोर्ट के पाले में गया और अब कोर्ट ने अपने फैसले में तमिलनाडु के पानी का हिस्सा घटा दिया है.
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