MP News: सीहोर का खामलिया गांव जल संकट से खाली होने लगा, पानी के लिए सैकड़ों परिवार छोड़ रहे घर
Water crisis in Sehore: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के खामलिया गांव में भीषण जल संकट ने ग्रामीणों की जिंदगी को संकट में डाल दिया है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि सैकड़ों ग्रामीण गांव छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। गांव के कई घरों पर ताले लटक गए हैं और आधा गांव अब सुनसान नजर आने लगा है। पानी की कमी के कारण कुछ परिवार शहरों की ओर मजदूरी के लिए पलायन कर चुके हैं, जबकि कई लोग अपने खेतों में अस्थायी टेंट लगाकर रहने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मार्च 2026 की शुरुआत होते ही गांव के कुएं, बोरवेल और हैंडपंप पूरी तरह सूख गए। नल-जल योजना भी बंद पड़ी है, जिससे गांव में पानी की समस्या और गहरा गई है।

महिलाओं और बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
जल संकट का सबसे ज्यादा असर गांव की महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। पानी लाने के लिए उन्हें 3 से 4 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है। कई बार एक दिन में कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। गांव की रहने वाली राधा बाई ने बताया कि पानी के लिए रोज संघर्ष करना पड़ रहा है। "बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, पशु प्यास से मर रहे हैं। ऐसे में हमें मजबूरी में गांव छोड़ना पड़ा। हमने घर पर ताला लगाया और शहर की ओर निकल गए।"
पानी की कमी के कारण गांव का सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
500 परिवारों में से 50 से ज्यादा कर चुके पलायन
ग्राम पंचायत के अनुसार खामलिया गांव में करीब 500 परिवार रहते थे, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। अब तक 50 से ज्यादा परिवार गांव छोड़ चुके हैं, जबकि कई अन्य परिवार भी पलायन की तैयारी में हैं।
आधा गांव खाली होने की वजह से गांव का सामाजिक ढांचा भी प्रभावित हो रहा है। स्कूलों में बच्चों की संख्या घट गई है, आंगनवाड़ी केंद्रों में गतिविधियां कम हो गई हैं और गांव की छोटी-मोटी दुकानें भी बंद होने लगी हैं।

मंत्री के आदेश के बाद भी नहीं हुआ काम
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पानी की समस्या को लेकर कई बार प्रशासन से गुहार लगाई है। उन्होंने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपे।
ग्रामीणों के अनुसार, इस मामले में मंत्री स्तर तक शिकायत पहुंची थी और विभाग के अधिकारियों को नए नलकूप (बोरवेल) खनन कराने के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद अब तक जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों की टालमटोल के कारण गांव की स्थिति और खराब होती जा रही है।
प्रशासन का दावा: टैंकर से दी जा रही राहत
जिला प्रशासन का कहना है कि जल संकट को गंभीरता से लिया जा रहा है और गांव में टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही नए बोरवेल के प्रस्ताव पर भी काम चल रहा है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि टैंकरों से मिलने वाला पानी न तो पर्याप्त है और न ही नियमित, जिससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।
पूरे जिले में गिर रहा भूजल स्तर
विशेषज्ञों के अनुसार सीहोर जिले के कई गांवों में इस साल गर्मी की शुरुआत से ही भूजल स्तर तेजी से गिरा है। खामलिया के अलावा बिशनखेड़ी और लोहागल जैसे गांवों में भी पानी की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। कई जगहों पर जलस्तर 200 फीट से नीचे चला गया है, जिससे हैंडपंप और बोरवेल भी सूख चुके हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
जल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते वर्षा जल संचयन, नए नलकूप और जल संरक्षण के उपाय नहीं किए गए तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार अनियंत्रित बोरवेल खनन और जल संरक्षण की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का संकट लगातार बढ़ रहा है।
ग्रामीणों की सरकार से अपील
खामलिया गांव के सरपंच और ग्रामीणों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav और संबंधित विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही नलकूप खनन और स्थायी जल व्यवस्था नहीं की गई तो पूरा गांव खाली हो सकता है। ग्रामीणों की अपील है कि सरकार और प्रशासन जल्द ठोस कदम उठाए ताकि गांव को उजड़ने से बचाया जा सके।
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