IIT बॉम्बे का रुतबा भी पड़ा फीका! JEE AIR 8 कनिष्क जैन ने क्यों छोड़ी सीट? किस यूनिवर्सिटी में करेंगे पढ़ाई?

Kanishk Jain JEE AIR 8: देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में गिने जाने वाले IIT में दाखिला पाना लाखों छात्रों का सपना होता है। खासकर IIT बॉम्बे का कंप्यूटर साइंस कोर्स, जिसे हर साल जेईई एडवांस्ड के टॉप रैंकर्स पहली पसंद के रूप में चुनते हैं। इसके बावजूद हाल के वर्षों में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। कई टॉपर IIT की सीट छोड़कर अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) का रुख कर रहे हैं।

इस साल भी ऐसा ही हुआ है। JEE एडवांस्ड 2026 में ऑल इंडिया रैंक 8 (AIR-8) हासिल करने वाले कनिष्क जैन (Kanishk Jain) ने IIT बॉम्बे के चर्चित BTech कंप्यूटर साइंस कोर्स की जगह MIT में पढ़ाई करने का फैसला किया है। उनकी यह पसंद एक बार फिर देश के शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बन गई है।

Kanishk Jain AIR 8

AIR 8 कनिष्क जैन ने चुना MIT

जेईई एडवांस्ड 2026 में 313 अंक हासिल करने वाले कनिष्क जैन आईआईटी बॉम्बे जोन से हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उनका एमआईटी में दाखिला पूरी तरह तय हो चुका है और प्रवेश से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। कनिष्क के इस फैसले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर देश के टॉप छात्र IIT की जगह विदेशी विश्वविद्यालयों को क्यों चुन रहे हैं।

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रिसर्च में रुचि बनी वजह

कनिष्क की मां सरिता जैन ने बताया कि उनका बेटा फिजिक्स के क्षेत्र में रिसर्च करना चाहता है। उनका कहना है कि एमआईटी में छात्रों को शुरुआती वर्षों में ही शोध कार्य से जुड़ने का मौका मिल जाता है। जानकारी के अनुसार वहां दूसरे वर्ष से ही रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया जा सकता है। यही वजह रही कि कनिष्क ने एमआईटी को प्राथमिकता दी। उनके माता-पिता दोनों आईटी सेक्टर से जुड़े हैं और परिवार मूल रूप से राजस्थान के कोटा का रहने वाला है।

पिछले साल भी रैंक 8 छात्र ने लिया था यही फैसला

यह पहली बार नहीं है जब जेईई एडवांस्ड के टॉप रैंक वाले छात्र ने आईआईटी छोड़कर एमआईटी को चुना हो। पिछले साल जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 8 हासिल करने वाले देवेश भी एमआईटी गए थे। इससे पहले 2024 के टॉपरों में शामिल वेद लाहोटी ने भी आईआईटी बॉम्बे में एक साल पढ़ाई करने के बाद एमआईटी का रुख किया था। उन्हें वहां फुली फंडेड स्कॉलरशिप मिली थी, जिसके बाद उन्होंने ट्रांसफर का फैसला लिया।

वेद लाहोटी ने क्या कहा था?

अपने फैसले को लेकर वेद लाहोटी ने कहा था कि वह आईआईटी बॉम्बे से संतुष्ट थे, लेकिन रिसर्च के मामले में उन्हें बेहतर अवसर चाहिए थे। उनका मानना था कि वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष विश्वविद्यालयों की तुलना में आईआईटी अभी काफी पीछे है। एमआईटी में पढ़ रहे अन्य भारतीय छात्रों से बातचीत के बाद उन्हें लगा कि वहां जाना उनके लिए बेहतर विकल्प होगा। हालांकि उन्होंने साफ किया था कि उनकी अमेरिका में स्थायी रूप से बसने की कोई योजना नहीं है।

कई टॉपर पहले भी छोड़ चुके हैं IIT

बीते कुछ वर्षों में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं। जेईई एडवांस्ड 2020 के टॉपर चिराग फालोर ने भी एमआईटी का रास्ता चुना था। वहीं 2014 के टॉपर चित्रांग मुर्डिया ने आईआईटी बॉम्बे में एक साल बिताने के बाद एमआईटी में प्रवेश लिया था। बाद में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले से पीएचडी पूरी की।

निशंक अभंगी ने भी आईआईटी बॉम्बे में कुछ समय पढ़ाई करने के बाद एमआईटी जाने का फैसला लिया था। 2022 में ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल करने वाले महित गढ़ेवाला ने भी एक साल बाद आईआईटी बॉम्बे छोड़ दिया था।

JEE रैंक 99 वाले छात्र ने भी चुना था MIT

साल 2023 में जेईई एडवांस्ड में 99वीं रैंक पाने वाले साहिल अख्तर ने भी आईआईटी में दाखिला नहीं लिया था। उन्होंने एमआईटी को चुना और कहा था कि उनका लक्ष्य रिसर्च के क्षेत्र में करियर बनाना है। उनके अनुसार एमआईटी में शोध से जुड़ी सुविधाएं और अवसर अधिक व्यापक हैं।

QS रैंकिंग में लगातार शीर्ष पर MIT

वैश्विक विश्वविद्यालय रैंकिंग में एमआईटी लंबे समय से शीर्ष स्थान बनाए हुए है। क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भी एमआईटी को दुनिया का नंबर-1 विश्वविद्यालय माना गया है। इसके बाद इंपीरियल कॉलेज लंदन, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों का स्थान आता है।

भारतीय संस्थानों की बात करें तो आईआईटी दिल्ली 118वें और आईआईटी बॉम्बे 134वें स्थान पर हैं। यही वजह है कि रिसर्च और वैश्विक अवसरों की तलाश करने वाले कुछ टॉप छात्र अब विदेश के प्रमुख संस्थानों को चुन रहे हैं।

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