IIT से पढ़ाई, 12 दिन की नौकरी फिर UPSC का ख्याल! दिलचस्प है 3 बार इंटरव्यू में रिजेक्ट होकर IPS बनने की कहानी
IPS Mohibullah Ansari Success Story: UPSC की परीक्षा को देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिना जाता है। हर साल लाखों युवा इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही लोगों को मिलती है। ऐसे में उन उम्मीदवारों की कहानियां लोगों को सबसे ज्यादा प्रेरित करती हैं जिन्होंने मुश्किल हालात के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल किया।
बिहार के सिवान जिले के रहने वाले मोहिबुल्ला अंसारी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक समय ऐसा था जब वह प्री-बोर्ड परीक्षा में फेल हो गए थे और परिवार के लोगों के ताने सुनने पड़ते थे। लेकिन बाद में उन्होंने खुद को साबित किया, आईआईटी में दाखिला लिया और कई असफलताओं का सामना करने के बाद आखिरकार यूपीएससी परीक्षा पास कर IPS अधिकारी बने।

पढ़ाई में नहीं लगता था मन
मोहिबुल्ला अंसारी का बचपन आम छात्रों से काफी अलग रहा। उनका मन पढ़ाई में ज्यादा नहीं लगता था। स्कूल के दिनों में वह अक्सर किसी न किसी परेशानी में फंस जाते थे। इसी वजह से उनके कुछ साथी मजाक में उन्हें "मुसीबतउल्लाह" कहकर बुलाते थे। पढ़ाई में लगातार गिरते प्रदर्शन के कारण परिवार भी चिंतित रहता था।
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प्री-बोर्ड में फेल होने पर मिली बड़ी सीख
मोहिबुल्ला ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनका सपना IIT में पढ़ने का था। लेकिन 12वीं की प्री-बोर्ड परीक्षा में वह फेल हो गए। इस दौरान उनके पिता ने ताना मारते हुए कहा कि पहले पास होने लायक नंबर तो ले आओ, फिर IIT की बात करना। पिता की यह बात उन्हें अंदर तक चुभ गई।
उन्होंने महसूस किया कि जिस IIT का सपना वह देख रहे हैं, वहां पहुंचने से पहले उन्हें अपनी बुनियाद मजबूत करनी होगी। इसके बाद उन्होंने पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना शुरू कर दिया और बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ JEE की तैयारी में जुट गए।
मेहनत रंग लाई, IIT दिल्ली में मिला दाखिला
लगातार मेहनत का नतीजा जल्द ही सामने आया। मोहिबुल्ला ने JEE मेन और JEE एडवांस दोनों परीक्षाएं पास कर लीं। साल 2011 में उन्हें IIT दिल्ली में केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए प्रवेश मिल गया। हालांकि IIT पहुंचने के बाद भी उनका सफर पूरी तरह आसान नहीं रहा। पढ़ाई के साथ-साथ वह हॉस्टल गतिविधियों, डिबेट और कैंपस की दूसरी गतिविधियों में भी काफी समय देने लगे। इसका असर उनके अकादमिक प्रदर्शन पर पड़ा और उनके अंक उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे।
नौकरी मिली, लेकिन संतुष्टि नहीं मिली
साल 2015 में BTech पूरा करने के बाद उन्हें नौकरी मिल गई। यह वह पड़ाव था जिसका सपना ज्यादातर छात्र देखते हैं। लेकिन नौकरी शुरू करने के कुछ ही दिनों बाद उन्हें एहसास होने लगा कि उनका मन इस काम में नहीं लग रहा है।उन्होंने बताया कि नौकरी करते हुए केवल 12 दिन ही हुए थे और तब तक उन्हें महसूस हो गया था कि उनका रास्ता कुछ और है। इसी सोच के साथ उन्होंने नौकरी छोड़ने का बड़ा फैसला लिया।
UPSC की तैयारी के लिए लौटे दिल्ली
नौकरी छोड़ने के बाद मोहिबुल्ला ने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय किया। वह दिल्ली आ गए और पूरी गंभीरता के साथ UPSC परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई की। मेहनत का असर यह हुआ कि पहले ही प्रयास में उन्होंने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों पास कर लीं। लेकिन इंटरव्यू में पहुंचकर उनकी घबराहट उन पर भारी पड़ गई।
इंटरव्यू में बार-बार मिली निराशा
मोहिबुल्ला के अनुसार इंटरव्यू के दौरान वह इतने नर्वस हो गए थे कि आसान सवालों के जवाब भी ठीक से नहीं दे पाए। नतीजा यह रहा कि अंतिम चयन नहीं हो सका। अगले प्रयास में भी वह इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। लगातार कोशिशों के बावजूद तीन बार उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा। कई उम्मीदवार ऐसे मौके पर हार मान लेते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी।
चौथे प्रयास में हासिल की सफलता
साल 2021 में मोहिबुल्ला अंसारी ने एक बार फिर UPSC सिविल सेवा परीक्षा दी। इस बार उनका आत्मविश्वास पहले से कहीं ज्यादा मजबूत था। उन्होंने प्रीलिम्स और मेंस परीक्षा पास करने के बाद इंटरव्यू भी सफलतापूर्वक क्लियर कर लिया।
अंतिम परिणाम में उन्हें 381वीं रैंक मिली। इसी रैंक के साथ उनका आईपीएस अधिकारी बनने का सपना पूरा हो गया। प्री-बोर्ड में फेल होने वाले छात्र से लेकर आईपीएस अधिकारी बनने तक का उनका सफर आज हजारों युवाओं को मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयास की सीख देता है।
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