रिटायरमेंट की उम्र होगी 70! पेंशन की जगह मिलेगी फुल सैलरी, कहां हो रहा ये बड़ा बदलाव?
Germany Retirement Age: दुनिया भर में लोगों की औसत उम्र लगातार बढ़ रही है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, अच्छी चिकित्सा और जीवनशैली में सुधार की वजह से लोग पहले से ज्यादा लंबा और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। लेकिन इस सकारात्मक बदलाव ने सरकारों के सामने एक नई आर्थिक चुनौती खड़ी कर दी है। बढ़ती बुजुर्ग आबादी और पेंशन पर बढ़ते खर्च के कारण कई देशों को अपनी रिटायरमेंट नीतियों पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है।
जर्मनी कर सकता है बड़ा बदलाव
इसी दिशा में जर्मनी एक ऐतिहासिक फैसला लेने की तैयारी कर रहा है। जर्मन सरकार उस प्रस्ताव पर विचार कर रही है जिसके तहत 2090 के दशक की शुरुआत तक रिटायरमेंट की उम्र धीरे-धीरे बढ़ाकर 70 साल कर दी जाएगी। विशेषज्ञ समिति का कहना है कि गिरती जन्मदर और पेंशन सिस्टम पर बढ़ते दबाव की वजह से यह कदम जरूरी हो सकता है।

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ भी इस प्रस्ताव का समर्थन कर चुके हैं। उनका मानना है कि अगर भविष्य की पीढ़ियों के लिए पेंशन व्यवस्था को टिकाऊ बनाना है तो लोगों को अधिक समय तक काम करना होगा।
दुनिया में बढ़ रही है रिटायरमेंट एज की दौड़
अगर जर्मनी इस योजना को लागू करता है तो वह लीबिया के बराबर पहुंच जाएगा, जहां फिलहाल दुनिया में सबसे ज्यादा 70 साल की रिटायरमेंट उम्र तय है। दुनिया के कई विकसित देशों में पहले ही रिटायरमेंट की उम्र 67 साल तक पहुंच चुकी है। इनमें इटली, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, ग्रीस, डेनमार्क और आइसलैंड जैसे देश शामिल हैं। इटली और नीदरलैंड ने तो रिटायरमेंट उम्र को सीधे Life Expectancy से जोड़ दिया है।
वहीं ऑस्ट्रेलिया ने हाल के सालों में इसे 65 से बढ़ाकर 67 साल कर दिया है। अमेरिका में 1960 या उसके बाद जन्म लेने वाले लोगों के लिए पूर्ण रिटायरमेंट आयु 67 साल है, हालांकि 62 साल की उम्र में आंशिक लाभ के साथ रिटायरमेंट का विकल्प मौजूद है।
अलग-अलग देशों में कितनी है रिटायरमेंट उम्र?
दुनिया के कई देशों में रिटायरमेंट की उम्र काफी अलग-अलग है:
लीबिया - 70 men
इटली, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, अमेरिका, डेनमार्क - 67 साल
स्पेन - 66.5 साल
पुर्तगाल - 66.3 साल
आयरलैंड - 66 साल
कनाडा, जापान, बेल्जियम, ब्राजील, यूएई - 62 से 65 साल
भारत - 58 से 60 साल
यह आंकड़े बताते हैं कि विकसित देशों में लोग पहले की तुलना में अधिक समय तक वर्क फोर्स का हिस्सा बने रहते हैं।
भारत की स्थिति अभी अलग क्यों है?
भारत में अभी अधिकांश सरकारी नौकरियों में रिटायरमेंट की उम्र 60 साल है। वहीं निजी क्षेत्र में यह आमतौर पर 58 से 60 साल के बीच रहती है। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है। इसे डेमोग्राफिक डिविडेंड कहा जाता है। यही कारण है कि भारत की पेंशन व्यवस्था पर फिलहाल यूरोप जैसा दबाव नहीं दिखाई देता। हालांकि भविष्य में लाइफ एक्सपेक्टेंसी बढ़ने के साथ भारत को भी इस विषय पर गंभीरता से विचार करना पड़ सकता है।
रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के फायदे और चुनौतियां
सरकारों का मानना है कि ज्यादा उम्र तक काम करने से पेंशन पर बोझ कम होगा और टैक्स से होने वाली आय बढ़ेगी। साथ ही कई देशों में श्रमिकों की कमी को भी दूर किया जा सकेगा। लेकिन इस फैसले का विरोध भी हो रहा है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि शारीरिक मेहनत वाले काम करने वालों के लिए 70 साल तक नौकरी करना आसान नहीं होगा। इसके अलावा युवाओं के लिए नई नौकरियों के अवसर भी प्रभावित हो सकते हैं।
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