बोरियों में अधजले नोट, CJI ने मांगे कॉल रिकॉर्ड, जांच के लिए कमेटी, जस्टिस यशवंत वर्मा केस के 5 बड़े अपडेट
Delhi High Court Justice Yashwant Varma: दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से मिले कैश की तस्वीरें और वीडियो अब सार्वजनिक हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी अधिकारिक वेबसाइट पर दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर कथित नकदी के बारे में एक रिपोर्ट अपलोड की है, जहां आग बुझाने के बाद अग्निशमन कर्मियों को कथित तौर पर जली हुई नकदी का ढेर मिला था।
दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय ने इंटरनल इन्क्वायरी के बाद सुप्रीम कोर्ट को 21 मार्च को रिपोर्ट सौंपी थी। जिसके बाद 22 मार्च की देर रात सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है। रिपोर्ट के साथ सुप्रीम कोर्ट ने 3 तस्वीरें भी जारी की है, जिसमें 500 रुपये के जले हुए नोटों के बंडल दिख रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं जज यशवंत वर्मा के खिलाफ 'कैश एट होम' मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?

🔴 1. जज यशवंत वर्मा के आवास से 4-5 अधजली बोरियां मिलीं
सुप्रीम कोर्ट द्वारा शनिवार 22 मार्च की देर रात सार्वजनिक की गई रिपोर्ट में जले हुए नकदी के बंडलों की तस्वीरें और वीडियो भी शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 14 मार्च को जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर आग लगने के बाद दिल्ली फायर की टीम वहां पहुंची थीं। आग बुझाने के अभियान के बाद 4-5 अधजली बोरियां मिलीं, जिसमें कैश भरे हुए हैं। तस्वीरों में भी जले हुए नोट देखे जा सकते हैं।
🔴 2. 'जहां कैश मिला, वहां जज यशवंत वर्मा के परिवार ने कभी पैसा नहीं रखा'
सुप्रीम कोर्ट ने जो रिपोर्ट जारी की है, उसमें ये भी कहा गया है कि जिस स्टोर रूम में नोटों के बंडल मिले हैं, वहां जस्टिस यशवंत वर्मा या उनके परिवार के किसी भी सदस्य ने कभी कोई पैसा नहीं रखा। वो आवास में एक ऐसी खुली जगह है, जहां हर किसी का आना-जाना होता रहता है। हो सकता है कि उन्हें इस मामले में फंसाया जा रहा है।
दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस आयुक्त ने एक गार्ड के बयान का हवाला दिया है कि 15 मार्च को जिस कमरे में आग लगी थी, वहां से मलबा और जली हुई चीजें हटा दी गई थीं। उन्हें निवासियों, कर्मचारियों और सीपीडब्ल्यूडी कार्यकर्ताओं के अलावा किसी अनधिकृत प्रवेश का कोई संकेत नहीं मिला।
दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने रिपोर्ट में आगे लिखा है, "मेरे द्वारा की गई जांच में प्रथम दृष्टया बंगले में रहने वाले लोगों, नौकरों, माली और सीपीडब्ल्यूडी कर्मियों (यदि कोई हो) के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के कमरे में प्रवेश या पहुंच की संभावना नहीं दिखती। इसलिए मेरी प्रथम दृष्टया राय है कि पूरे मामले की गहन जांच की आवश्यकता है।"
🔴 3. आरोपों पर क्या बोले जज यशवंत वर्मा?
सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट में जज यशवंत वर्मा का जवाब भी है। जज यशवंत वर्मा ने आरोपों को स्पष्ट रूप से नकारते हुए कहा कि न तो उन्होंने और न ही उनके परिवार के सदस्यों ने कभी स्टोर रूम में नकदी रखी है। जज यशवंत वर्मा ने कहा कि वह इस बात की कड़ी निंदा करते हैं कि कथित नकदी हमारी थी।
रिपोर्ट में दर्ज किए गए अपने जवाब में जस्टिस यशवंत वर्मा ने कहा,
"मैं स्पष्ट रूप से कहता हूं कि न तो मैंने और न ही मेरे परिवार के किसी सदस्य ने कभी भी उस स्टोर रूम में कोई नकदी जमा की थी। समय-समय पर की गई हमारी नकदी निकासी सभी दस्तावेजित हैं और हमेशा नियमित बैंकिंग चैनलों, यूपीआई एप्लिकेशन और कार्ड के इस्तेमाल से की गई है। जहां तक नकदी बरामदगी के आरोप का सवाल है, मैं एक बार फिर स्पष्ट करता हूं कि मेरे घर के किसी भी व्यक्ति ने कभी भी कमरे में जले हुए कैश देखने की सूचना नहीं दी।"
जज यशवंत वर्मा ने कहा है कि वह पुलिस आयुक्त द्वारा साझा किए गए वीडियो और तस्वीरों से हैरान हैं, क्योंकि वे कथित तौर पर उस चीज से मेल नहीं खाते जो उन्होंने मौके पर देखी थी। उन्होंने दावा किया कि यह उन्हें फंसाने और बदनाम करने की साजिश थी।
न्यायमूर्ति वर्मा ने अपने जवाब में कहा,
"यह हाई कोर्ट के गेस्टहाउस में हमारी बैठक के दौरान था कि मुझे पहली बार वीडियो और अन्य तस्वीरें दिखाई गईं, जिन्हें पुलिस आयुक्त ने आपके (मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय) साथ साझा किया था। मैं वीडियो की सामग्री को देखकर पूरी तरह से हैरान था क्योंकि उसमें कुछ ऐसा दिखाया गया था, जो मौके पर नहीं मिला था, जैसा कि मैंने देखा था। यही वह बात थी यह स्पष्ट रूप से मुझे फंसाने और बदनाम करने की साजिश है।"
🔴 4. सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए बनाई तीन सदस्यीय समिति
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने दिल्ली हाई कोर्ट के वर्तमान जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। इस कमेटी में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू, कर्नाटक हाई कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस अनु शिवरामन और हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जी.एस. संधावालिया शामिल हैं। जांच की वजह से जस्टिस यशवंत वर्मा को कोई न्यायिक कार्य ना सौंपने का निर्देश दिया गया है।
🔴 5. जस्टिस यशवंत वर्मा के कॉल रिकॉर्ड मांगे गए
भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने रिपोर्ट मिलने के बाद 21 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय को पत्र लिखकर आगे की जांच के लिए जस्टिस यशवंत वर्मा के पिछले छह महीनों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (आईडीपीआर) मांगे हैं।
चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने लिखा, ''जस्टिस यशवंत वर्मा से अनुरोध किया जाता है कि वे अपने मोबाइल फोन से किसी भी बातचीत, संदेश या डेटा को डिलीट या संशोधित न करें। मोबाइल की हर जानकारी आगे की कार्रवाई के लिए मुझे तुरंत उपलब्ध कराया जाए।''












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