Jyotiraditya Scindia: पिता के सपनों को बुलंदियों पर पहुंचाने की है ख्वाहिश, सामने हैं ये चुनौतियां

नई दिल्ली, 9 जुलाई: मोदी सरकार के नए नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज अपना कार्यभार संभाल लिया है। लेकिन, उन्होंने ऐसे वक्त में यह जिम्मेदारी संभाली है, जब यह सेक्टर बहुत ही मुश्किल दौर से गुजर रहा है। लगातार दो साल से कोरोना ने इसकी हालत और पतली कर रखी है। लेकिन, सिंधिया अपने पिता और पूर्व केंद्रीय उड्डयन मंत्री माधवराव सिंधिया के सपनों को साकार करना चाहते हैं। ऐसे में देखना होगा कि सिर्फ दो साल में ही करीब 8 अरब डॉलर के अनुमानित नुकसान झेल रहे इस सेक्टर को संकट से उबार कर पिता के सपनों को बुलंदियों पर कैसे पहुंचाएंगे।

पिता के सपनों को बुलंदियों पर पहुंचाना चाहते हैं सिंधिया

पिता के सपनों को बुलंदियों पर पहुंचाना चाहते हैं सिंधिया

ज्योतिरादित्य सिंधिया के कार्यभार संभालने से पहले उनके केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री बनने पर उनकी बुआ यशोधरा राजे सिंधिया ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए माधव राव सिंधिया के सपनों को याद दिलाया था। ट्विटर पर उन्होंने लिखा था 'यह मौका है भाई श्रीमन्त माधवराव सिंधिया के सपनों को नई बुलंदी देने का!' इसपर उनके भतीजे ने उन्हें धन्यवाद देते हुए जवाब दिया, 'प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में पूज्य पिताजी के सपने को साकार करने का हर संभव प्रयास करूंगा।' माधव राव सिंधिया 90 के दशक में नागरिक उड्डयन मंत्री रहे थे और देश के एविएशन सेक्टर में उनके कुछ कार्य आज भी याद किए जाते हैं। लेकिन, जूनियर सिंधिया को यह जिम्मेदारी तब मिली है, जब पहले से मुश्किलों से गुजर रहा देश का एविएशन सेक्टर कोरोना महामारी की वजह से पिछले दो साल से भारी नुकसान झेल रहा है।

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    मुश्किल दौर से गुजर रहा है उड्डयन क्षेत्र

    मुश्किल दौर से गुजर रहा है उड्डयन क्षेत्र

    एविएशन कंसल्टेंसी एंड रिसर्च फर्म सीएपीए के अनुमानों के मुताबिक एविएशन सेक्टर कोरोना महामारी की सीधी मार झेल रहा है और लगातार दो वित्त वर्षों में उसे 8 अरब डॉलर के नुकसान होने की आशंका है। एयरलाइंस सेक्टर पिछले साल से ही सरकार से नुकसान से उबरने के लिए मदद की मांग कर रहा है। एटीएफ पर टैक्स कम करने की मांग तो वर्षों पुरानी हो चुकी है। यह एटीएफ को जीएसटी के दायरे में लाने की भी मांग कर रहा है, जिससे एक समानता के कारण लागत घट सके। सीएपीए के हेड कपिल कौल का कहना है कि यह सेक्टर कोविड के चलते बहुती ही बुरी स्थिति में फंस चुका है और ज्यादातर एयरलाइंस कर्ज वापसी न कर पाने जैसे जोखिम से गुजर रहे हैं। उनका कहना है कि 'इंडस्ट्री को अरबों डॉलर की दरकार है।' उन्होंने कहा है कि नए मंत्री को तत्काल एटीएफ पर एक्साइज ड्यूटी घटवाने की जरूरत है और उसे जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए।

    'एविएशन सिंधिया के डीएनए में है'

    'एविएशन सिंधिया के डीएनए में है'

    गौरतलब है कि एयर इंडिया का विनिवेश भी लंबित है। एमआरएईएस, मार्टिन कंसल्टिंग के मार्क डी मार्टिन ने कहा है, 'एविएशन सिंधिया के डीएनए में है। उनके पिता ओपन स्काई पॉलिसी के आर्किटेक्ट थे और जेट और सहारा और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस सभी उसी के प्रोडक्ट थे।' उनका कहना है कि मंत्री को एविएशन की जानकारी है। वह जानते हैं कि क्या करना है। 'अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए यह उनका सपना है .....जो 1991 में उनके पिता ने उड्डयन को युक्तिसंगत और पूर्ण बनाने के लिए किया .....लेकिन उनके सामने कई चुनौतियां है।'

    ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने चुनौतियां

    ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने चुनौतियां

    मार्टिन ने जो चुनौतियां बताई हैं, उनमें 'पवन हंस और एयर इंडिया का विनिवेश, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) को और सशक्त संगठन बनाने, एयरपोर्ट का तेजी से आधुनिकीकरण करने जैसी चीजें शामिल हैं। लेकिन, उनके पास ये सारे काम करने के लिए सिर्फ तीन साल हैं।' इनके अलावा पीएम मोदी की एविएशन सेक्टर में रीजनल कनेक्टिविटी के तहत जो स्कीम है, उसमें भी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर एयरपोर्ट को पट्टे पर देने में उनके मंत्रालय की भूमिका अहम है। कोरोना के दौरान यह काम भी धीमा हुआ है। इसके अलावा प्राइवेट एयरपोर्ट ऑपरेटर भी अपना काम जारी रखने के लिए सरकार से राहत की मांग कर रहे हैं, ताकि उनका ऑपरेशन भी जारी रहे और नौकरियां भी सुरक्षित रहें।

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