कोविड-19 की रिपोर्टिंग मामले में कर्नाटक गंवा सकता है अपना शीर्ष स्थान, 3000 से अधिक कोरोना संक्रमित मरीज लापता
नई दिल्ली। कोरोना वायरस के सही आंकड़ों को इकट्ठा करना सरकारों के लिए सबसे अहम चुनौती है। देश में हर राज्य अलग-अलग कोरोना के आंकडे़ जारी करता है, जबकि केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग अलग एक रिपोर्ट जारी करता है जिसमे कोरोना संक्रमितों के आकंड़े साझा किए जाते हैं। देश अलग-अलग राज्यों की बात करें तो आंकड़ों की जानकारी देने के मामले में 1 जून तक कर्नाटक सबसे शीर्ष पर था। लेकिन अब इस लिस्ट में कर्नाटक पिछड़ता नजर आ रहा है और माना जा रहा है कि कर्नाटक की रैंकिंग इस मामले में नीचे जा सकती है।

21 जुलााई को स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च स्टडी में देश के 29 राज्यो द्वारा कोरोना को लेकर जारी किए जा रहे आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। इसमे कहा गया है कि महामारी को रोकने का सबसे अहम हथियार लोगों को जागरूक करना और सरकार के प्रति लोगों का विश्वास पैदा करना है, इस लक्ष्य में सरकार द्वारा कोरोना को लेकर जारी किए जाने वाले आंकड़े अहम भूमिका निभाते हैं। 18 मई से 1 जून के बीच आंकड़ों की तुलना करने पर कर्नाटक को 0.6 स्कोर हासिल हुआ था। लेकिन अब अधिकतर विशेषज्ञों का मानना है कि कर्नाटक सरकार कोरोना के मामलों को ट्रेस करने में सफल नहीं हो रही है। तकरीबन 3000 कोरोना संक्रमित मरीज लापता हैं। इसकी एक बड़ी वजह है कि कोरोना के लिए तैयार किए गए वॉर रूम बेहतर समन्वय स्थापित नहीं कर पा रहा है।
बता दें कि मंगलवार को कर्नाटक में कोरोना से मरने वालों की संख्या दो हजार को पार कर गई। प्रदेश में एक दिन में सर्वाधिक 5536 नए मामले सामने आए। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रदेश में अब कोरोना के कुल 107001 मामले हो गए हैं। जबकि प्रदेश में 2055 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। बेंगलुरू में कोरोना के 1898 मामले हैं। बता दें कि लगातार पांच दिन से कर्नाटक में हर रोज पांच हजार से अधिक कोरोना संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं। प्रदेश में कोरोना से मृत्यु दर 1.92 फीसदी है, जबकि ठीक होने वालों का प्रतिशत 37.85 फीसदी है।












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