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West Bengal: चुनाव से पहले कर्मचारियों को DA बकाया, पुजारियों-मुअज्जिनों को भत्ता, चुनाव आयोग ने अब दिया जवाब

West Bengal DA Hike: पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव से पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ममता बनर्जी ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ता (DA) के बकाये को जारी करने का ऐलान कर दिया है।

खास बात यह रही कि यह घोषणा ठीक उस समय हुई जब चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखों का ऐलान करने वाला था। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से करीब एक घंटे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह बड़ा फैसला सार्वजनिक किया। बंगाल में चुनाव दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को है वोटों की गिनती 4 मई 2026 को होगी।

West Bengal DA Hike
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कर्मचारियों और पेंशनरों को मिलेगा DA बकाया (DA Arrears for Employees and Pensioners)

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों, पेंशनरों और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े लाखों शिक्षकों व गैर-शिक्षण कर्मचारियों से किया गया वादा पूरा करने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि वेतन और भत्तों का संशोधन"(ROPA) 2009 के तहत लंबित DA बकाये का भुगतान मार्च 2026 से शुरू किया जाएगा।

यह फैसला केवल राज्य सचिवालय तक सीमित नहीं रहेगा। पंचायत, नगर निकायों और अन्य अनुदान प्राप्त संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को भी इसका लाभ मिलेगा। लंबे समय से सरकारी कर्मचारी इस बकाये को जारी करने की मांग कर रहे थे, इसलिए सरकार के इस कदम को चुनावी साल में बड़ा सियासी संदेश माना जा रहा है।

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चुनाव आयोग ने इसपर क्या कहा?

महंगाई भत्ता (DA) के बकाये को जारी करने के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने कहा,"मैं यह साफ करना चाहता हूं कि आदर्श आचार संहिता अब से लागू हो गई है। इसलिए आचार संहिता लागू होने से पहले जो भी फैसले या कार्रवाई संबंधित सरकार ने की है, वह उसका अधिकार क्षेत्र है। लेकिन अब से सभी राजनीतिक दलों और सरकारों पर आदर्श आचार संहिता का पूरी तरह पालन करना अनिवार्य होगा।"

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई प्रक्रिया (Supreme Court Order on DA Dues)

दरअसल, राज्य सरकार के खिलाफ कर्मचारियों के एक समूह ने DA बकाये को लेकर Supreme Court of India में याचिका दायर की थी। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह अपने कर्मचारियों के कम से कम 25 प्रतिशत DA बकाये का भुगतान 31 मार्च 2026 तक करे। इसी आदेश के बाद सरकार ने बकाया जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया है।

पुजारियों और मुअज्जिनों का भत्ता भी बढ़ा (Honorarium Hike for Priests and Muezzins)

चुनावी घोषणा से कुछ ही मिनट पहले मुख्यमंत्री ने एक और अहम फैसला किया। उन्होंने राज्य के मंदिरों के पुजारियों और मस्जिदों के मुअज्जिनों के मासिक मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया। इस संशोधन के बाद अब उन्हें हर महीने 2,000 रुपये का मानदेय मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पुजारियों और मुअज्जिनों की ओर से जो नए आवेदन राज्य सरकार को भेजे गए थे, उन्हें भी मंजूरी दे दी गई है। इससे कई नए लाभार्थियों को भी इस योजना का फायदा मिलेगा।

पुलिस महकमे में भी फेरबदल

इन घोषणाओं के साथ ही राज्य के गृह विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर भी कदम उठाया है। विभाग ने चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले 27 पुलिस अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। इसे चुनाव से पहले प्रशासनिक तैयारियों के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।

चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल

चुनाव की तारीखों की घोषणा से ठीक पहले किए गए इन फैसलों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ सरकारी कर्मचारियों और धार्मिक समुदायों से जुड़े लोगों को सीधा लाभ देने वाले फैसले सामने आए हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इन घोषणाओं को चुनावी रणनीति के तौर पर देख रहा है।

अब जब राज्य में चुनावी माहौल पूरी तरह बन चुका है, तो आने वाले दिनों में ऐसे और भी राजनीतिक फैसले और घोषणाएं देखने को मिल सकती हैं। पश्चिम बंगाल की सियासत में यह साफ दिख रहा है कि चुनावी मुकाबला इस बार बेहद दिलचस्प होने वाला है।

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